बिहार में खरीफ कार्यशाला, 2018 का शुभारंभ

पटना के बामेती सभागार में कृषि विभाग की ओर से राज्यस्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। बिहार के कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार द्वारा राज्य में खरीफ महाभियान-सह-महोत्सव, 2018 का शुभारम्भ इस कार्यक्रम के उद्घाटन कर किया गया। 

उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा अपने योजनाओं की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराने, खरीफ मौसम की खेती-बारी की तकनीकी जानकारी उन्हें उपलब्ध कराने, उनके फसलों की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों की आमदनी में वृद्घि के लिए इस कार्यक्रम को चलाने का निर्णय लिया गया है। राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों यथा मिट्टी जल एवं पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए किसानों की आमदनी में वृद्घि के लिए कृषि विभाग कृत संकल्पित है। खरीफ में व्यापक लक्ष्य निर्धारित किये गये है।

राज्य के किसानों को उत्पादान तथा योजनाओं में विहित अनुदान सुलभ एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्थायें की गई हैं। लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रशासनिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। खरीफ में कुल 41़20 लाख हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की खेती से कुल 122़74 लाख मैट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो गत वर्ष 2017 की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। गत वर्ष खरीफ 2017 में 35़90 लाख हे0 में आच्छादन तथा 84़91 लाख मैट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसकी अच्छी उपलब्धि रही हैं। इस खरीफ मौसम में 34 लाख हेक्टेयर में धान की खेती से कुल 102 लाख मैट्रिक टन चावल अर्थात 153 लाख मेट्रिक टन धान उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इसी प्रकार से खरीफ 2018 में 4़75 लाख हेक्टेयर में मक्का की खेती से कुल 18़00 लाख मैट्रिक टन का उत्पादन, 1़75 लाख हेक्टेयर में दलहन की खेती से कुल 2़0 लाख मेट्रिक टन का उत्पादन एवं 0.़20 लाख हेक्टयर में तेलहन की खेती से 0़.24 लाख मैट्रिक टन तेलहन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। खरीफ मौसम में कुल खाद्यान्न एवं तेलहन के लिए निर्धारित उत्पादन के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभाग की ओर से रणनीति के तहत खरीफ महाभियान के रूप में इसे राज्य,प्रमंडल व जिला एवं प्रखंड स्तर पर चलाने का निर्णय लिया गया है। 

उन्होंने कहा कि 14 मई 2018 को राज्य के सभी 09 प्रमंडलों में कर्मशाला आयोजित किया जाएगा। 17 मई 2018 को राज्य के सभी 38 जिलों में प्रशिक्षण सह कर्मशाला आयोजित होगा। 19 मई, 2018 को पटना से कृषि महाभियान-सह-बीज वाहन विकास वाहन रथों को हरी झण्डी दिखाकर जिलों के लिए रवाना किया जाएगा। इन रथों को वाद्य श्रव्य यंत्रों एवं तकनीकी बुलेटिन से सुसज्जित किया जाएगा। इन रथों पर विभिन्न फसलों के बीज एवं बीज उपचार के लिए कीटनाशी रखा जाएगा तथा ऑन द स्पॉट किसानों को बीज उपलब्ध कराते हुए बीजोपचार किया जाएगा। इन रथों को आम जनों की जानकारी के लिए ग्राम पंचायत स्तर/ग्राम स्तर पर घुमाया जाएगा।

23 मई से 31 मई 2018 तक प्रखंड स्तरीय दो दिवसीय प्रशिक्षण सह उपादान वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रथम दिन किसानों को कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी एवं खरीफ मौसम में खेती बारी के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा दूसरे दिन विभाग द्वारा कार्यान्वित योजनाओं के लिए चयनित किसानों को अनुदान पर उपादान उपलब्ध कराया जाएगा। 

कहा कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 25,000 एकड़ में जैविक खेती के अंगीकरण एवं प्रमाणीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जैविक सब्जी को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार सरकार द्वारा भारत में पहली बार राज्य के चार जिलों पटना, नालंदा, वैशाली एवं समस्तीपुर में 6,000 एकड़ के लिए 20,000 से अधिक किसानों को अग्रिम अनुदान के रूप में 6,000 रूपये प्रति 30 डिसमल भूमि के लिए राशि ई-कैश के माध्यम से सीधे उनके खाते में उपलब्ध कराई गई है। बक्सर से भागलपुर के बीच गंगा के किनारे कुल 12 जिलों में जैविक कोरिडोर को विस्तारित किया जा रहा है। साथ ही, भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नमामी गंगे स्वच्छता अभियान के अंतर्गत 5 जिलों भोजपुर, बक्सर, छपरा, वैशाली एवं पटना में 103 कलस्टर में जैविक खेती एवं उनके प्रमाणीकरण के कार्यक्रम हेतु लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

राष्ट्रीय राजमार्ग पटना से बिहार शरीफ, नवादा, गया, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर तथा भोजपुर में भी जैविक कोरिडोर को विस्तारित करने की योजना स्वीकृत की जा रही है। जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए सिक्किम राज्य जो पूर्णत: जैविक राज्य घोषित है के साथ एमओयू किया गया है। राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पक्का वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन इकाई के निर्माण के लिए 5,000 रूपये तथा व्यावसायिक रूप में 1,000, 2,000 एवं 3,000 मेट्रिक टन वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन इकाईयों के लिए लागत मूल्य का 40 प्रतिशत अधिकतम क्रमश:  6़40 लाख रूपये, 12़80 लाख रूपये एवं 20 लाख रूपये क्रमश: का अनुदान दिया जा रहा है। 

डॉ कुमार ने कहा कि गर्मा मौसम में 80 प्रतिशत अनुदान पर गर्मा मूंग का वितरण कराया गया है। अनुदान पर गोबर गैस, जैव उर्वरक एवं वर्मी कम्पोस्ट के वितरण, फेरामॉन टेप तथा जैव कीटनाशियों पर भी अनुदान दिया जा रहा है। राज्य में कृषि यंत्रों को बढ़ावा देने के लिए कुल 71 प्रकार के कृषि यंत्रों में 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। वर्ष 2018-19 में 160 करोड़ की कृषि यांत्रिकरण की योजना स्वीकृत की जा चुकी है। भूमिहीन एवं छोटे जोत वाले किसानों को भाड़े पर कृषि यंत्रों की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 10 लाख, 25 लाख एवं 40 लाख रूपये के कृषि यंत्र बैंक की स्थापना के लिए 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। खरीफ मौसम में अतिवृष्टि, बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने के लिए आकस्मिक फसल योजना तैयार की गई है। सुखाड़ के लिए कुल 60 करोड़ रूपये की डीजल अनुदान की योजना स्वीकृत की जा रही है तथा 15 करोड़ रूपये बीज के लिए स्वीकृत किया जा रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित चार प्रतिशत ब्याज में से एक प्रतिशत ब्याज पर अनुदान विभाग द्वारा देने के लिए पांच करोड़ की योजना स्वीकृत की जा रही है। 

उन्होंने आगे कहा कि खरीफ मौसम में तनाव रोधी स्वर्णा सब-1, सहभागी एवं सम्पदा धान प्रभेदों में बीज पर 80 प्रतिशत अनुदान पर कुल 18,000 क्विंटल बीज मिनी कीट के रूप में वितरित करने के लिए कुल 849़60 लाख रूपये की योजना स्वीकृत की गई है। वर्ष 2018-19 में किसानों के खेतों से 6,54,389 मिट्टी नमूनों को संग्रहकर कुल 36,18,116 किसानों को नि:शुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। विभिन्न फसलों की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने तथा लागत मूल्य कम करने के लिए किसानों को अधिक उपजशील धान बीज पर 15 रुपये प्रति किलो अनुदान दिया जाएगा। खरीफ मौसम में राज्य में सभी 8,405 पंचायतों में किसान चौपाल लगाया जाएगा।

इसे कृषि, पशुपालन, मत्स्य एवं सहकारिता विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी तथा किसानों से कृषि संबंधी विषयों पर सुझाव भी प्राप्त किया जाएगा। किसानों के उत्पादों का लागत मूल्य कम करने, उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने एवं उनके विपणन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए बिहार के प्रत्येक प्रखंड में 15 जून, 2018 तक एक-एक कृषक उत्पादक संगठन का गठन सुनिश्चित किया जाएगा। कुल 1,068 किसान हित समूह एवं 534 महिला समूहों का गठन कर उन्हें प्रशिक्षण तथा रिवॉल्विंग फण्ड व सीड मनी देकर सशक्त एवं स्वावलम्बी बनाया जाएगा। कुल 70 प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से कुल 5,880 युवा/युवतियों/व्यक्तियों को कृषि के 16 कोर्सों में कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

खरीफ मौसम में विभिन्न फसलों के निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति हेतु किसानों को उच्च गुणवत्ता का बीज, उर्वरक एवं कीटनाशी समय पर उपलब्ध कराया जायेगा। इसके लिए बीज, उर्वरक एवं कीटनाशी दुकानों का लगातार निरीक्षण किया जाए एवं नमूना लेकर गुणवत्ता जाँच के लिए जाँच प्रयोगशालाओं को भेजना सुनिश्चित किया जाए तथा अमानक पाए जाने पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाए।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार कृषि उतदन आयुक्त सुनिल कुमार सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रधान सचिव सुधीर कुमार, कृषि निदेशक  हिमांशु कुमार राय, निदेशक, भूमि संरक्षण गुलाब राय, निदेशक, पीपीएम  धनंजयपति त्रिपाठी, निदेशक, बिहार राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणन एजेन्सी बैंकटेश नारायण सिंह, निदेशक, बामेती गणोश कुमार सहित विभागीय मुख्यालय एवं क्षेत्र के पदाधिकारीगण, कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकगण तथा प्रगतिशील किसान भाई व बहन उपस्थित थे। 

संदीप कुमार

Comments