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सकारात्मक बैठक के जरिए किसान उद्यमियों को पूर्ति-प्रोत्साहन पुरस्कार, सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धंजलि

छोटे और लघु किसान उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में सकारात्मक बैठक और पूर्ति-प्रोत्साहन पुरस्कार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. आयोजन में दिल्ली और आसपास के कई ग्रामिण उद्यमियों ने हिस्सा लिया. सकारात्मक बैठक कार्यक्रम का उद्देश्य यह दिखाना था की किस तरह से सकारात्मक सोच किसी के जीवन में बदलाव ला सकती है. आज के मौजूदा वक्त में किस प्रकार से लोगों के मन में नाकारात्मक सोच हावी हो रहा है और वो सकारात्मक सोच से दूर जा रहे हैं. कार्यक्रम में कई ऐसे लोग भी मौजूद थे जिनके जीवन में सकारात्मक सोच के जरिए बहुत बड़ा बदलाव आया है.

इसके साथ ही पूर्ति-प्रोत्साहन पुरस्कार के जरिए कई किसान उद्यमियों को कार्यक्रम में सम्मानित किया गया. पूर्ति-प्रोत्साहन का मुख्य उद्देश्य किसान लघुउद्यमियों के काम को समाज के सामने लाना एवं उनको उचित मंच और समाज में सम्मान दिलाना है. वहीं पूर्ति-प्रोत्साहन परस्कार पाने वाले किसान उद्यमियों ने बताया की इस प्रकार के आयोजनों से उनका मनोबल बढ़ता है और आगे आने वाले वक्त में कुछ और अच्छा करने की जिज्ञासा बढ़ती है.

कार्यक्रम का आयोजन डॉ.नरेंद्र टटेसर के द्वारा किया गया था जिन्होंने किसान उद्यमियों को लेकर अपनी बातों को लोगों के सामने रखा. उन्होंने सकारात्मक सोच के बारे में लोगों से बात करते हुए कहा कि किस प्रकार सकारात्मक सोच लोगों की जीवन में बदलाव ला सकता है उसका उदाहरण यहां मौजूद हमारे किसान उद्यमियों ने दिखाया है. उन्होंने कहा की नकारात्मक सोच हमेशा इंसान की जिंदगी में  इसके साथ ही कार्यक्रम में क्रांतिकारी स्वत्रंता सेनानी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि अर्रपित की गई. इस दौरान देश के लिए उनके द्वारा किये गये महान कार्यों को लोगों के सामने रखा गया. वहीं पूर्ति- प्रोत्साहन पुरस्कार को लेकर उन्होंने कहा कि "आजीविका के आय के स्रोत का सवाल हमेशा ही महत्वपूर्ण रहा है. जो व्यक्ति शिक्षित होकर भी नौकरी के लिये यहां, वहां न जाकर के.वी.के एवं केवीआईसी जैसी एजेंसियों से प्रशिक्षण प्राप्त कर उद्यम का जोखिम उठाते हैं वे समाज का बहुत महत्वपूर्ण अंग हैं उन सबकी योग्यता को पहचान एवं सम्मान दिलाना ही हमारा उद्देश्य है".

 

जिम्मी



English Summary: Fulfillment-Incentive Award to the Kisan Entrepreneurs through the Positive Meet, Shubhash Chandra Bose

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