अब कृषि छात्र जानेंगे किसानों की आत्महत्या का कारण

होशंगाबाद। हर सीजन में किसान आत्महत्या करते हैं। हर बार यही सामने आता है कि किसान ने फसल बर्बाद होने या आर्थिक तंगी के कारण मौत को गले लगाया है। इस तरह के मामलों पर राजनीति भी खूब होती है लेकिन इसके ठोस कारणों को जानने की कभी कोई कोशिश नहीं हुई।

ऐसे में कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा के छात्र जल्द ही किसान आत्महत्या को अपना शोध विषय बनाने जा रहे हैं। वे दीपावली के बाद जिले में आत्महत्या करने वाले किसानों पर केस स्टडी करेंगे। इस शोध के माध्यम से जानेंगे कि किन परिस्थितियों में किसान आत्महत्या जैसा कदम उठाता है और उसके सामने यह स्थितियां क्यों निर्मित होती है।

वे इसके लिए किसान के आर्थिक,सामाजिक और पारिवारिक पहलू का भी अध्ययन करेंगे। इसके बाद यह छात्र अपनी केस स्टडी के आधार पर एक रिपोर्ट बनाकर प्रस्तुत करेंगे। इस रिपोर्ट को केंद्र और प्रदेश के कृषि मंत्रालय को भी भेजा जाएगा।

यह होगा केस स्टडी का तरीका 

1.अलग-अलग ग्रुप में छात्र किसान के गांव और परिवार से मुलाकात करेंगे।

2.जिन किसानों ने आत्महत्या कर ली है, उनकी पुलिस जांच की रिपोर्ट को पढ़ेंगे।

3.आत्महत्या के पहले किसान का आचार-व्यवहार किस तरह का रहा है।

4.किसान किस तरह की जीवनशैली में रह रहा था,उसका फैमली बैकग्राउंड कैसा रहा है।

 

खेती के तौर तरीके भी देखेंगे

1.जिस किसान ने आत्महत्या की है, वह किस तरह की खेती करता था।

2.क्या किसान परपंरागत खेती करता था या फिर समय के अनुसार बदलाव करता था।

3. अपनी खेती के लिए वह किस तरह के संसाधनों का उपयोग करता आ रहा था।

4.आत्महत्या करने वाले किसान ने सरकारी अनुदान लिया था या नहीं।

 

आर्थिक पहलू में यह देखा जाएगा

1.किसान खेती के लिए कब-कब और कितना कर्ज लेता था, किससे लेता था।

2.वह खेती किसानी के अलावा और किन परिस्थितियों में कर्ज लेता था।

3.उसने जो कर्ज लिया था, वह उसकी अदायगी कैसे करता था ।

4.किसान खेती के अलावा डेयरी या अन्य कोई व्यवसाय क्यों नहीं करता था।

 

उन्नत किसानों से भी लेंगे राय 

कृषि महाविद्यालय के छात्र केवल आत्महत्या करने वाले किसान की ही केस स्टडी नहीं करेंगे, बल्कि क्षेत्र के ऐसे किसानों पर भी अध्ययन करेंगे जो खेती के दम पर ही संपन्न् हैं। इसमें यह देखा जाएगा कि यह किसान किस तरह की खेती से संपन्न् हैं। उसकी खेती करने का तरीका क्या है,वह कर्ज से कैसे बचता है। वह खेती के अलावा अन्य वैकल्पिक तरीकों का कैसे उपयोग करता है। साथ ही इन उन्न्त किसानों से यह भी जानने की कोशिश की जाएगी कि आत्महत्या करने वाले किसान और उनके खेती करने के तरीके में क्या अंतर है, वह कहां पर क्या गलती कर रहा था?

सरकारी योजना का सच भी देखेंगे

अपनी रिपोर्ट में छात्र यह भी बताएंगे कि शासन से चलने वाली योजनाएं वास्तव में जरूरतमंद किसानो तक भी पहुंच पा रही हैं या नहीं? यदि नहीं पहुंच पा रही हैं तो इसका कारण क्या है? इन योजनाओं में और क्या सुधार हो सकता है? किसान किस तरह से इन योजनाओं का लाभ सबसे सरल तरीके से उठा सकता है? छोटी जोत वाले किसानों के लिए क्या प्लानिंग होनी चाहिए? उनको किस तरह से खेती करनी चाहिए? यह तमाम जानकारी अपनी केस स्टडी में यह छात्र देंगे।

छात्रों के लिए जानना जरूरी 

एक सर्कुलर आया था और यह इन छात्रों को जानने के लिए भी बेहतर है कि किसान किन परिस्थितियों से गुजर रहा है। उसके मूल कारण क्या हैं? इसलिए दीपावली के बाद छात्रों से केस स्टडी करवाई जाएगी। वे जो रिपोर्ट बनाएंगे, उसे विश्वविद्यालय के साथ ही कृषि मंत्रालय को भेजेंगे। - डॉ डीके पहलवान, प्राचार्य कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा

 

 

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