
यूं तो पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में बेशुमार ऐसे मसले हैं, जिन्हें लेकर चर्चा अपने परवान पर है, लेकिन चर्चाओं की इस कश्मकश के बीच किसानों को लेकर चर्चाओं का बाजार कुछ खासा ही गुलजार है. वैसे भी किसानों का मसला हमेशा से ही हिंदुस्तान की सियासत में सुर्खियों में रहा है. वो भी ऐसे समय में जब चुनाव हो तो किसानों को लेकर बहस होना तो स्वाभाविक ही है. इसी कड़ी में हम आपको अपनी इस खास रिपोर्ट में किसानों से जुड़े उन सभी मसलों के बारे में जिक्र करने जा रहे हैं, जो पश्चिम बंगाल के हर एक सियासतदान के सियासी भविष्य को तय करने में अहम भूमिका अदा करेगी.
वैसे तो पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन इन चुनावी राज्यों में बंगाल कुछ खासा ही सुर्खियां बटोर रहा है. एक ओर जहां बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी किसानों की बदहाली को मुद्दा बनाकर ममता बनर्जी को घेरने का काम कर रही है, तो वहीं ममता बनर्जी बीजेपी की उन सभी योजनाओं की विफलताओं को हर चुनाव प्रचार में रेखांकित कर रही है, जो किसानों के हित के लिए शुरू की गई थी, लेकिन अफसोस वे अपने उद्देश्य में मुकम्मल होने में सफल नहीं हो पाई.
किसान सम्मान निधि योजना को लेकर छिड़ी बहस
किसानों के उत्थान के लिए शुरू हुई किसान सम्मान निधि योजना पश्चिम बंगाल में लागू नहीं हुई है, जिसे लेकर अमूमन बीजेपी टीएमसी पर हमलावर रहती है. इस बार बीजेपी ने राज्य के किसानों से वादा किया है कि अगर हमारी सरकार सत्ता में आने में कामयाब रहती है, तो हम प्रदेश के किसानों को किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली 6 हजार रूपए की राशि तो देंगे ही साथ ही इसके अतरिक्त 4 हजार रूपए की राशि भी देंगे. अब देखना यह होगा कि प्रदेश के किसानों को बीजेपी का यह वादा कितना भाता है.
यहां हम आपको बताते चले कि पश्चिम बंगाल में तकरीबन तीन वर्षों से किसानों को किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं मिला है. ऐसी स्थिति में मोदी सरकार ने कहा कि अगर उनकी सरकार पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने में कामयाब रहती है, तो प्रत्येक किसानों के खाते में तीन वर्षों की पूरी राशि 18 हजार रूपए भेजी जाएगी.
इसके साथ ही आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के वृद्ध किसानों को आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है. प्रदेश के किसानों को वृद्धा पेंशन योजना के तहत किसानों को प्रति माह 1 हजार रूपए देने का ऐलान किया है. खैर, अब देखना यह होगा कि बीजेपी के इन ऐलानों का वहां की जनता पर क्या असर पड़ता है.
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