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वर्तमान समय में मनुष्य में बढती हुई बीमारियों को रोकने का आसान उपाय - मछली सेवन

वर्तमान समय में बढ़ती हुई मानव जीवन की व्यस्तता, अनियमित दिनचर्या एवं प्रदूषित होते हुए वातावरण के कारण मानव स्वास्थ्य कईं बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो गया है, जो कि एक गंभीर चिन्ता का विषय है। साथ ही मनुष्य वर्तमान समय में अपने भोजन में पोषक तत्वों की अपेक्षा स्वाद को अधिक महत्व दे रहा है जिससे मनुष्य का शरीर अधिक मोटा होता जा रहा है एवं कम उम्र में ही अधिक रक्तचाप, याददाश्त कमजोर पड़ना एवं ह्दय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहा है। लेकिन यदि मछली के विषय में बात की जाये तो यह मानव स्वास्थ्य के लिए एक सम्पूर्ण पौष्टिक भोजन है क्योंकि इसमें लगभग सभी पौषक तत्व जैसे कि प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, वसाव, खनीज और लवण उपयुक्त मात्रा में पाये जाते हैं। मछली में पायी जाने वाली वसा में कॉलेस्ट्रौल का स्तर कम होता है अतः यह मानव स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती है।

मानव स्वास्थ्य के लिए ओमेगा-3 वसीय अम्ल अत्यन्त महत्वपूर्ण है। लेकिन मानव स्वास्थ्य इसे स्वयं उत्पादित नहीं कर सकता है। अतः शरीर को स्वस्थ रखने हेतु प्रमुखतः ह्दय रोगों से बचाव हेतु  बाहरी स्रोत से ओमेगा-3 वसीय अम्ल की आपूर्ती करना अत्यन्त आवश्यक है। कईं अलग-अलग स्थानों पर किए गये शोध कार्यों में यह पाया गया है कि ओमेगा-3 वसीय अम्ल मछली में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है  एवं यदि सप्ताह में एक या दो बार मछली का सेवन किया जाये तो यह शरीर में ओमेगा-3 की आवश्यकता को पूरा करने के लिये पर्याप्त है। स्वास्थ्य सलाहकारों के अनुसार मनुष्य को प्रतिदिन अपनी सम्पूर्ण कैलोरी का 2 प्रतिशत ओमेगा-3 के रुप मे लेना चाहिए जो कि लगभग 4 ग्राम के बराबर होता है। मुख्यतः साल्मोन एवं अन्य मछलियॉं जैसे टूना, सार्डीन, हेलीबट ओमेगा-3 का अव्छा स्रोत है।

जो व्यक्ति मछली खाने से परहेज करते है, वे अपने भोजन में मछली के तेल का इस्तेमाल करके अपने शरीर में ओमेगा-3 की मात्रा की आपूर्ती कर सकते है। अमेरीकन हर्ट एसोसिएसन में प्रकाशित एक लेख के अनुसार 50,000 महिलाओं पर किए गये एक शेध में पाया गया कि जो महिलाएं सप्ताह में कम से कम एक बार मछली का सेवन करती हैं, उनमें ह्दय रोगों की संभावना 50 प्रतिशत कम पायी गयी जबकि जो महिलायें मछली नहीं खाती उनमें ह्दय रोगों की संभावना तुलनात्मक रुप से तीन गुना अधिक पायी गयी। कुछ अन्य शोधकर्ताओं ने पाया है कि भोजन में पर्याप्त ओमेगा-3 की मात्रा रक्त में वसा के स्तर को कम करने मे सहायक होती है, जिसके कारण हमारा शरीर ह्दय रोगों से सुरक्षित रहता है।

सप्ताह में मछली का एक बार सेवन करने से मष्तिष्क के ग्रेमेट्रन्यूरोन्स सुरक्षित रहते हैं, जो सोचने समझने एवं याददाश्त से संबंधित है। अतः मछली का सेवन अल्जाईमर जैसी बिमारियों से भी सुरक्षा प्रदान करता है, साथ ही मछली का सेवन त्वचा कि रक्षा करता है एवं बालों को चमकदार बनाता है। गर्भवती महिलाओं में प्रसव के पश्चात् सामान्यतः कमजोरी का आना देखा जाता है, लेकिन यदि गर्भावस्था के दौरान ओमेगा-3 के 300 मि.ग्रा. केप्सूल का सेवन किया जाये तो प्रसव के पश्चात आने वाली कमजोरी से बचा जा सकता है। मछली का सेवन बच्चों के लिये अधिक आवश्यक है, क्योंकि यह उनके मष्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खारे पानी की मछलियों में विटामिन डी अच्छी मात्रा में पाया जाता है  जो कि अस्थियों को स्वस्थ एवं मजबूत बनाता है, साथ ही ओमेगा-3 के साथ मिलकर स्मरण शक्ति को भी बढाता है। कुछ अन्य अध्ययनों से पता चला है कि जो व्यक्ति नियमित रुप से ताज़ा मछली का सेवन करते हैं उनके शुक्राणु अधिक स्वस्थ एवं अधिक उर्जायुक्त व गतिशील होते है। अतः मछली का सेवन बंन्ध्यता को दूर करने में भी सहायक है।

राजस्थान भारत का सबसे बडा राज्य है जहॉ पर 4.23 लाख हैक्टेयर जल क्षेत्र का फैलाव है. राजस्थान मात्स्यिकी विभाग के अनुसार कुल मछली उत्पादन 28220 मिट्रिक टन है, अतः राजस्थान के निवासी आसानी से मछली प्राप्त कर सकते है एवं इसका पालन भी कर सकते है जिससे स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ आय में भी वृद्धि संभव है।

मछलियां जिनमें ओमेगा 3 वसीय अम्ल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है-

पवन कुमार शर्मा एवं डा. जे. स्टीफन संपथ कुमार
निदेशालय -संवहनीय जल कृषि केन्द्र, तन्जावूर
तमिलनाडू डा. जे. जयललिथा मात्स्यिकी विश्वविद्यालय,तमिलनाडू।



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