भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना एवं कृषि विज्ञान केंद्र, पीपराकोठी के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 17 मार्च 2026 को पूर्वी चंपारण जिले के पीपराकोठी में “फसल विविधीकरण के माध्यम से उत्पादन वृद्धि एवं सतत कृषि” विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम में लगभग 33 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 4 महिला किसान भी शामिल रहीं.
इस परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं फसल अनुसंधान प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए फसल विविधीकरण के महत्व तथा इसके विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि पारंपरिक कृषि प्रणाली में फसल विविधीकरण को शामिल करने से उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है. उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली के आँकड़ों के माध्यम से किसानों को इसके लाभों से अवगत कराया.
कृषि विज्ञान केंद्र, पीपराकोठी के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने किसानों को उन्नत फसल उत्पादन तकनीकों के साथ-साथ फसलों में कीट एवं रोग प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की. पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय, पीपराकोठी के सहायक प्राध्यापक डॉ. पंकज सिंह ने फसल विविधीकरण के लिए मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता प्रबंधन के महत्व पर विस्तृत व्याख्यान दिया. वहीं डॉ. के. प्रसाद ने फसल विविधीकरण में उद्यानिकी फसलों के समावेश पर विशेष बल दिया.
पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के वैज्ञानिक एवं सह-अन्वेषक डॉ. अभिषेक कुमार ने किसानों को जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में फसल विविधीकरण एवं कृषिवानिकी की उपयोगिता के बारे में बताया तथा किसानों से इसे अपने क्षेत्र में अपनाने का आह्वान किया. इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में कहा कि फसल विविधीकरण वर्तमान समय की आवश्यकता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जोखिम में कमी तथा किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है.
यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 18 मार्च 2026 तक चलेगा. कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृषि विज्ञान केंद्र, पीपराकोठी के विषय-वस्तु विशेषज्ञ सविता कुमारी, डॉ. गायत्री कुमारी पाढ़ी एवं प्रक्षेत्र प्रबंधक मनीष कुमार सहित अन्य कर्मचारियों का भी उल्लेखनीय सहयोग प्राप्त हुआ.
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