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किसान कल्याण हेतु कांट्रेक्ट खेती कानून को मंजूरी

किसानों को उनकी उपज और फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने एक और सुधार की ओर कदम बढ़ाया है। सरकार ने मंगलवार को कांट्रेक्ट खेती(खेती के ठेका कानून) को हरी झंडी दिखा दी। राष्ट्रीय सम्मेलन में कांट्रेक्ट खेती के प्रावधानों पर सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों ने भी सहमती दे दी। मॉडल कांट्रेक्ट कृषि कानून में कई अहम प्रावधान हुए हैं जिसमें किसानों अथवा भू स्वामियों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है। सम्मेलन में कांट्रेक्ट कृषि उपज को कृषि उत्पाद विपणन कानून(मंडी कानून) के दायरे से अलग रखने पर आम राय बनी है। अब इसके बाद कोई भी खरीददार सीधा खेत पर ही खरीद सकता है।

इस विषय पर राज्यों को अपनी सुविधा के अनुसार प्रावधानों में संशोधन करने की छूट दी गई है लेकिन इसके साथ ये भी कहा गया है की किसानों के हित के साथख कोई समझौता नहीं किया जाऐगा। कांट्रैक्ट ठेका खेती के उत्पादों के मूल्य निर्धारण में पूर्व, वर्तमान और आगामी पैदावार को करार में शामिल किया जाएगा। वहीं किसान और संबंधित कंपनी के बीच होने वाले करार के बीच सरकार तीसरे पक्ष की भूमिका निभाएगी। ठेका खेती में भूमि पर किसी तरह के स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं होगी और छोटे व सीमांत किसान किसानों को एकजुट करने को किसान उत्पादक संगठनों, कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को घाटे से बचाने के लिए खेती के उत्पादों को फसल बीमा के प्रावधान लागू किए जाएंगे।

वहीं सम्मेलन में राधामोहन सिंह के साथ कई राज्यों के कृषि मंत्री भई मौजूद थे। ठेका खेती को 1872 से पहले ही कानूनी मान्यता मिली हुई थी लेकिन, बदली हुई परिस्थितियों में यह कामयाब नहीं है। वहीं इसके लागू होने के बाद किसानों को आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।



English Summary: Contract farming law approved for farmers welfare

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