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चावल उत्पादक छोटे किसानों को ‘प्रोजेक्ट सहयोग’ से मिलेगा फायदा

भारतीय कृषि मुख्य रूप से लघु एवं सीमांत किसानों पर आधारित है जो कि परंपरागत खेती करते हैं. कृषि की नई प्रौद्योगिकियों के बारे में जानकारी का अभाव एवं जागरूकता की कमी के कारण किसानों की उत्पादकता एवं खेती में आय कम होती है. बायर इंडिया द्वारा संकर धान यानी हाईब्रिड के बारे में जागरूकता प्रदान करने के लिए जून - 2017 में बायर इंडिया के द्वारा प्रोजेक्ट - सहयोग की अवधारणा रखी गई ताकि धान की उत्पादकता बढाई जाये और खाद्य सुरक्षा बढाने के प्रति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सके. इसी लिए बायर ने इस प्रोजेक्ट सहयोग की शुरुआत की थी इसका अर्थ है मिलजुकर काम करना यानी किसानों के साथ किसानों के हित में काम करना.  ‘सहयोग’ प्रोजेक्ट के तहत इंडियन ग्रामीण सर्विस (आई जी एस) के साथ बायर की एक संयुक्त पहल है. जिसमें स्माल फार्मर्स एग्री बिजनेस कंसोर्टियम (एसएफएसी)  के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है. केइस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत में किसानो को संकर धान के बीज की उत्पादन क्षमता के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना जो खाद्य सुरक्षा बढाने के लिए बहुत आवश्यक है.

बायर ने बिहार के मोतीहारी  के लघु एवं सीमांत किसानों के साथ ‘प्रोजेक्ट सहयोग’ की एक सफल पहल की. मोतीहारी जिला धान उत्पादन के क्षेत्र में प्रमुंख भूमिका निभाता हैं. बायर का अराइज ब्राण्ड ज्यादा उत्पादन देने वाले हाईब्रिड धान के विभिन्न किस्मों का समूह है,  जो विभिन्न क्षेत्रीय परिस्थितियों और किसानों की अलग-अलग आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता युक्त हाईब्रिड बीज प्रदान करता है. अब तक बिहार के पूर्वी चंपारण में लगभग 100 गावों के 8000 किसानों ने अराइज फसल प्रर्दशन देखा और फसल प्रबंधन, बेहतर शस्य प्रक्रिया, खरपतवार नियंतत्रण के बारे में जानकारी प्राप्त की एवं अपनी समस्याओं का समाधान किया.

प्रोजेक्ट सहयोग ने केन्द्र के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह का भी ध्यान आकर्षित किया है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से बिहार के पिपराकोठी कस्बे में बायर इंडिया द्वारा आयोजित मेगा किसान प्रशस्ति पत्र कार्यक्रम में शामिल हुए. इस कार्यक्रम में 500 से अधिक धान उत्पादन करने वाले किसान,  सरकार और उद्योग संघो के प्रमुख अधिकारी शामिल हुए.

इस आयोजन के दौरान दक्षिण एशिया के वरिष्ठ बायर प्रतिनिधि रिचर्ड वैन डर मर्वे ने कहा कि बायर भारतीय कृषि उद्योग में एक अहम भूमिका निभाती है जिसका 120 वर्षो का इतिहास, भारतीय कृषि के क्षेत्र में और भारतीय किसानो की जरूरतों और चुनौतियों को पूर्ण कर रहा है. बायर अराईज हाईब्रिड बीज के द्वारा बिहार के धान उत्पादक किसानों में अपनी पैदावार में वृद्धि की है. इस प्रकार से बायर उनकी खेती की आय और आजीविका को बढाने में काफी प्रयास कर रही है. ‘प्रोजेक्ट सहयोग’ के माध्यम से बायर सन् 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए भारत सरकार के दृष्टिकोण का भी समर्थन कर रही हैं.

प्रोजेक्ट सहयोग पर अपने विचार साझा करते हुए आईजीएस के उपाध्यक्ष कुमारेश राउत ने कहा कि बायर का सहयोग धान उत्पादन करने वाले किसानों की उत्पादकता में वृद्धि को बढाने में महत्वपूर्ण है. इस परियोजना में किसानों द्वारा भाग लेने में पहल की सराहना की जा रही हैं . सरकारी अधिकारी स्वयं ही अराइज से मिलने वाले फायदों को देखा है. सन् 2018 में बायर अपने प्रयासों को आगे बढाने की योजना बना रही है ताकि उपज बढाने और बढती आबादी का पोषण प्रदान करने में हाईब्रिड बीज की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण हितधारकों को जानकारी प्रदान की जा सके.

धान की उत्पादकता को बढाने के लिए बिहार के लघु एवं सीमांत किसानों की मदद के लिए एक पहल.

खाद्य उत्पादन बढाने के लिए मुख्य फसलों के संकरण प्रक्रिया पर जोर देना.

8000 से ज्यादा धान उत्पादन करने वाले किसानों ने धान की खेती करने पर आधारित प्रशिक्षण प्राप्त किया.



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