कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए और किसानों की आमदनी में इजाफा करने के उद्देश्य के साथ बिहार सरकार ने उद्यान निदेशालय, कृषि विभाग के माध्यम से संरक्षित खेती (Protected Cultivation) को प्रोत्साहित करने की नई पहल शुरु की है, इस पहल के माध्यम से राज्य के किसानों को शेडनेट, पॉलीहाउस, मल्चिंग और लो-टनल जैसी तकनीकों पर आकर्षक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि किसानों की लागत कम हो और उत्पादन में वृद्धि हो सकें.
आगे इसी क्रम में जानें शेडनेट, पॉलीहाउस, मल्चिंग और लो-टनल पर सरकार कितना अनुदान मुहैया करा रही है-
1. शेडनेट पर कितना अनुदान?
बिहार के किसान अगर शेडनेट तकनीक से खेत करते हैं तो इस योजना के तहत शेडनेट हाउस लगाने पर ₹35,500 तक का अनुदान पा सकते हैं. शेडनेट तकनीक विशेष रूप से सब्जियों, फूलों और नर्सरी उत्पादन के लिए उपयोगी मानी जाती है. यह तेज धूप और तापमान के प्रभाव को कम कर पौधों की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है. साथ ही इस तकनीक से किसानों की फसलों रोग लगने का भी खतरा कम रहता है, जिससे किसानों की लागत कम होती है और कमाई बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है.
2. पॉलीहाउस पर मिलेगी इतनी सब्सिडी
अगर किसान भाई पॉलीहाउस तकनीकों के माध्यम से खेती करते हैं तो इसके निर्माण पर किसान ₹6,00,000 तक का अनुदान पा सकते हैं. साथ ही इससे किसानों को पॉलीहाउस तकनीक से नियंत्रित तापमान और आर्द्रता से सालभर उत्पादन की सुविधा मिलेगी और इस तकनीक द्वारा किसान टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, स्ट्रॉबेरी और उच्च मूल्य वाली सब्जियों की खेती कर लाभ कमा सकते हैं.
3. मल्चिंग तकनीक पर अनुदान
किसानों को मल्चिंग शीट के उपयोग पर बिहार सरकार ₹20,000 तक की सहायता प्रदान करेंगी. साथ ही इस तकनीक से मिट्टी की नमी बनी रहती है और खरपतवार नियंत्रण रहने के साथ किसानों का उत्पादन बढ़ाने में प्रभावी साबित होती है.
4. लो-टनल पर कितना मिलेगा अनुदान?
बिहार सरकार राज्य के किसानों को लो-टनल तकनीक द्वारा खेती करने पर ₹4,000 तक का अनुदान प्रदान कर रही है. यह कम लागत वाली तकनीक छोटे किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिससे शुरुआती मौसम में सब्जियों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का क्या रोल है?
बिहार सरकार ने राज्य में आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों के प्रशिक्षण और प्रदर्शन के लिए ‘Center of Excellence’ स्थापित किए गए हैं. इनमें चंडी, जिला नालंदा तथा देहरी, जिला भोजपुर प्रमुख हैं. इन केंद्रों पर किसानों को पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, हाईब्रिड पौध उत्पादन और उन्नत प्रबंधन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि इन तकनीकों के बारे में किसान अच्छे से समझ कर अपने खेतों में इस्तेमाल कर बढ़िया मुनाफा कमा सकें.
कैसे करें आवेदन?
अगर आप भी इन नई तकनीकों के माध्यम से खेती करना चाहते हैं तो इस योजना का लाभ पाने के लिए किसान विभागीय वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. साथ ही आवेदन प्रक्रिया को सरल रखा है, ताकि अधिक से अधिक किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकें.
लेखक: रवीना सिंह
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