बिहार में अन्तर्राष्ट्रीय कृषि प्रदर्शनी का शुभारम्भ, जाने क्या नया है इस मेले में......

कृषि विभाग, बिहार द्वारा पीएचडी के सहयोग से गाँधी मैदान, पटना में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय एग्रीटेक बिहार, 2018 तीन दिवसीय कृषि मेला-सह-प्रदर्शनी का उद्घाटन कृषि उत्पादन आयुक्त, बिहार सुनिल कुमार सिंह द्वारा किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार द्वारा की गई. इस अवसर पर कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय, निदेशक उद्यान अरविन्दर सिंह, विशेष सचिव रवीन्द्र नाथ राय, पी०एच०डी०सी०सी०आई० के अधिकारी सहित विभागीय पदाधिकारी एवं कर्मचारीगण, बड़ी मात्रा में कृषि उद्यमी तथा किसान उपस्थित थे.

कृषि उत्पादन आयुक्त, बिहार ने अपने उद्घाटन सम्बोधन में कहा कि इसी गाँधी मैदान में कुछ दिन पूर्व कृषि विभाग, बिहार द्वारा सी०आई०आई० के सहयोग से एग्रो बिहार का आयोजन किया गया था. एग्रो बिहार में राज्य के किसानों के बीच कृषि यंत्रों के क्रय पर विभाग द्वारा लगभग 12 करोड़ रूपये अनुदान दिया गया एवं लगभग 36 करोड़ मूल्य के कृषि यंत्र बिके थे. उसी आयोजन के बाद यह निर्णय लिया गया कि इसी प्रकार का कृषि एवं इससे संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाना चाहिए. उसी का परिणाम है कि आज से अंतर्राष्ट्रीय स्तर के एग्रीटेक बिहार का आयोजन कृषि विभाग एवं पी०एच०डी०सी०सी०आई० द्वारा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री एवं माननीय कृषि मंत्री को भाग लेना था. परन्तु अपरिहार्य कारणों से वे भाग नहीं ले सके.

 किसानों की आमदनी तभी बढ़ायी जा सकती है जब कृषि एवं इससे संबद्ध क्षेत्रों जैसे पशुपालन, मत्स्यपालन, खाद्य प्रसंस्करण आदि का भी समग्र विकास हो सके. उन्होंने कहा कि आज से ठीक 4 माह पूर्व 9 नवम्बर, 2017 को माननीय राष्ट्रपति  राम नाथ कोविंद द्वारा कृषि रोड मैप 2017-22 का उद्घाटन किया गया था. बिहार के माननीय मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार के निदेशानुसार मेरे स्तर पर लगातार कृषि रोड मैप की समीक्षा की जा रही है. कृषि रोड मैप का उद्देश्य कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में आधुनिकतम तकनीक को किसानों के द्वारा अपनाया जाना है. इस मेला से किसानों को फायदा होगा. वे खाद्य प्रसंस्करण के तकनीकों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर उसका लाभ उठायेंगे और इस प्रकार उन्हें फायदा मिलेगा.

प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार ने कहा कि कृषि विभाग, बिहार एवं पी०एच०डी०सी०सी०आई० के द्वारा राज्य में पहली बार इस प्रकार का आयोजन किया जा रहा है. अब तक राज्य में कृषि यांत्रिकरण के थीम पर आधारित मेला सी०आई०आई० के सहयोग से आयोजित किया जाता रहा है. परन्तु इस अंतर्राष्ट्रीय एग्रीटेक मेला कई थीमों पर आधारित है. इस अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के मेला में जापान, नीदरलैंड, इजरायल एवं अमेरिका की कम्पनियाँ सहित देश की प्रतिष्ठित कम्पनियाँ कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में आधुनिकत्तम तकनीक का प्रदर्शन कर रही है. यहाँ के किसानों इससे लाभ उठा पायेंगे. इस मेला में बीज तथा पौध रोपन, कृषि यंत्र, पौधा संरक्षण, जैविक खेती, कृषि विपणन तथा निर्यात करने वाले कम्पनियाँ, सूक्ष्म सिंचाई तथा जल प्रबंधन से संबंधित कम्पनियाँ, पशुपालन, मत्स्यपालन तथा गव्य विकास से संबंधित कम्पनियाँ, नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित कम्पनियाँ, ग्रामीण विकास तथा सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित कम्पनियाँ राज्य के किसानों को अपने-अपने उत्पाद से अवगत करा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिहार में कृषि में प्रगति के लिए माननीय मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. वर्ष 2017 में राज्य में कुल खाद्यान्न का उत्पादन लगभग 185 लाख टन हुआ है, जो एक रिकॉर्ड है.

प्रधान सचिव ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी की सोंच का परिणाम है कि कृषि विभाग द्वारा राज्य में एक बार कृष्ण मेमोरियल हॉल में किसान पंचायत तथा दो बार किसान समागम का सफल आयोजन किया गया. उन्होंने राज्य के किसानों से अनुरोध किया कि इस मेला में लगे सभी स्टॉल का भ्रमण करें, खासकर इजरायल देश के द्वारा लगाये गये स्टॉल का भ्रमण जरूर करें. इस स्टॉल में कम पानी एवं भूमि की उपलब्धता में फसलों के अधिक उत्पादन करने की तकनीक को दर्शाया गया है. मौसम में बदलाव आ रहा है.

राज्य के कई जिलों से मक्का की फसल में दाना नहीं आने की सूचना प्राप्त हो रही है, जिसकी जाँच करायी जा रही है. इन क्षेत्रों का सर्वे कराकर किसानों को हुए क्षति की भरपाई की जायेगी. मौसम में परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में कृषि रोड मैप का दायित्त्व बढ़ जाता है. कृषि रोड मैप 2017-22 में जैविक खेती पर विशेष बल दिया गया है. पटना से भागलपुर तक के गंगा किनारे पड़ने वाले गाँवों तथा दनियावाँ से बिहारशरीफ तक के राष्ट्रीय सड़क के किनारे पड़ने वाले गाँव को जैविक कोरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है. यह योजना 09 जिलों यथा पटना, नालंदा, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर, लखीसराय, खगड़िया एवं मुंगेर में कार्यान्वित की जा रही है. आगामी वर्ष में इनके अतिरिक्त गया, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर जिला को भी शामिल किया जायेगा, जिससे जैविक कोरिडौर के रूप में जैविक खेती विकसित हो सके. उन्होंने कहा कि किसानों में यह भ्रांति है कि जैविक खेती से उत्पादन घट जायेगा. परन्तु ऐसी बात नहीं है जैविक खेती अपनाने से पहली बार उत्पादन में कुछ कमी जरूर होती है, लेकिन जैविक उत्पादों का बाजार मूल्य अधिक होता है. इस प्रकार से जैविक खेती करने से घाटा नहीं है, बल्कि फायदा है. उन्होंने कहा कि ज्यादा रासायनिक खादों के प्रयोग से उर्वरा शक्ति में ह्रास होगी. इसलिए जैविक खेती को अपनायें. गंगा के किनारे जैविक खेती को अपनाने से गंगा का पानी भी स्वच्छ और निर्मल होगा. माननीय मुख्यमंत्री ने भी किसानों से जैविक खेती अपनाने का अपील किया है. जैविक कोरिडोर की तरह ही राज्य में पल्स कोरिडोर बनाने की बात चल रही है.

प्रधान सचिव ने आगे बताया कि इस मेला में कृषि सहित कृषि से जुड़े क्षेत्रों की जानकारी एवं तकनीक को प्रदर्शित किया जा रहा है. मैं आशा करता हूँ कि इस मेला के आयोजन से किसान एवं पदाधिकारी/कर्मचारीगण नई-नई तकनीक, नई मशीनों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे जो कृषि क्षेत्र में सहायक एवं मार्गदर्शक होगा. उन्होंने इस आयोजन के लिए कृषि विभाग एवं पी०एच०डी०सी०सी०आई० के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को धन्यवाद दिया.

संध्या में मुख्य मंच पर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार के माध्यम से  सुरेन्द्र नारायाण यादव एवं  ब्रजेश कुमार सुमन तथा  शिवचरण प्रसाद द्वारा प्रस्तुत लोकगीत एवं स्वरांगन सांस्कृतिक कल्याण सेवा समिति, पटना के कलाकारों द्वारा प्रदर्शित लोकनृत्य दर्शकों का मन मोह लिया.

 

 

 

 

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