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अरुणाचल प्रदेश के अदरक समेत इन तीन उत्पादों को मिला GI Tag, जानें क्या मिलेगा लाभ

GI Tag: अरुणाचल प्रदेश के तीन उत्पादों ने अपने नाम GI टैग का दर्जा हासिल किया है. इन उत्पादों में अदरक (Adi Kekir), हाथ से बनी कालीन और वांचो लकड़ी के शिल्प शामिल है.

KJ Staff
अरुणाचल के अदरक ने अपने नाम किया GI TAG.
अरुणाचल के अदरक ने अपने नाम किया GI TAG.

GI Tag: अरुणाचल प्रदेश के अदरक (Adi Kekir) ने अपने नाम एक खास खिताब किया है. दरअसल, अरुणाचल के अदरक ने भौगोलिक पहचान यानी जीआई टैग का दर्जा हासिल कर लिया है. अरुणाचल प्रदेश की स्थानीय भाषा में इसे आदि केकिर (आदि केकिर) के नाम से जाना जाता है. इतना ही नहीं, जीआई टैग का दर्जा हासिल करने वाले उत्पादों की लिस्ट में हाथ से बनी कालीन और वांचो लकड़ी के शिल्प भी शामिल है.

अरुणाचल के इन तीनों उत्पानों ने अपने नाम भौगोलिक पहचान का टैग (GI Tag) प्राप्त किया है. जियोग्राफिकल इंडिकेशन या जीआई उन उत्पादों पर इस्तेमाल किया जाने वाला एक संकेत है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है. इस विशिष्ट भौगोलिक उत्पति के कारण उनमें विशेष गुण और उनका विशेष महत्व होता है.

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने दी जानकारी

अदरक समेत इन उत्पादों को जीआई टैग का दर्जा हासिल करने की जानकारी खुद राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने दी. उन्होंने, अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यह जानकारी साझा करते हुए लिखा, "यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि आदि केकिर (अदरक), हस्तनिर्मित कालीन और वांचो लकड़ी के शिल्प (Wancho wooden craft) को जीआई टैग (GI Tag) दिए गए हैं. वास्तव में यह हमारे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कुशल शिल्प कौशल को मान्यता है. आइए अपनी अनूठी परंपराओं का जश्न मनाएं और उन्हें बढ़ावा दें."

क्यों खास है आदि केकिर अदरक?

आदि केकिर एक खास प्रकार का अदरक है जो अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग, सियांग और अपर सियांग जिलों में उगाया जाता है. इसकी पहचान इसके स्वाद और आकार से होती है. इसे तिब्बती शरणार्थियों द्वारा बनाए गए हाथकरधन की कला के लिए जाना जाता है, जिसमें इसकी अद्वितीय डिजाइन, चित्रण और रचना की प्रशंसा होती है. वहीं, वांचो लकड़ी से बने हस्तशिल्प उत्पाद अद्वितीय होते हैं, जिनमें तंबाकू की सेवा के लिए अलग-अलग आकार का पाइप और पीने के कप शामिल होते हैं. इसके साथ ही, कारीगर भगवान बुद्ध और पशुओं की मूर्तियों के साथ-साथ गुड़ियां भी बनाते हैं.

अब तक इन उत्पादों को मिल चुका है GI टैग

अभी तक अरुणाचल प्रदेश के छह उत्पादों को GI टैग का दर्जा प्राप्त हो चुका है. इससे पहले याक चुरपी (अरुणाचली याक के दूध से बनाया गया पनीर), खामती चावल (नामसाई जिले में उत्पादित चिपचिपे चावल की एक विशेषता) और चांगलांग जिले के तांगसा वस्त्र को GI टैग प्राप्त हुआ है. इस लिस्ट में अब तीन नए उत्पाद और जुड़ गए हैं.

क्या है जीआई टैग?

आसान भाषा में बताएं तो जीआई टैग एक प्रकार का लेबल होता है, जिसमें किसी प्रोडक्ट को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है. इस प्रोडक्ट की विशेषता और नाम प्रकृति और मानवीय कारकों पर निर्भर करती है. जिस किसी उत्पाद को जीआई टैग मिलता है, वह उस क्षेत्र की खास पहचान बन जाता है. इसी वजह से कभी-कभी उन उत्पादों के साथ क्षेत्र का नाम भी जोड़ा जाता है.

English Summary: arunachal ginger gets GI Tag arunachal ka adrak names of these three products also included in the list Published on: 06 January 2024, 10:51 AM IST

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