
करोंदा एक छोटा और औषधीय गुणों से भरपूर छोटा फल होता है, इसके पेड़ के बारे में बात करें तो यह झाड़ी नुमा पेड़ होता है. यह कैरिसा कैरेंडस परिवार एपोसायनेसी के अंतर्गत आता है. करोंदे की शाखाएं कांटे दार होती हैं और इसके फूल रंग में सफेद आकार में 3 से 5 से.मी. के होते हैं. करोंदे के पेड़ में फूल की शुरुआत जनवरी के माह में होती है और फल मई- जून के महीने में आते हैं. इसके फलों का उपयोग सब्जी, अचार, चटनी और दूसरी कई चीजों में किया जाता है.
करोंदे का पौधा भारत में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हिमाचल जैसे इलाकों में पाया जाता है. अगर दूसरे देशों के बारे में बात करें तो यह दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार में पाया जाता है.
ये भी पढ़ें: सेहतकारी गुणों से भरपूर अंजीर के फायदें
दूसरी भाषाओं में करोंदा के नाम
-
संस्कृत भाषा में इसे करमर्द, सुषेण, क्षीरफेना के नाम से जाना जाता है.
-
कन्नडा में करिजिगे,करीकायि, हेग्गेरीचीगे,करन्डे नाम से जाना जाता है.
-
गुजराती में करमदा,करमर्द,करमदी के नाम से ही जाना जाता है.
करोंदा के औषधीय गुण
करोंदा में कई प्रकार के औषधीय गुण होते हैं जैसे इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीअल्सर, एंटीडायबिटीज, हेपेटोप्रोटेक्टेव, कार्डियोवस्कुलर, एंटीमैरलियल, एंटल्मिंटिक, एंटीवायरल एवं एंटीस्कोरव्यूटिक गुण हैं. इसका फल विटामिन, खनिज और ऊर्जा से भरपूर होता है. विटामिन ए, सी और बी कॉम्प्लेक्स, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और खनिज जैसे कि कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम और सल्फर भी इसमें पाए जाते हैं. करोंदा का फल स्वाद में खट्टा और एसिड युक्त होता है.
करोंदा से होने वाले फायदे और उपयोग
करोंदा खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही औषधीय रूप से भी भरपूर होता है. इसका कई प्रकार से उपयोग किया जा सकता है और साथ ही इसे खाने से भी कई प्रकार के फायदे होते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:
-
दातों के लिए काफी फायदेमंद होता है करोंदा, इसके फल की चटनी बनाकर खाने से दातों को काफी राहत मिलती है.
-
पाचनतंत्र को सही रखने में करोंदा काफी सहीयता करता है. अगर आपका नियमित रूप से पेट खराब रहता है तो आप इसके चूर्ण का सेवन कर सकते हैं.
-
करौंदे के पके फल अथवा जड़ को पीसकर लगाने से पामा, खुजली तथा दाह आदि त्वचा विकारों से आराम मिलता है. इसके अलावा करौंदे की मूल को नींबू रस तथा कपूर के साथ पीसकर लगाने से कण्डु या खुजली दूर होती है.
Share your comments