जानिए रंग बिरंगे फलों का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है...

फल पौष्टिक आहार का आधार है, जिनके बिना पौष्टिक आहार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. फल मानव आहार में उन आवश्कताओं की पूर्ति करतें हैं, जो यद्यपि इनकी थोड़ी मात्रा में आवश्यक होती है. भारतीय आहार में फलों का पूरा उपयोग नहीं किया जाता है ऐसा कदाचित भारत में औपचारिक शिक्षा की कमी और आम जन में फलों के पोषण मां से सम्बंधित जानकारी का समुचित प्रचार-प्रसार न होना प्रमुख कारण है.

लाल रंग व बैंगनी फल: इस प्रकार के फलों में प्राकृतिक एन्थोवेनिन्स’ नामक शक्तिशाली एन्टीआक्सिडेन्ट्स पाए जाते हैं, जो रक्त में थक्कों (फ्लारस) का निर्माण नहीं होने देते हैं। इसका कारण हहृय रोगों में जोखिम उत्पाद कम हो जाती है। बैंगनी रंग के फलों में कैंसर रोगी तत्व पाए जाते हैं, जबकि लाल रंग के फलों के रेशा आमेगा-3 एन्टीआक्सिडेन्ट व लाइकोपीन कोलेस्ट्रोल को भी कम करते हैं।

सफेद रंग के फल: इस रंगा के फलों/सब्जियों से फ्लैबोनाइट्रस’एलीसिन’ नामक तत्व पाए जाते हैं, जो कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाते हैं।

पीले रंग के फल: पीले रंग वाले फलों की एक विशेषता यह होती है कि व रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करते हैं, क्योंकि इनमें बीटा काइपटाक्सैनथिन’ नामक एन्टीआक्साइड पाया जाता है, जो कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाता है और ज्योति की वृद्धि करता है। पीले रंग के फलों में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, जो शरीर में प्रतिरोधक तंत्र को सूदृढ़ करती है। विटामिन ‘सी’ की पर्याप्त मात्रा से दान्तों की सुरक्षा भी होती है।

हरे रंग के फल: हरे फल इस बात के सूचक होते हैं कि अमुक लौह (आयरन) से परिपूर्ण होते हैं। इस प्रकार फलों में ल्यूटीन’ एवं जियोजन्थिन’ नामक तत्व पाए जाते हैं, जो नेत्रों को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। इस प्रकार के फलों में विटामिन ‘बी’ व ‘सी’ होते हैं, जो मानसिक तनाव को कम करते हैं।

नारंगी रंग के फल: इस रंग के फूल प्राकृतिक फल विटामिन ‘ए’ से परिपूर्ण होते हैं। इनमें बीटा कैरोटिन’ भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो नेत्रों व त्वचा को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। इससे आस्टीयोथेरीसिस’ हड्डी सम्बंधी रोगों के खतरे को कम करते हैं। पीले-नारंगी रंग के फलों के सेवन ठण्ड व जुकाम से बचाव होता हैं।

यदि आपको स्वस्थ बनना है तो कोई एक मात्र फल या सब्जी आप की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकती है। इसके लिए अलग-अलग किस्म के मौसमी फलों का उपयोग करना नितान्त आवश्यक होता है।

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