उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है. योगी सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में अहम बदलाव करने की तैयारी कर ली है. अब किसानों या उनके परिजनों को मुआवजा पाने के लिए किसी भी सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. दुर्घटना या अनहोनी की स्थिति में मुआवजा सीधे बैंक खाते में मिलेगा. योजना को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है, जिससे आवेदन, दस्तावेज़ अपलोड करना, वेरिफिकेशन और पैसा सीधे खाते में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी.
यह बदलाव फरवरी 2026 तक पूरा हो जाएगा और डिजिटल प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के लिए सरल और समय बचाने वाला होगा.
योजना का उद्देश्य और महत्व
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना की शुरुआत साल 2019 में की गई थी. इसका उद्देश्य किसानों को खेती के दौरान होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है. यदि किसी दुर्घटना में किसान की मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता होती है, तो सरकार 5 लाख रुपये तक का मुआवजा देती है.
इस योजना के तहत किसानों या उनके परिवार को आर्थिक मदद मिलती है, जिससे वे अप्रत्याशित घटनाओं के प्रभाव से उबर सकें. दिसंबर 2025 तक 29,394 किसानों के आवेदन मंजूर किए जा चुके हैं. इस योजना के डिजिटलीकरण से आवेदन प्रक्रिया और मुआवजा वितरण में पारदर्शिता और आसानी बढ़ेगी.
मुआवजे की राशि और श्रेणियां
कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत मुआवजे की राशि नुकसान की स्थिति के अनुसार अलग-अलग है.
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यदि किसान की मृत्यु हो जाती है, तो परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा.
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दोनों हाथ और पैर खोने पर 5 लाख रुपये.
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एक हाथ और एक पैर खोने पर 2 से 3 लाख रुपये.
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25% से 50% तक की दिव्यांगता होने पर 1 से 2 लाख रुपये.
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आंख को गंभीर नुकसान होने पर भी 5 लाख रुपये का मुआवजा.
इस तरह यह योजना विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाओं में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है.
किन दुर्घटनाओं में मिलता है मुआवजा
योजना के तहत किसान को निम्नलिखित दुर्घटनाओं में मुआवजा दिया जा सकता है:
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पेड़ गिरने से चोट लगना
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भूस्खलन
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सफर के दौरान हादसा
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बिजली गिरना
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बाढ़ में बह जाना
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जानवरों के काटने की घटना
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करंट लगना
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आग में जलना
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घर गिरने की घटना
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आतंकवादी हमला
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लड़ाई में चोट
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कमरे में गिरना या लूट में हत्या
इस सूची से स्पष्ट होता है कि योजना बेहद व्यापक है और खेती के दौरान होने वाली अधिकांश दुर्घटनाओं को कवर करती है.
डिजिटल प्रक्रिया से होगी सुविधा
योगी सरकार योजना को पूरी तरह डिजिटल करने के लिए NIC की मदद से आधुनिक वेब पोर्टल और सॉफ्टवेयर तैयार कर रही है. डिजिटल प्रक्रिया में किसान आवेदन भर सकते हैं, दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं और अपनी आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं. मुआवजा सीधे DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से उनके बैंक खाते में भेजा जाएगा. इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि पात्र किसान लाभ से वंचित नहीं रहेंगे.
डिजिटल पहल के लाभ
डिजिटलाइजेशन से कई लाभ होंगे:
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किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
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आवेदन की स्थिति को कभी भी ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा.
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मुआवजा सीधे बैंक खाते में प्राप्त होगा.
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सरकारी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी.
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ग्रामीण क्षेत्र में डिजिटल साक्षरता और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में राहत देने और किसानों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक कदम
डिजिटल पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया बेहद सरल होगी. इसमें निम्नलिखित स्टेप शामिल होंगे:
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आवेदन फॉर्म भरना
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आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना
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वेरिफिकेशन
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आवेदन की मंजूरी
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मुआवजा सीधे बैंक खाते में प्राप्त करना
इस प्रक्रिया से किसानों के समय और मेहनत की बचत होगी और उन्हें सरकारी तंत्र में लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
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