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प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से किसानों को लाभ प्राप्तह होने के साथ होंगे रोजगार सृजित

भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र उत्पादन, खपत, निर्यात और विकास की संभावनाओं के मामले में सबसे बड़ा है. भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वैश्विक बाजारों को टैप करने के साथ-साथ घरेलू बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपग्रेडेशन की आवश्यकता है. खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के महत्व को समझते हुए, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI), भारत सरकार ने प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना को लॉन्च किया है. यह एक किसान केंद्रित योजना है.  2016 में, मंत्रालय ने "एग्रो-मरीन प्रोसेसिंग एंड डेवलपमेंट ऑफ एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर" या SAMPADA नामक एक योजना शुरू की थी, जिसे 2016-20 की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ लागू किया जाना प्रस्तावित था. लेकिन सितंबर 2017 में, मंत्रालय ने SAMPADA योजना का नाम बदलने पर एक नोटिस जारी किया. जिन योजनाओं को SAMPADA के तहत लागू किया जाना था, वे अब “प्रधानमंत्री किसान  संपदा योजना” के तहत आएंगी. बजट 2018-2019 में खाद्य मंत्रालय के खाद्य प्रसंस्करण संबंधी आवंटन दोगुना कर 1400 करोड़ रूपया कर दिया गया है.  खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र अपनी मूल्य वर्धित क्षमता के कारण, जीडीपी में योगदान देने वाली भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरा है. भारतीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग देश के कुल खाद्य बाजार का 32 प्रतिशत है जो भारत के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है. आने वाले वर्षों में भारत के जैविक खाद्य बाजार में तीन गुना वृद्धि होने की उम्मीद है. पीएम किसान SAMPADA योजना से 334 लाख मीट्रिक टन कृषि उपज का निर्यात करने के लिए 31,400 करोड़ रुपये का निवेश करने की उम्मीद है, जिसकी कीमत 1,04,125 करोड़ रुपये है, 20 लाख किसानों को लाभ होगा और वर्ष 2019 से 2020  तक देश में 5,30,500 प्रत्यक्ष / अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. यह योजना  किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के उद्देश्

1. मार्डन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की मदद से कृषि में विकास के लिए सही बुनियादी ढ़ाचे का निर्माण करना .

2. किसानों को उनके उपज के लिए बेहतर मूल्य उपलब्ध कराना .

3. ग्रामीण भारत में रोजगार के अवसर पैदा करना .

4. कृषि उपज के अपव्यय को कम करने में मदद करना .

5. प्रसंस्करण के स्तर में और संसाधित खाद्य पदार्थों के निर्यात में वृद्धि कराना .

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के प्लान

1. मेगा खाद्य पार्क

मेगा फूड पार्क पहल किसानों, प्रोसेसर और खुदरा विक्रेताओं को अधिकतम मूल्य संवर्धन, न्यूनतम अपव्यय, किसानों की आय में वृद्धि, किसानों के लिए उच्च आय, और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के निर्माण के लिए कृषि उत्पादन को बाजार से जोड़ने के लिए एक युक्ति प्रदान करती है.

2. एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्य परिवर्धन अवसंरचना

कोल्ड चेन, वैल्यू एडिशन एंड प्रिजर्वेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर की योजना, एकीकृत कोल्ड चेन और संरक्षण बुनियादी सुविधाओं को प्रदान करने के लिए है, जो गेट से उपभोक्ता तक निर्बाध रूप से पहुंचती है.

3. खाद्य प्रसंस्करण एवं परिरक्षण क्षमताओं का सृजन/विस्तार

इस योजना का उद्देश्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के स्तर को बढ़ाना है, जिसके परिणामस्वरूप अपव्यय में कमी आई है; इसे केंद्र और राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों, संयुक्त उपक्रमों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), गैर सरकारी संगठनों, सहकारी समितियों, आदि जैसे संगठनों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है.  

4. कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर अवसंरचना

इस योजना का उद्देश्य उद्यमियों के एक समूह को आधुनिक बुनियादी ढाँचे से सुसज्जित आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से उत्पादकों / किसानों के समूह को प्रोसेसर और बाज़ार से जोड़कर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए प्रोत्साहित करना है.

5. बैकवर्ड और फारवर्ड लिंकेजों का सृजन

इस योजना का उद्देश्य कच्चे माल की उपलब्धता और बाजार के साथ संबंधों के संदर्भ में आपूर्ति श्रृंखला अंतरालों को प्लग करके प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग के लिए प्रभावी और सहज पिछड़े और आगे के एकीकरण की पेशकश करना है. इस योजना के कार्यान्वयन के लिए, मंत्रालय ने किसान उत्पादक कंपनियों, किसान उत्पादक संगठन और स्व-सहायता समूहों सहित किसान / उत्पादक समूहों की सहायता के लिए तकनीकी एजेंसियों (टीएएस) की सहायता मांगी है ताकि योजना में उनकी भागीदारी को ट्रिगर किया जा सके.

6. खाद्य संरक्षा एवं गुणवत्ता आश्वासन अवसंरचना

किसी भी खाद्य उत्पाद की पहचान उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा के संदर्भ में की जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

7. मानव संसाधन एवं संस्थान

इस योजना में निम्नलिखित चार घटक शामिल होंगे: अनुसंधान और विकास, प्रचार गतिविधियां, कौशल विकास, संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण.

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की विशेषताएं

1. वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए उद्योग को तैयार करता है.

2. कड़े गुणवत्ता और स्वच्छता मानदंडों का पालन और इस तरह यह उपभोक्ता स्वास्थ्य की रक्षा करता है.

3. वैज्ञानिकों, उद्योग और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ गहन परामर्श से क्षेत्र के समावेशी विकास में मदद मिलती है.

4. विदेशी बायर्स द्वारा उत्पाद स्वीकृति को बढ़ाता है.

5. उत्पाद और प्रक्रिया विकास और बेहतर पैकेजिंग के लिए खाद्य प्रसंस्करण में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करता है.

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के लाभ

1. यह प्रसंस्करण स्तर को बढ़ाएगा और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात को भी बढ़ाएगा.

2. 2017-18 वित्तीय वर्ष के दौरान किसान समृद्धि योजना के तहत महाराष्ट्र में तीन मेगा फूड पार्क, 50 एकीकृत कोल्ड चेन और वैल्यू एडिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किए गए हैं और 17 खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं.

3. वर्ष 2019 से 2020 तक देश में 5,30,500 प्रत्यक्ष / अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना हैं.

4. यह देश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास को एक बड़ा बढ़ावा देगा.

5. यह कृषि उत्पादक में लागत को कम करते हुए उनकी उपज क स्तर में वृद्धि, सुरक्षित और सुविधाजनक अनाज संग्रह के कार्यों में सहायक होगा.

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की संभावनाएं

1. ASSOCHAM और ग्रांट थॉर्टन द्वारा जारी संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भारी मात्रा में निवेश और नए रोज़गार सृजन करने की क्षमता है.

2. भारत में कच्चे माल बहुतायत में उपलब्ध है. भारत दुग्ध उत्पादन में पहला स्थान, सब्जियों और फलों के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है. लम्बी तट रेखा होने के कारण यहाँ मछलियां भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.

3. जलवायु भिन्नता के कारण यहाँ कृषि की बहुत सी प्रजातियां उपलब्ध है.

4. अधिक संख्या में एकल परिवारों में कामकाजी दंपति होने के कारण, खाना पकाने के लिए तैयार वस्तुओं की मांग बढ़ गई है.

5. बाजार में मांग के दृष्टिकोण से परिस्थितियांअनुकूल है.

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की सीमाएं

1. भारत में लगभग 40 प्रतिशत फसल प्रतिवर्ष नष्ट हो जाती है, यहाँ केवल 10 प्रतिशत ही प्रसंस्कृत किया जाता है.

2. भारत में निवेश की कमी होने के कारण ज्यादातर प्रसंस्करण इकाइयां छोटी है, जिसके कारण लागत मूल्य में वृद्धि हो जाती है और अनुसंधान एवं विकास के लिए संभावनाएं भी सीमित हो जाती है.

3. कमजोर आपूर्ति श्रृंखला जैसे कम संख्या में कोल्ड चेन आदि.

4. खाद्य और प्रसंस्करण प्रक्रिया के लिए कम विकसित प्रौद्योगिकियां.

5. खाद्य सम्मिश्रण परीक्षण सुविधाओं की अनुपलब्धता के कारण गुणवत्ता के दृष्टिकोण से ये राष्ट्रीय मानकों पर खड़े नहीं उतर पाते है.

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न उपाय निम्नानुसार हैं:

  • सरकार ने नामित खाद्य पार्कों में नामित फूड पार्कों और कृषि प्रसंस्करण इकाइयों को रियायती दर पर किफायती ऋण उपलब्ध कराने के लिए नाबार्ड में 2000 करोड़ रुपये का एक विशेष कोष भी स्थापित किया है.

  • खाद्य और कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयां और कोल्ड चेन अवसंरचना को खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के लिए अतिरिक्त ऋण प्रदान करने के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) के दायरे में लाया गया है, जिससे खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने, अपव्यय को कम करने, रोजगार सृजित करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है.

  • खाद्य प्रसंस्करण और खुदरा क्षेत्र में निवेश को गति प्रदान करने के लिए, सरकार ने भारत में निर्मित और / या उत्पादित खाद्य उत्पादों के संबंध में ई-कॉमर्स सहित ट्रेडिंग में 100% एफडीआई की अनुमति दी है। इससे किसानों को अत्यधिक लाभ होगा और बुनियादी ढांचे और रोजगार के महत्वपूर्ण अवसरों का सृजन होगा.

लेखक: चैताली कुमारी1शिवम कुमार1, केविन क्रिस्टोफर2, अमन कुमार3

1- प्रसार शिक्षा विभाग, BAU, साबौर

2- कृषि प्रसार विभाग, SHUATS, इलाहाबाद

3- सब्जी विज्ञान विभाग, NDUAT, फैजाबाद



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