देश में बदलते मौसम, बढ़ती लागत और बाजारों की मांग को देखते हुए किसान अब सब्जियों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं. भिंडी इन फसलों में से एक है, जिसकी खेती से किसानों को कम लागत में अच्छी आमदनी देने में सक्षम है. साथ ही इस सब्जी की सालभर मांग बनी रहती है और बाजारों में इसकी कीमत भी अच्छी मिल जाती है. ऐसे में अगर किसान भिंडी की खेती करना चाहते हैं, तो ICAR द्वारा विकसित इन टॉप 3 पूसा लाल भिंडी-1, पूसा भिंडी हाइब्रिड-1(DOH-1), पूसा भिंडी-5 (डी.वो.वी-66) उन्नत किस्मों की खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.
भिंडी की टॉप 3 किस्में-
पूसा लाल भिंडी-1
किसान अगर पूसा लाल भिंडी-1 किस्म की खेती करते हैं, तो यह भिंडी की किस्म बुवाई के 45 से 60 दिनों के भीतर किसानों को अच्छी पैदावार दें सकती है. साथ ही यह किस्म पूरी तरह सीधी और चिकनी और लाल, बैंगनी रंग की होती है. यह जल्दी तैयार होने वाली किस्म है. इसकी खेती कर किसान 150 टन/हेक्टेयर तक उपज पा सकते हैं.
पूसा भिंडी हाइब्रिड-1(DOH-1)
पूसा भिंडी हाइब्रिड-1(DOH-1) भिंडी की यह किस्म भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित उन्नत किस्म है. साथ ही यह किस्म येलो वेन मोजेक जैसे खतरनाक रोग के प्रति प्रतिरोधक मानी जाती है. अगर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसान इस किस्म को अपनाते हैं, तो वह इससे औसत उपज 26.3 टन/हेक्टेयर पा सकते हैं. वहीं, इस किस्म की यह खासियत है कि यह सर्दी व बारिश दोनों मौसम में अच्छी पैदावार देती है और उत्पादन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती है.
पूसा भिंडी-5 (डी.वो.वी-66)
किसान के लिए यह भिंडी की यह किस्म मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है, जो किसानों को 45 से 50 दिनों के भीतर तुड़ाई देना शुरु कर देती है और किसान इस किस्म से औसतन उपज लगभग 18 टन/हेक्टेयर तक प्राप्त कर सकते हैं. इस किस्म की खासियत है यह पीत शिरा मोज़ेक वायरस (YVMV) के प्रति प्रतिरोधी किस्म है, जिसकी खेती किसान खरीफ और गर्मी दोनों मौसम में कर सकते हैं.
किस उर्वरक का करें इस्तेमाल?
किसान भाई अगर भिंडी की इन किस्मों की खेती करना सोच रहे हैं, तो वह अपनी फसलों को आधार खुराक के रुप में 150 क्विंटल/हेक्टेयर में गोबर की सड़ी हुई खाद का छिड़काव करें. ऐसा करने से खेत की मिट्टी उपजाऊ रहेगी और फसल की पैदावार भी अच्छी गुणवत्ता वाली होगी.
Share your comments