अगर आप भी भिंडी की खेती कर रहे हैं और अच्छी आमदनी करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद ही जरुरी है, क्योंकि इस समय देश के लगभग किसान भिंडी की खेती करने में व्यस्त होंगे और ऐसे में उन किसानों को यह डर सता रहा होगा की कैसे वह भिंडी में कीट लगने की पहचान करें और कैसे भिंडी की फसल का प्रबंधन करें. इस सवाल का जबाव आपको इस आर्टिकल में मिलेगा तो आइए पूरा पढ़ें...
ऐसे करें भिंडी में कीट लक्षण की पहचान
सफेद मक्खी- इस कीट के शिशु व वयस्क भिंडी के पौधे की पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे भिंडी के पौधों में पीत शिरा चितेरी विषाणु बीमारी फैलाते हैं, जिससे किसानों को नुकसान होगा की पौधों की फल और पत्तियां पीली पड़ना शुरु हो जाएगी और उपज कमी होगी.
भिंडी का फुदका या तेला- भिंडी के पौधों में यह कीट पत्तियों की निचली सतह का रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देते हैं, जिससे पइर पत्तियां पीली पड़ जाती है और मुरझा जाती है और यदि इस कीट का अधिक प्रकोप होता है, तो यह पौधे को सूखा देता है.
भिंडी का प्ररोह एंव फल छेदक- यह कीट भिंडी की फसल को पूरी तरह से खत्म कर देता है, क्योंकि इस कीट की सुंडी कोमल तनों में छेद करके अंदर घुस जाती है और फल के अंदर छेद बनाकर घुसकर खाती है, जिस कारण भिंडी खाने योग्य नहीं रह जाती.
ऐसे करें भिंडी प्रबंधन
1. अगर आप भी भिंडी की खेती कर रहें हैं और ऐसे प्रबंधन के बारे में जानना चाहते हैं, जिससे भिंडी की फसल की बढ़वार तेजी से हो और दोगुना मुनाफा भी बड़े तो इन प्रबंधनों को अपनाएं-
2. भिंडी की आरम्भिक अवस्था में रस चूसने वाले कीटी से बचाव के लिय बीजों को इमीडाक्लोपिड या थायानिधीक्सम द्वारा 5 या प्रति किलो ग्राम बीज की दर से उपचारित करें, ताकि भिंडी के पौधों से कीटों के लगने का खतरा कम हो जाए.
3. मकड़ी एवं परभक्षी कीटों के विकास या गुणन के लिये मुख्य फसल के बीच-बीच में और चारों तरफ बेबीकॉर्न लगायें, जो बर्ड पर्च का भी कार्य करती है.
4. अगर भिंडी के पौधे कीट व पीत शिरा चितेरी विषाणु से ग्रसित है, तो उन पौधों को खेत से निकाल कर जला या गाड़ दें.
5. अगर भिंडी के पौधों में फल छेदक के नियंत्रण के लिये ट्राइकोग्रामा काइलोनिस 1.0-1.5 लाख प्रति हेक्टेयर या बिवेरिया बैसियाना (1ग्रा./ली.) की दर से 2-3 बार उपयोग करें.
6. भिंडी में सफेद मक्खी को नियंत्रित करने के लिए डायफेंथियुरोन 50% डब्ल्यू.पी 12 ग्रा./ 10ली. या फ़्लोनिकैमिड 50 डब्ल्यू.जी 4 ग्रा./10ली. या फ्लुपाइराडिफ्यूरोन 17.09 एस.एल 25 मि. ली/10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.
7. फुदका प्रकोप से बचने के लिए बीजों को थियामेथोक्सम 30% एफएस 5.7 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें.
लेखक: रवीना सिंह
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