मार्च का महीना चल रहा है और इस माह में किसान भाइयों को तलाश है, ऐसी फसलों की जिसकी बाजारों में अच्छी मांग हो. ऐसे में किसानों के लिए ICAR द्वारा विकसित पूसा सब्जी पेठा( डी.ए.जी-12), चप्पन कद्दू- पूसा पसंद(डी.एस-8),पूसा संतुष्टि(पी-6) इन टॉप 3 सब्जियां सही विकल्प हो सकती है, जिसकी खेती कर किसान भाई बाजार में अच्छे दाम पा सकते हैं, क्योंकि इन सब्जियों की मांग भी बाजारों में बनी रहती है, जिससे मुनाफा होने की संभावना बढ़ जाती है.
आइए आगे जानें ICAR द्वारा विकसित पूसा सब्जी पेठा( डी.ए.जी-12), चप्पन कद्दू- पूसा पसंद(डी.एस-8),पूसा संतुष्टि(पी-6) इन टॉप 3 सब्जियों के बारे में विस्तार से-
पूसा सब्जी पेठा( डी.ए.जी-12)
पूसा सब्जी पेठा (D.A.G-12) की मांग बाजारों में बड़े पैमाने पर होती है, क्योंकि इसका इस्तेमाल पेठा मिठाई बनाने के लिए किया जाता है और आगरा में भी पेठा मिठाई लोग कितने चाव से खरीदते हैं. इसलिए इस सब्जी की डिमांड बाजारों में बनी रहती है. साथ ही इसके सेवन से पेट की समस्याओं से भी राहत मिलती है.
अगर कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल इन राज्यों के किसान इस फसल को चुनाव करते हैं तो 32 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज पा सकते हैं.
चप्पन कद्दू- पूसा पसंद(डी.एस-8)
चप्पन कद्दू की किस्म 'पूसा पसंद' (डी.एस-8) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) द्वारा विकसित एक उन्नत, जल्दी तैयार होने वाली और उच्च उपज देने वाली किस्म है. यह विशेष रूप से उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों में स्प्रिंग-समर बसंत-गर्मी के लिए बहुत लोकप्रिय है.
इस किस्म की खासियत की बात करें तो इसमें पोटेशियम और विटामिन ए, सी जैसे पोषक तत्व भी पाएं जाते है, जो शरीर के लिए भी काफी फायदेमंद माने जाते हैं और इसका सेवन कैंसर जैसी घातक बीमारी में भी लाभकारी माना जाता है. अगर किसान फसल को अपनाते हैं तो वह 25 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन पा सकते हैं.
पूसा संतुष्टि(पी-6) लौकी
पूसा संतुष्टि(पी-6) लौकी की यह किस्म किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. अगर किसान भाई इस किस्म की बुवाई करते हैं तो वह इस किस्म से 60 दिनों के भीतर उपज प्राप्त कर सकते हैं. यानी की इस किस्म की परिपक्वता बेहद जल्दी होती है, जिससे किसान बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.
साथ ही पूसा संतुष्टि(पी-6) की खेती पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है. इन राज्यों के किसान इसकी खेती कर 32 टन प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त कर तगड़ी आय अर्जित कर सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह
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