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‘वन हेल्थ सम्मिट’ के जरिए देश को स्वस्थ बनाने की शुरुआत .

देश पशुपालन और कृषि के क्षेत्र में तो काफी तरक्की कर रहा है. दूध उत्पादन, मुर्गी पालन, मछली पालन सभी में भारत ने अन्तराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनायीं है. इन सभी का मानव जाति से सीधा सम्बन्ध है. मानव शरीर भी बीमार होता है और पशुओं का शरीर भी बीमार पड़ता है. शरीर की देखभाल के लिए दवाईयां और पोषक तत्व का इस्तेमाल आज के समय में जरुरी हो गया है.

 मानव और पशु स्वास्थ्य के दोनों ही क्षेत्रों में बेहतर तरीके से काम किया जा सके. इसके लिए वन हेल्थ सम्मिट का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के हयात रीजेंसी होटल में किया गया. सतगुरु मैनजमेंट कंसल्टेशन ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया. साथ ही साथ इंडियन फेडरेशन ऑफ़ एनिमल हेल्थ ने इस कार्यक्रम को सपोर्ट किया. इसमें स्वस्थ्य सम्बन्धी मुद्दों, ड्रग्स रेगुलेशन, ड्रग्स अप्रूवल सिस्टम पर चर्चा की गयी. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया डॉ. एस्वरा रेड्डी ने ड्रग रेगुलेशन पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि सरकार ने अप्रूवल सिस्टम में कई बदलाव किए है, जिससे की अप्रूवल की प्रक्रिया और भी आसान हो गयी. उन्होंने कहा कि पशु स्वास्थ्य क्षेत्र में स्टार्ट अप्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता है. इसके लिए सरकार भी कई कदम उठा रही. कार्यक्रम में इंडियन फेडरेशन और एनिमल हेल्थ के प्रेसिडेंट डॉ. डी.के. डे ने पशु स्वस्थ्य और मानव स्वास्थ्य से सम्बंधित आंकड़े पेश किए साथ ही उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को और बेहतर बनाने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र  और स्टेकहोल्डर्स को एक साथ आना होगा.

इस क्षेत्र में और सुधार हो पाएंगे. उन्होंने बताया की देश में पशु स्वास्थ्य को लेकार काम करने वाली कंपनिया बहुत कम है. इसका मार्किट साइज़ कम है. उन्होंने कहा देश में इसका कारोबार मात्र 5000 करोड़ का है. इसको बढ़ावा दिए जाने की जरुरत है. इस कार्यक्रम में सरकारी एवं निजी क्षेत्र से लगभग 150 से अधिक डेलिगेटस ने भाग लिया. डीबीटी से सीनियर सलाहकार एस.आर. राव पशुपालन विभाग से तरुण श्रीधर, कोर्नेल यूनिवर्सिटी से एलेग्जेंडर ट्रेविस, जायडस से अरुण अत्रे, इंटास से विजय टेंग सिप्ला से जयदीप गोटे और एफएओ से राजेश भाटिया मौजूद रहे. प्रेस कांफ्रेस के दौरान वन हेल्थ समिट कमिटी ने कहा वन हेल्थ सम्मिट के जरिए सरकारी एवं निजी क्षेत्र के एक साथ आने से मानव स्वास्थ्य एवं पशुपालन स्वास्थ्य क्षेत्र को और विकसित किया जा सकेगा. इसका मार्किट साइज़ और बढेगा.     



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