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चाय निर्यात के लिए, विदेशी बाजारों में संभावना तलाशेगा भारत

ग्लोबल वार्मिंग का प्रकोप कई देशों में किसानों के लिए मुख्य समस्या का कारण बनता जा रहा है. इसके वजह से कई व्यावसायिक फसलों पर ज्यादा प्रभाव पड़ा है. ऐसे में अफ़्रीकी देशों में पड़ रहे सूखा के कारण इस बार चाय के उत्पादन  में काफी कमी आई है. गौरतलब है कि वर्ष 2017 के मुकाबले वर्ष 2018 में केन्या में 49.2 करोड़ किलोग्राम चाय की रिकॉर्ड फसल हुई थी. इससे ग्लोबल मार्केट में कीमत में काफी गिरावट दर्ज किए गए थे. इसका भारतीय चाय पर भी असर पड़ा था, लेकिन इस वर्ष केन्या में चाय की फसल की उपज काफी कम हुई है . इससे मोम्बासा में नीलामी में कीमत 15-20 % बढ़ गए थे. जयश्री टी ऐंड इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा, 'इस वजह से पाकिस्तान भारत से अधिक चाय का आयात कर रहा है.' पाकिस्तान को निर्यात की जाने वाली चाय का लगभग 80% दक्षिण भारत और बाकी असम से होता है.

इंडियन टी एसोसिएशन (ITA) के सेक्रेटरी सुजीत पात्रा ने बताया, 'पाकिस्तान से नियमित भुगतान होता है. इसे लेकर भारतीय चाय निर्यातकों को अभी तक कोई समस्या नहीं हुई है. पाकिस्तान अच्छी मात्रा में भारतीय चाय खरीद रहा है और अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो इस वर्ष उस चाय का निर्यात बढ़कर 2-2.5 करोड़ किलोग्राम तक पहुंच सकता है. हाल ही में कश्मीर में हुए हमले में पाकिस्तान से रिश्तों में खटास आई है हालाँकि इसका असर चाय से जुड़े व्यापार करने वाले व्यापारियों पर नहीं पड़ा है  पर इंडियन टी एसोसिएशन (ITA) के अनुसार 'पाकिस्तान से नियमित भुगतान होता है.

इसे लेकर भारतीय चाय निर्यातकों को अभी तक कोई समस्या नहीं हुई है. पाकिस्तान अच्छी मात्रा में भारतीय चाय खरीद रहा है और अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो इस वर्ष उस चाय का निर्यात बढ़कर 2-2.5 करोड़ किलोग्राम तक पहुंच सकता है. हालाँकि इस पुलवामा हमले के बाद भारत के कई व्यापारिक रिश्तों में भी खटास आ गई है जिसके वजह से भारत के चाय निर्यातक देश के आलावा भारतीय चाय के लिए रूस एक बड़ा मार्केट है. 2018 में रूस ने भारत से लगभग 4.5 करोड़ किलोग्राम चाय खरीदी थी. ईरान का आयात 3.6 करोड़ किलोग्राम और इजिप्ट का करीब 1.13 करोड़ किलोग्राम था. भारतीय चाय निर्यातक अब इराक में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं. एग्जिक्युटिव्स ने कहा कि अगर भारत से चाय का आयात करने वाले देश खरीदारी बढ़ाते हैं तो भारत का चाय निर्यात 2020 तक बढ़कर 30 करोड़ किलोग्राम हो सकता है.

अनिकेत कुमार



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