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जयपुर में 7 अप्रैल को पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 7 अप्रैल को जयपुर में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें शिवराज सिंह चौहान और भजनलाल शर्मा सहित कई राज्य भाग लेंगे, जहां कृषि विकास, तकनीक और किसानों की आय बढ़ाने पर चर्चा होगी।

KJ Staff
shivraj singh chouhan
किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान
  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्घाटन

  • कृषि आत्मनिर्भरता, सतत विकास एवं डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने पर रहेगा विशेष फोकस

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 7 अप्रैल 2026 को जयपुर, राजस्थान में पश्चिमी राज्यों के लिए क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन देश में कृषि क्षेत्र के समग्र विकास, आत्मनिर्भरता, सतत कृषि पद्धतियों के विस्तार तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी के समावेशन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

भारत सरकार द्वारा उत्पादन वृद्धि, मूल्य श्रृंखला विकास, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से विभिन्न प्रमुख कृषि मिशनों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उक्त सम्मेलन इन मिशनों की प्रगति की समीक्षा, राज्यों के मध्य अनुभवों के आदान-प्रदान तथा भावी कार्यनीतियों के निर्धारण हेतु एक प्रभावी मंच प्रदान करेगा।

सम्मेलन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात एवं गोवा राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। ये राज्य दलहन एवं तिलहन उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान के साथ विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे नवाचार एवं सर्वोत्तम पद्धतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10:00 बजे वंदे मातरम् के साथ किया जाएगा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया जाएगा। तत्पश्चात केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  शिवराज सिंह चौहान द्वारा उद्घाटन संबोधन दिया जाएगा। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी अपने विचार व्यक्त करेंगे।

सम्मेलन के अंतर्गत विभिन्न विषयगत सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख योजनाओं एवं मिशनों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (एनएमईओ-ओएस) के अंतर्गत देश में तिलहन उत्पादन में वृद्धि एवं खाद्य तेलों पर आयात निर्भरता में कमी लाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मिशन के तहत वर्ष 2030-31 तक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि, क्षेत्र विस्तार तथा उत्पादकता में सुधार के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत तुअर, उड़द एवं मसूर की फसलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए बीज विकास, क्षेत्र विस्तार, सुनिश्चित खरीद, अनुसंधान एवं मूल्य श्रृंखला विकास से संबंधित विषयों पर चर्चा की जाएगी। यह मिशन देश की पोषण सुरक्षा एवं किसानों की आय वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के अंतर्गत रसायन मुक्त एवं पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों की समीक्षा की जाएगी। मिशन के तहत क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने तथा जैव-इनपुट के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जा रहा है।

डिजिटल कृषि मिशन (डीएएम) के अंतर्गत एग्री-स्टैक, डिजिटल किसान डेटाबेस, भूमि अभिलेखों का एकीकरण तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं रिमोट सेंसिंग तकनीकों के उपयोग के माध्यम से कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों की प्रस्तुति भी दी जाएगी। इसमें राजस्थान द्वारा माइक्रो इरिगेशन मॉडल, गुजरात द्वारा बागवानी क्षेत्र में नवाचार, महाराष्ट्र द्वारा एग्री-स्टैक के उपयोग, मध्य प्रदेश द्वारा उर्वरक वितरण प्रणाली में सुधार तथा गोवा द्वारा प्राकृतिक खेती से संबंधित पहलें शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, नकली कीटनाशकों एवं उर्वरकों पर नियंत्रण, उर्वरकों की कालाबाजारी की रोकथाम, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने तथा वैकल्पिक उर्वरकों के प्रचार-प्रसार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी, जिसमें सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्षों से अवगत कराया जाएगा। समापन सत्र में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) एवं कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया जाएगा तथा विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों द्वारा अपने विचार व्यक्त किए जाएंगे।

यह सम्मेलन पश्चिमी क्षेत्र में कृषि मिशनों की प्रगति की व्यापक समीक्षा, राज्यों के मध्य सर्वोत्तम पद्धतियों के आदान-प्रदान तथा तिलहन, दलहन, प्राकृतिक खेती एवं डिजिटल कृषि के क्षेत्रों में बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। सम्मेलन के माध्यम से बीज प्रणाली, बाजार संबंधों एवं मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करने के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि हेतु क्रियान्वयन योग्य रणनीतियों का विकास अपेक्षित है। यह क्षेत्रीय सम्मेलन भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ एवं प्रौद्योगिकी आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।

English Summary: Regional agriculture conference will be organized by the Union Ministry of Agriculture and Farmers Welfare in Jaipur on April 7 Published on: 06 April 2026, 06:55 PM IST

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