बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने सोमवार को कहा कि राज्य को कृषि क्षेत्र में अग्रणी बनाने के संकल्प के साथ बिहार सरकार किसानों को कटाई के बाद प्रबंधन के लिए निरंतर सशक्त कर रही है। उन्होंने कहा कि बिहार की जलवायु और यहां की विविध फसलों जैसे टमाटर, प्याज, मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी, करेला, हल्दी, मशरूम आदि के लिए उपयोगी सोलर क्रॉप ड्रायर एक क्रांतिकारी समाधान के रूप में उभर रहा है।
यादव ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों की फसलों की बर्बादी रोकना और उन्हें अपनी उपज का मूल्य निर्धारक बनाना है। उन्होंने बताया कि फसलोत्तर प्रबंधन योजनान्तर्गत बिहार सरकार सोलर ड्रायर की स्थापना पर विशेष प्रोत्साहन दे रही है। 100 किलोग्राम क्षमता वाले सोलर ड्रायर की अनुमानित लागत 3,50,000 रुपये है, जिस पर 1,40,000 रुपये अनुदान का प्रावधान किया गया है।
मंत्री ने कहा कि सोलर ड्रायर के भीतर नियंत्रित तापमान पर फसल को सुखाने से उसका प्राकृतिक रंग, स्वाद और सुगंध बरकरार रहती है। इससे उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होती है और वह प्रीमियम मार्केट तथा निर्यात के लिए अधिक उपयुक्त बनता है। उन्होंने कहा कि खुले में सुखाने के दौरान धूल, बारिश, नमी और फफूंद से जो नुकसान होता है, सोलर ड्रायर उस जोखिम को काफी हद तक समाप्त कर देता है। इस तकनीक से 30 से 40 प्रतिशत तक फसल की बर्बादी रोकी जा सकती है।
यादव ने कहा कि अब किसान बाजार में कम दाम मिलने पर फसल बेचने को मजबूर नहीं होंगे। सोलर ड्रायर के माध्यम से फसल को सुखाकर सुरक्षित रखा जा सकेगा और उपयुक्त समय पर अधिक कीमत पर बेचा जा सकेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें अपनी उपज के बेहतर विपणन का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यह तकनीक विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का बड़ा अवसर लेकर आई है। सोलर ड्रायर के माध्यम से स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं, जहां मूल्य संवर्धन के साथ विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे गांवों में ही रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही राज्य की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि हमारे किसान कड़ी मेहनत कर अच्छी पैदावार तो कर लेते हैं, लेकिन भंडारण और सही प्रसंस्करण तकनीक के अभाव में उनकी मेहनत का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है। ऐसे में सोलर क्रॉप ड्रायर केवल एक मशीन नहीं, बल्कि अन्नदाताओं के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच है।
उन्होंने किसानों, महिला समूहों और ग्रामीण युवाओं से अपील की कि वे इस तकनीक को अपनाएं और सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे प्रोत्साहन का लाभ उठाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ें।
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