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कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में “कृषि यंत्रीकरण एवं फसल अवशेष प्रबंधन” पर 4 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग ने आत्मा, लखीसराय के सहयोग से “कृषि यंत्रीकरण एवं फसल अवशेष प्रबंधन” पर चार दिवसीय प्रशिक्षण 28 फरवरी 2026 को संपन्न किया। पूरी खबर पढ़ें..

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कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में “कृषि यंत्रीकरण एवं फसल अवशेष प्रबंधन” पर 4 दिवसीय प्रशिक्षण की झलक

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग द्वारा आत्मा, लखीसराय के प्रायोजन से आयोजित “कृषि यंत्रीकरण एवं फसल अवशेष प्रबंधन” विषय पर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 28 फरवरी 2026 को किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार के लखीसराय  जिले से कुल 22 किसान प्रतिभागी भाग लिए।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अतिथियों के रूप में जे पी नारायण पूर्व संयुक्त निदेशक (कृषि अभियांत्रिकी, बिहार सरकार); संस्थान के निदेशक डॉ अनुप दास; डॉ आशुतोष  उपाध्याय , प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग तथा डॉ संजीव कुमार, प्रमुख, फसल अनुसंधान प्रभाग उपस्थित थे।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को कृषि यंत्रीकरण, छोटे कृषि उपकरणों के उपयोग, फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों, मशीनों के चयन, संचालन एवं रखरखाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। अपने संबोधन में डॉ. अनुप दास ने उत्पादन लागत कम करने, कृषि कार्यों की समयबद्धता बढ़ाने तथा पर्यावरणीय क्षरण को कम करने के लिए छोटे कृषि औजारों एवं प्रभावी फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि  जे. पी. नारायण ने बिहार में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने, कस्टम हायरिंग केंद्रों को सुदृढ़ करने तथा फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर सतत कृषि एवं किसानों की आय बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने अपने वक्तव्य में कहा कि कृषि यंत्रीकरण और फसल अवशेष प्रबंधन कृषि कार्यक्षमता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत कृषि विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने भूमि तैयारी, बुवाई, निराई-गुड़ाई, कटाई एवं कटाई उपरांत कार्यों में आधुनिक कृषि मशीनों के सही चयन, कुशल संचालन और नियमित रखरखाव के महत्व पर जोर दिया।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों के साथ एक संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने अपने क्षेत्रीय अनुभव, समस्याएं और अपेक्षाएं साझा कीं। विभिन्न वक्ताओं ने बताया कि कृषि यंत्रीकरण को उचित फसल अवशेष प्रबंधन के साथ अपनाने से न केवल फसल उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ती है, बल्कि मृदा स्वास्थ्य में सुधार, नमी संरक्षण तथा पर्यावरण प्रदूषण में कमी भी आती है। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. आशुतोष उपाध्याय एवं डॉ. विकास सरकार , प्रधान वैज्ञानिक ने की।यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. पी. के. सुंदरम, डॉ आशुतोष उपाध्याय, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. पवन जीत, डॉ. आरती कुमारी एवं डॉ. कीर्ति सौरभ के सहयोग से, डॉ. कुंदन कुमार (परियोजना निदेशक, आत्मा, लखीसराय) के प्रायोजन में संचालित किया गया।

English Summary: Agricultural Mechanization and Crop Residue Management concluded at Agricultural Research Complex Patna 4-day training programme Published on: 28 February 2026, 03:57 PM IST

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