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Updated on: 19 March, 2025 12:00 AM IST
इन 5 गाय की नस्लों के साथ करें डेयरी बिजनेस की शुरूआत (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारत में पशुपालन एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है, जिसमें गाय पालन से लोग अच्छी आमदनी कमा सकते हैं. दूध, जैविक खाद और अन्य दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण यह एक लाभदायक व्यवसाय बन चुका है. सही नस्ल की गायों का चयन करके डेयरी फार्मिंग से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. कुछ भारतीय नस्लें अधिक दूध उत्पादन, बेहतर सहनशक्ति और कम देखभाल में भी अच्छा लाभ देती हैं. अगर आप भी डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो ये 5 भारतीय गाय नस्लें आपकी आमदनी बढ़ाने में मदद कर सकती हैं.

1. गिर गाय

गिर नस्ल की गाय गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में पाई जाती है. यह नस्ल अपनी ऊँची दूध उत्पादन क्षमता और सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध है. गिर गाय एक दिन में 12 से 15 लीटर तक दूध दे सकती है. इसके दूध में औषधीय गुण पाए जाते हैं, जिससे इसकी मांग देश और विदेश में काफी अधिक है.

2. साहीवाल गाय

साहीवाल गाय पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में पाई जाती है. यह गाय कम चारा खाने के बावजूद अधिक दूध देती है. साहीवाल गाय का दूध ए2 प्रोटीन से भरपूर होता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. यह नस्ल आसानी से गर्मी सहन कर सकती है और कम बीमार पड़ती है, जिससे इसे पालना आसान होता है.

3. थारपारकर गाय

थारपारकर नस्ल मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात के शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है. यह गाय कठोर जलवायु में भी अच्छी तरह जीवित रह सकती है और लगभग 10-12 लीटर दूध प्रतिदिन देती है. इस नस्ल की गायें कम बीमार होती हैं और इन्हें पालना भी आसान होता है.

4. राठी गाय

राठी नस्ल राजस्थान की एक लोकप्रिय नस्ल है, जो अधिकतर दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है. यह नस्ल प्रतिदिन 8-10 लीटर तक दूध देती है और कम देखभाल में भी अच्छी पैदावार देती है. राठी गाय का दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इस नस्ल को डेयरी व्यवसाय के लिए आदर्श माना जाता है.

5. लाल सिंधी गाय

लाल सिंधी गाय मुख्य रूप से पाकिस्तान और भारत के कुछ हिस्सों में पाई जाती है. यह कम देखभाल में भी अच्छा दूध उत्पादन करती है और गर्म जलवायु को झेलने की क्षमता रखती है. यह गाय प्रतिदिन 10-12 लीटर दूध देती है और कई रोगों से बचाव के लिए जानी जाती है.

गाय पालन से होने वाले लाभ

  • उच्च दूध उत्पादन – इन नस्लों की गायें अधिक मात्रा में दूध देती हैं, जिससे अच्छी कमाई होती है.
  • कम देखभाल में ज्यादा लाभ – ये नस्लें कम बीमार पड़ती हैं, जिससे इनके इलाज और देखभाल का खर्च कम आता है.
  • गोबर से अतिरिक्त आय – गोबर से जैविक खाद, बायोगैस और अन्य उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं.
  • दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग – दूध से घी, मक्खन, दही और पनीर जैसे उत्पाद बनाकर अतिरिक्त कमाई की जा सकती है.
  • सरकारी सहायता योजनाएं – पशुपालकों को सरकार की ओर से सब्सिडी और लोन की सुविधाएं मिलती हैं.
English Summary: Top 5 profitable Indian cow breeds for dairy farming
Published on: 19 March 2025, 06:03 IST

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