Sugarcane Farming Tips: वैज्ञानिक ढंग से गन्ने की खेती कर बढ़ाएं उत्पादन Success Story: प्राकृतिक खेती से संजीव कुमार की बदली तकदीर, लागत में आई 60% तक कमी, आमदनी में हुई 40% तक वृद्धि कृषि में मशीनों के उपयोग में STIHL की भूमिका: भारतीय खेती के लिए आधुनिक समाधान Success Story: आलू की खेती में बढ़ी उपज और सुधरी मिट्टी, किसानों की पहली पसंद बना जायडेक्स का जैविक समाधान किसानों के लिए साकाटा सीड्स की उन्नत किस्में बनीं कमाई का नया पार्टनर, फसल हुई सुरक्षित और लाभ में भी हुआ इजाफा! Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 2 January, 2026 12:00 AM IST
टॉप 3 देसी गायें (Image Source- Freepik)

देश के किसान अब खेती करने के साथ-साथ वह दुग्ध उत्पादन की ओर भी बढ़ रहे हैं और ऐसे में देसी गायों की मांग लगातार बढ़ रही है. अगर किसान थारपारकर, गिर और देओनी जैसी नस्लों का पालन करते हैं, तो वह इन गायों से बेहतर गुणवत्ता का दूध के साथ-साथ कम खर्च में आसानी से पालन कर सकते हैं. इनमें मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता और स्थानीय जलवायु के अनुरूप ढलने की क्षमता के कारण ये नस्लें छोटे और सीमांत किसानों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है.

1. थारपारकर गाय

थारपारकर गाय का मूल स्थान राजस्थान का थार मरुस्थल क्षेत्र है. यह नस्ल अत्यधिक गर्मी और कम वर्षा वाले इलाकों में भी आसानी से जीवित रह सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी उत्कृष्ट रोग प्रतिरोधक क्षमता है, जिससे पशु चिकित्सा पर खर्च कम आता है. पशुपालक अगर इस नस्ल का चुनाव करते हैं, तो वह इससे प्रतिदिन लगभग 15 से 18 लीटर दूध का उत्पादन पा सकते हैं. यही कारण है कि राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के किसान इस नस्ल को तेजी से अपना रहे हैं.

2. गिर गाय

गिर गाय भारत की सबसे लोकप्रिय देसी नस्लों में से एक है. इसका मूल स्थान गुजरात का गिर क्षेत्र है और यह दक्षिण काठियावाड़ में पायी जाती है. गिर प्रजाति की उत्पत्ति गुजरात के काठियावाड़, गिर जंगलों से होती है और इसे काठियावाड़ी, सुरती, अजमेरा, और रेंडा के नाम से भी जाना जाता है. यह नस्ल अपने A2 श्रेणी के दूध के लिए जानी जाती है.अगर किसान इस नस्ल का पालन करते हैं, तो वह औसतन 6 से 10 लीटर दूध प्रतिदिन पा सकते है.

3. देओनी गाय

देओनी गाय किसानों के लिए एक सही विकल्प है, जो दूध और खेती दोनों में उपयोगी है. साथ ही इस गाय की देसी नस्ल का विकास महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के सीमावर्ती क्षेत्रों में हुआ है. अगर किसान इस नस्ल का पालन करते हैं, तो वह दुग्ध उत्पादन और कृषि कार्य में फायदा पा सकते हैं, क्योंकि यह नस्ल मजबूत शरीर और सहनशक्ति के कारण खेती के कामों को भी आसानी से कर देती है.

वहीं, देओनी गाय प्रतिदिन 4 से 8 लीटर दूध देती है और सालाना 1500 लीटर दूध देने में सक्षम गाय है, जिससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो सकता है.

English Summary: Top 3 cow breeds will be profitable for farmers and livestock breeders
Published on: 02 January 2026, 04:39 IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now