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Updated on: 22 June, 2022 12:00 AM IST
Pheasant rearing

देश के कई हिस्सों में पशुपालक तीतर पालन कर रहे हैं, लेकिन आज भी ज्यादातर पशुपालकों को लेकर तीतर पालन की पूरी जानकारी नहीं है. ऐसे में कृषि जागरण आपके लिए इस लेख में तीतर पालन करने की पूरी जानकारी लेकर आया है. बता दें कि तीतर को बटेर के नाम से भी जाना जाता है, तो आइए इसके तीतर पालन से जुड़ी जानकारी देते हैं. 

तीतर के बारे में क्या आप जानते हैं?

तीतर एक जंगली पक्षी है, जो ज्यादा दूरी तक नहीं उड़ सकता है. यही वजह है कि ये जमीन पर ही अपना घौंसला बनाता है. इसका मीट इतना स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है कि ये लोगों को अधिक पंसद आता है, इसलिए इसका अवैध शिकार भारत में इतना ज्यादा बढ़ गया था कि ये विलुप्त होने के कगार पर आ गया.

यही वजह है कि वन्य जीव संरक्षण कानून 1972 के तहत इसके शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन इसके शिकार पर प्रतिबंध है. ऐसे में अगर आप भी तीतर पालन करना चाहते हैं, तो सरकार लाइसेंस लेकर इसको पालन का काम किया जा सकता है.

तीतर पालन के फायदे

तीतर पालन का व्यवसाय ना सिर्फ आपको अच्छी कमाई दे सकता है, बल्कि इसकी घटती संख्या को बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकता है. इसके व्यवसाय की सबसे खास बात ये है कि ये कम लागत में भी शुरू किया जा सकता है.

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हर साल औसतन लगभग 300 अंडे देती है एक तीतर!

बटेर की दो पीढ़ियों के बीच का अंतराल भी बहुत कम होता है, कहने का मतलब ये है कि इसका विकास काफी तेजी से होता है. पक्षियों के तेजी से बढ़ने के कारण मादा तीतर औसतन 45 से 50 दिनों में अंडे देना शुरू कर देती है. सबसे अधिक अंडे का उत्पादन 60 से 70वें दिन में मिलता है. एक अनुमान के मुताबिक, अनुकूल जलवायु में एक तीतर हर साल औसतन 250 से 280 अंडे दे देती है.

तीतर पक्षियों की देखभाल करना बेहद आसान

इन पक्षियों के छोटे आकार और कम वजन की वजह से भोजन और जगह की आवश्यकता भी कम होती है. इससे व्यवसाय में निवेश भी काफी कम होता है. आप 4-5 तीतर को पालकर भी इसका बिजनेस शुरू कर सकते हैं.

English Summary: Pheasant rearing is a better business for Indian cattle farmers
Published on: 22 June 2022, 02:43 IST

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