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Updated on: 27 February, 2025 12:00 AM IST
बढ़ते तापमान का असर: फलों की मिठास और पैदावार पर संकट (Image Source: Freepik)

बिहार की जलवायु मुख्यतः मानसूनी है, जिसमें गर्मी, सर्दी और वर्षा ऋतु का स्पष्ट विभाजन देखा जाता है. हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण इन ऋतुओं में अप्रत्याशित बदलाव हो रहे हैं. फरवरी 2025 में तापमान असामान्य रूप से 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जबकि गेहूं, दलहन और सब्जियों की फसलें अभी पूर्ण रूप से तैयार नहीं हुई हैं. यदि यही स्थिति बनी रही, तो फसलों की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

फरवरी 2025 का दैनिक मौसम विश्लेषण

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर (बिहार) के कृषि मौसम विज्ञान प्रभाग द्वारा दर्ज किए गए मौसम डेटा के अनुसार...

अधिकतम तापमान: 22 फरवरी को 29.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि 8 फरवरी को सबसे कम 23.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. 19 फरवरी के बाद से अधिकतम तापमान लगातार 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा.

अधिकतम तापमान में औसत वृद्धि: पूरे महीने में अधिकतम तापमान औसतन 2-3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा. कुछ दिनों में यह 4-5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया.

न्यूनतम तापमान: 8 फरवरी को 6.5 डिग्री सेल्सियस, जबकि 21 फरवरी को 13.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस दौरान सामान्यतः न्यूनतम तापमान सामान्य से 1-2 डिग्री सेल्सियस कम रहा.

जलवायु परिवर्तन का आम एवं लीची के फूल आने पर प्रभाव

बिहार की वर्तमान जलवायु में हो रहे बदलावों का आम एवं लीची की खेती पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है. असामान्य तापमान वृद्धि और मानसूनी अनिश्चितता इन फसलों के उत्पादन, गुणवत्ता और आर्थिक लाभ पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं.

जलवायु परिवर्तन का आम पर प्रभाव

1. मंजर बनने में बाधा

1 फ़रवरी से लेकर 24 फ़रवरी तक के न्यूनतम तापमान का विश्लेषण करने से पता चला की 12 दिन न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या उससे कम रहा जबकि 7 दिन न्यूनतम तापमान 10-12 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहा. इस दौरान सामान्यतः न्यूनतम तापमान सामान्य से 1-2 डिग्री सेल्सियस कम रहा जिसकी वजह से आम मे मंजर खुलकर नहीं आए . फरवरी में न्यूनतम तापमान का 12°C से कम रहने की वजह से मंजर खूब खुलकर नहीं आ रहे हैं लेकिन दिन का तापमान 30°C तक पहुंचने से आम के मंजर (फूल) आ सकते हैं, पर उनकी गुणवत्ता प्रभावित होगी. अत्यधिक गर्मी से फूल झड़ने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे उत्पादन कम हो सकता है.

2. कीट एवं रोगों का बढ़ता प्रभाव

बढ़े हुए तापमान और कम आर्द्रता के कारण आम के फल छेदक कीट (Mango Fruit Borer) और पाउडरी मिल्ड्यू जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है.

समय से पहले गर्मी बढ़ने से हॉपर्स (hopper) की संख्या में वृद्धि हो सकती है, जो आम के फूलों को नुकसान पहुंचाते हैं.

3. फल की गुणवत्ता पर प्रभाव

असमान तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण आम के फलों का आकार छोटा रह सकता है और उनकी मिठास प्रभावित हो सकती है.

जलवायु परिवर्तन का लीची पर प्रभाव

फूल और फल सेटिंग पर असर

फरवरी में तापमान बढ़ने से लीची की फूल आने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है.

अत्यधिक गर्मी से परागण (pollination) पर प्रभाव पड़ेगा, जिससे फल बनने की दर कम हो सकती है.

जल की अधिक आवश्यकता

उच्च तापमान के कारण लीची के बागों में मिट्टी की नमी तेजी से कम होती है, जिससे सिंचाई की आवश्यकता बढ़ जाती है. लेकिन सिंचाई फल लग जाने के उपरांत ही करनी चाहिए.

रोग एवं कीट संक्रमण

गर्म और शुष्क मौसम में लीची में छाल फटने (bark splitting) और फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है. लीची के फल स्टिंक बग (Lychee stink bug) और लीची माइट (Lychee mite) के हमले की संभावना अधिक हो सकती है.

English Summary: Mango litchi production decline due to rising temperature
Published on: 27 February 2025, 05:42 IST

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