भारतीय रसोई में विभिन्न मसालों का इस्तेमाल किया जाता है और इन्हीं में से एक है जीरा जिसका उपयोग सब्जी, दाल में मुख्य रुप से तड़का लगाने के लिए किया जाता है, जिससे खाने का स्वाद भी दोगुना हो जाता है और खुशबू भी खाने को बेहद रही लजीज बनाती है. अगर आप जीरे का इस्तेमाल अधिक मात्रा में करते हैं और रोजाना बाजार से खरीद करनी पड़ती है, तो अब ऐसा नहीं होगा. आप जीरे के पौधे को अपनी घर के किचन गार्डन में इन आसान तरीकों से आसानी से उगा सकते हैं-
जीरा उगाने की शुरुआत कैसे करें?
अगर आप भी बागवानी करने का शौक रखते हैं, तो आप बेहद ही आसानी से जीरा अपने घर के गमलों में उगा सकते हैं. ऐसे में सबसे पहले आप सही बीजों को चुनें. या फिर आप रसोई में रखें बिना पीसे हुए मोटे दानों वाले जारे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं या फिर आप बीज भंडार से अच्छी वैरायटी के बीज खरीद करें और उन बीजों को आप तेजी से अंकुरण करने के लिए रात में हल्के गर्म पानी में भिगोकर रख दें और फिर गमलों में बोएं.
सही गमले का चुनाव जरुरी
अगर आप अपने घर के किचन गार्डन में जीरा उगाना सोच रहे हैं, तो ऐसे में सबसे पहले आप जीरे की खेती करने से पहले सही गमले का चुनाव करें, क्योंकि सही गमले के चुनाव से जीरे के पौधों की ग्रोथ तेजी से होगी और अधिक मात्रा में जीरा मिलेगा. इसके लिए आप 10 से 12 इंच का चौड़ा गमला चुनें. जिसके तली में ड्रेनेज होल ठीक से बने हों, ताकि अधिक मात्रा में गमलों में पानी नहीं रहें. अक्सर ज्यादा पानी से पौधा सड़ना शुरु हो जाता है.
गमले की मिट्टी कैसे तैयार करें?
अगर आप किचन गार्डिंग कर रहे हैं तो विशेष रुप से बात का जरुर ख्याल रखें कि गमले की मिट्टी अच्छे से तैयार हो उसमें समय 50% सामान्य दोमट मिट्टी, 30% गोबर की सड़ी खाद और 20% रेत मिलाएं. रेत मिलाने से मिट्टी भुरभुरी बनी रहेगी और पौधा भी तेजी से बढ़ेगा और साथ ही गमलों में पानी भरने की समस्या बिल्कुल भी नहीं आएगी, क्योंकि भुरभुरी मिट्टी से एक्सट्रा पानी तुरंत बाहर निकल जाता है.
पौधों की देखभाल कैसे करें?
जीरा एक ऐसा पौधा है, जिसकों रोजाना कम से कम 5-6 घंटों की धूप की आवश्यकता होती है. इसलिए घर के किचन गार्डन में गमला ऐसी जगह पर रखें जहां धूप आती रहे खुली जगह में और साथ गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी दिखे तो हल्का पानी दें. इसके साथ पौधों में नमी और फंगस से बचाव करने के लिए महीने में एक बार नीम के तेल का हल्का स्प्रे करते रहें.
लेखक: रवीना सिंह