डेयरी बिजनेस किसानों के लिए पहला विकल्प बनता जा रहा है और किसान भाई तेजी से इस करोबार की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि इसमें किसानों को कम मेहनत में अधिक आमदनी हो रही है. ऐसे में किसानों को गाय की बेहतर नस्लों की तलाश है, तो गाय की यह टॉप 3 नस्ल गिर, साहीवाल और थारपारकर किसानों के लिए सही विकल्प साबित हो सकती है.
आइए आगे इस आर्टिकल में जानें गाय की टॉप 3 नस्लों की खासियत के बारे में पूरी जानकारी-
गिर नस्ल
गिर गाय को भारत की सबसे बेहतरीन दुग्ध नस्लों में गिना जाता है. इसका मूल स्थान गुजरात का गिर क्षेत्र है. किसान अगर इस नस्ल का चुनाव करते हैं, तो वह डबल मुनाफा कमा सकते हैं, क्योंकि इस गाय की खासियत है कि यह रोजाना 10 से 15 लीटर तक दूध दे सकती है, जबकि अच्छी देखभाल और पोषण मिलने पर उत्पादन इससे भी अधिक हो सकता है. साथ ही इस नस्ल की पहचान है इसका शरीर मजबूत, कान लंबे और मुड़े हुए होते हैं, जो इसको सबसे अलग दर्शाते है.
साहीवाल नस्ल
साहीवाल गाय किसानों की पहली पसंद है और इसका मूल स्थान पंजाब क्षेत्र है, लेकिन आज यह पूरे देश में लोकप्रिय हो चुकी है. यह नस्ल विशेष रूप से कम चारे में भी अच्छा उत्पादन देने के लिए जानी जाती है. किसान भाई अगर इस गाय को डेयरी बिजनेस के लिए चुनाव करते हैं, तो साहीवाल गाय से रोजाना 8 से 12 लीटर दूध प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही इस नस्ल सबसे बड़ी खासियत है कि यह बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधक क्षमता रखती है, जिससे किसानों का इलाज पर खर्च कम हो जाता है.
थारपारकर नस्ल
थारपारकर गाय राजस्थान के शुष्क और रेगिस्तानी इलाकों में पाई जाती है. यह नस्ल कम पानी और कम चारे में भी जीवित रह सकती है, जो इसे अन्य नस्लों से अलग बनाती है. अगर किसान इस नस्ल को डेयरी व्यवसाय के लिए चुनते हैं, तो 6 से 10 लीटर दूध प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा यह खेतों में हल चलाने जैसे कार्यों में भी उपयोगी होती है. इस नस्ल की सहनशीलता और कम लागत इसे छोटे और सीमांत किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है.
लेखक: रवीना सिंह