मानसून का मौसम सिर्फ खेती के लिए ही नहीं, बल्कि मछली पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए भी सबसे अनुकूल समय माना जाता है. इस मौसम में तालाबों, एनीकट और जलाशयों में पर्याप्त पानी रहता है, जिससे मछली की बढ़वार बहुत तेजी से होती है. यदि किसान या ग्रामीण युवा कम लागत में अतिरिक्त आय का मजबूत साधन तलाश रहे हैं, तो मत्स्य पालन उनके लिए लाभदायक विकल्प बन सकता है.
मानसून क्यों है सबसे बेहतर समय?
बारिश के मौसम में प्राकृतिक जल स्रोत भर जाते हैं और तालाबों में पानी का स्तर स्थिर बना रहता है. पानी का तापमान और वातावरण मछलियों के विकास के लिए अनुकूल होता है. इसी वजह से फिंगरलिंग (मत्स्य बीज) की जीवित रहने की संभावना अधिक रहती है और उनकी वृद्धि भी तेज होती है. यही कारण है कि विशेषज्ञ भी नए मत्स्य पालकों को मानसून के दौरान शुरुआत करने की सलाह देते हैं.
सबसे पहले करें तालाब की तैयारी
मछली पालन की सफलता तालाब की सही तैयारी पर निर्भर करती है. यदि तालाब पहले से मौजूद है तो उसमें जमा गाद, खरपतवार और बेकार जलीय पौधों को पूरी तरह साफ कर देना चाहिए. तालाब में केवल साफ और प्रदूषण मुक्त पानी ही भरना चाहिए. साथ ही पानी का पीएच स्तर और गुणवत्ता की जांच भी आवश्यक है. बारिश के दौरान बाहरी पानी के साथ गंदगी आने की संभावना रहती है, इसलिए पानी के प्रवेश और निकासी की उचित व्यवस्था पहले से कर लेनी चाहिए.
मजबूत मेड़ और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी
मानसून में कई बार लगातार बारिश के कारण तालाब का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है. ऐसे में यदि तालाब की मेड़ कमजोर हो तो पानी के साथ मछलियां भी बाहर निकल सकती हैं. इसलिए तालाब के चारों ओर मजबूत मेड़ बनाएं और निकासी वाले स्थान पर जाली लगाएं. इससे अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाएगा, लेकिन मछलियां सुरक्षित रहेंगी.
प्रमाणित केंद्र से ही खरीदें मत्स्य बीज
मछली पालन में अच्छी गुणवत्ता वाले स्वस्थ फिंगरलिंग का चयन सबसे महत्वपूर्ण होता है. हमेशा सरकारी मान्यता प्राप्त हैचरी या प्रमाणित केंद्र से ही मत्स्य बीज खरीदें. बीज को सीधे तालाब में छोड़ने के बजाय पहले कुछ समय तक उसी पानी में रखें, ताकि उसका तापमान तालाब के पानी के अनुरूप हो जाए. इससे मछलियों को अचानक तापमान बदलने का झटका नहीं लगता और उनकी मृत्यु की संभावना कम हो जाती है.
सही घनत्व में करें बीज का संचयन
कई किसान अधिक उत्पादन की उम्मीद में जरूरत से ज्यादा मत्स्य बीज तालाब में छोड़ देते हैं, लेकिन इससे भोजन और ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार तालाब की क्षमता के अनुसार ही बीज डालना चाहिए. मिश्रित मत्स्य पालन (Composite Fish Culture) अपनाने से तालाब के सभी स्तरों का बेहतर उपयोग होता है और कुल उत्पादन में भी वृद्धि होती है.
सरकारी योजनाओं का भी उठाएं लाभ
केंद्र और राज्य सरकारें मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर सब्सिडी, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती हैं. किसान इन योजनाओं के माध्यम से 40% से 60% तक सब्सिडी भी प्राप्त कर सकते हैं और कम लागत में अपना व्यवसाय शुरू कर अपनी आय में इजाफा कर सकते हैं.
इसके अलावा, मछली पालन से एक एकड़ के तालाब से आप सालाना ₹4 लाख से ₹6 लाख तक का तगड़ी इनकम अर्जित कर सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह