आज के समय में किसानों को खेती करने के अलावा अतिरिक्त कमाई के जरिए की तलाश रहती है, जिससे वह अपनी इनकम में इजाफा कर सकें. ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत की खबर दी है कि अगर किसान डेयरी यूनिट स्थापित करते हैं, तो आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत पा सकते हैं 2 लाख रुपये तक अनुदान का लाभ. यानी की किसान खेती करने के साथ-साथ इस बिजनेस से जुड़कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं. आइए, जानते हैं योजना से जुड़ी पूरी जानकारी.
किस वर्ग के किसानों को कितना मिलेगा अनुदान?
अगर बात करें की किस वर्ग के किसानों को कितनी सब्सिडी मिलेगी, तो बता दें कि इस योजना के तहत उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सामान्य वर्ग के पात्र किसानों को अधिकतम 1.5 लाख रुपये और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के पात्र आवेदकों को अधिकतम 2 लाख रुपये तक अनुदान मिल सकता है. यानी की इस सरकारी योजना से जुड़कर किसान डबल इनकम अर्जित कर सकते हैं.
कितने पशओं पर डेयरी फार्मिंग शुरु करें ?
मध्य प्रदेश सरकार किसानों की आय में इजाफा करने के उद्देश्य के साथ आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत किसान इस सरकारी स्कीम से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा सकें. ऐसे में कुछ किसान और पशुपालकों के मन में यह सवाल आ रहा होगा की कितनी गाय या भैंस पर डेयरी व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं, तो बता दें कि किसान भाई इस सरकारी योजना के तहत कम से कम 5 या उससे अधिक दुधारू पशुओं की यूनिट के लिए योजना में आवेदन कर डेयरी बिजनेस की शुरुआत कर बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं.
क्या है जरुरी दस्तावेज?
अगर आप इस सरकारी योजना में आवेदन करने की सोच रहे हैं, लेकिन इस बात को लेकर मन में सवाल आ रहे हैं कि योजना में आवेदन करने के लिए किन दस्तावेजों का होना आवश्यक है, तो बता दें कि किसान इस सरकारी योजना में आवेदन करने से पहले इन दस्तावेजों को तैयार कर लें, जिनमें है- जमीन के कागज और पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार रखें. अनुसूचित जाति या जनजाति के आवेदकों को जाति प्रमाणपत्र इन सभी दस्तावेजों का होना बेहद ही जरुरी है तभी किसान इस सरकारी स्कीम का लाभ उठा सकते हैं.
कैसे करें योजना में अप्लाई?
अगर आप इस सरकारी योजना में अप्लाई करने की सोच रहे हैं, तो इस स्कीम में आवेदन करने के लिए किसान ऑफ़लाइन आवेदन पत्र पशुपालन विभाग या संबंधित अधिकारी से प्राप्त किया जा सकता है. इसके बाद आवेदन पत्र भरकर ग्राम सभा, जनपद पंचायत या नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा करना होता है, जिसके बाद राजस्व अधिकारी द्वारा भूमि का सत्यापन और पशुचिकित्सा अधिकारी द्वारा जांच के बाद आवेदन ग्राम पंचायत व कृषि स्थायी समिति के अनुमोदन के लिए भेजा जाता है, जिसके बाद ही योजना का लाभ मिलता है.
लेखक: रवीना सिंह