Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! PM Kusum Yojana से मिलेगी सस्ती बिजली, राज्य सरकार करेंगे प्रति मेगावाट 45 लाख रुपए तक की मदद! जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 26 July, 2021 4:28 PM IST

रासायनिक खेती से न सिर्फ इंसान की सेहत ख़राब हो रही है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी घट रही है. ऐसे में आज किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करना बेहद जरुरी है. 

जिस तरह से महामारी के इस दौर में ऑर्गनिक उत्पादों की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा है, उसे देखते हुए आना वाला समय ऑर्गनिक खेती का ही होगा. ये कहना है युवा फार्मर डॉ. रिज़वान खान, जो कि मेरठ से 5 किलोमीटर दूर किना नगर गांव से ताल्लुक रखते हैं.

वे पेशे से डॉक्टर हैं और मेरठ के हॉस्पिटल में इंटर्नशिप कर रहे हैं. एक साल पहले उन्होंने वर्मीकम्पोस्ट का बिजनेस शुरू किया. इस बिजनेस से आज उनका सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए का है.

केंचुए की ऑस्ट्रेलियन ब्रीड (Australian breed of earthworm)

कृषि जागरण से बातचीत करते हुए डॉ. रिज़वान ने बताया कि हम लोग केंचुए की ऑस्ट्रेलियन ब्रीड Eisenia Fetida के जरिए वर्मीकम्पोस्ट तैयार करते हैं. सामान्य केंचुए मिट्टी खाते हैं, जबकि केंचुए की यह नस्ल केवल गोबर खाती है. जो देखने में लाल रंग का होता है. जिससे उच्च गुणवत्ता का वर्मी कम्पोस्ट तैयार होता है.
BUMS (बैचलर ऑफ़ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी) की डिग्री ले चुके डॉ. रिज़वान का कहना है कि पिछले एक डेढ़ साल से वे  यह बिजनेस कर रहे हैं. उन्होंने आयुर्वेदिक मेडिसिन में पढ़ाई की है. आयुर्वेद के महत्त्व को समझते हुए ही उन्होंने यह बिजनेस शुरू किया है. 

दरअसल, एक डॉक्टर का काम होता है लोगों की सेहत को सुधारना. ऐसे में वर्मी कम्पोस्ट से मिट्टी की सेहत सुधारने में मददगार है. यदि मिट्टी की सेहत सही होगी तो लोगों जैविक खानपान मिलेगा और इससे उनकी सेहत अपने आप ठीक हो जाएगी. 

कैसे तैयार करते हैं वर्मीकम्पोस्ट? (How to prepare Vermicompost?)

वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने के लिए वे 30X4 का बेड तैयार करते हैं. उन्होंने 50 बेड से इस बिजनेस को शुरू किया था. आज उनके पास करीब 100 बेड हैं. प्रत्येक बेड में 15 क्विंटल गोबर लगता है, जिससे तक़रीबन 6 क्विंटल खाद का उत्पादन होता है.

वे गोबर पशुपालकों से खरीदते हैं. बेड बनाकर वे इसमें लगभग 30 किलो केंचुए डालते हैं, जिससे 15-20 दिनों बाद वर्मीकम्पोस्ट की पहली लेयर तैयार हो जाती है. दो से ढाई महीने बाद जब अंतिम लेयर बच जाती है तथा केंचुए बड़े हो जाते हैं तब वे इन केंचुओं का प्रयोग दूसरी बेड तैयार करने में करते हैं.

40 लाख का टर्नओवर (40 lacs turnover)

अपनी कमाई के बारे में डॉ. रिज़वान का कहना है कि यह किसानों के लिए फायदेमंद बिजनेस है. यदि 100 बेड के साथ बिजनेस शुरू किया जाए तो सालाना 40 से 45 लाख रुपए का टर्नओवर हो जाता है. यह एक फायदेमंद बिजनेस है. आज वे अपने आम के बगीचों और अन्य फसलों के लिए वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करते हैं. इससे बेहतर उत्पादन लेने में मदद मिलती है.

English Summary: started vermi compost business after doctor's studies, today annual turnover of 40 lakhs
Published on: 26 July 2021, 04:34 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now