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Updated on: 28 October, 2026 12:00 AM IST
गाय-भैंस का बीमा कराने पर सरकार दे रही 85% तक सब्सिडी (Image Source-AI generate)

अगर आप पशुपालक या किसान है और डेयरी बिजनेस करते हैं और पशु बीमा कराने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद ही खास है, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि गाय या भैंस की अचानक मृत्यु होने पर पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में यूपी सरकार की मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना बेहद ही लाभकारी साबित हो सकती है, जिसके तहत पात्र पशुओं का बीमा कराने पर सरकार की ओर से प्रीमियम पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी का फायदा मिलेगा और इसमें पशुपालकों को सिर्फ  प्रीमियम का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा देना होगा. आइए जानते हैं कि इस योजना का लाभ कैसे लिया जा सकता है और बीमा कराने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

क्या है मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना?

पशुधन बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को पशुओं की मृत्यु और पॉलिसी में शामिल अन्य जोखिमों से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद करना है. छोटे और सीमांत किसान अक्सर अपनी बचत लगाकर गाय-भैंस खरीदते हैं. ऐसे में यदि किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण पशु की मृत्यु हो जाती है, तो उनकी आमदनी प्रभावित होने के साथ पशु खरीदने में लगाया गया पैसा भी डूब सकता है.

इस समस्या को कम करने के लिए बीमा की सुविधा दी जाती है. उत्तर प्रदेश की संबंधित योजना के अंतर्गत पात्रता और निर्धारित नियमों के अनुसार गाय, भैंस, बकरी, भेड़ तथा अन्य निर्धारित पशुओं का बीमा कराया जा सकता है. सरकार की ओर से प्रीमियम पर सब्सिडी मिलने से पशुपालकों के लिए बीमा कराना आसान हो सकता है.

गाय-भैंस के बीमा के लिए कितना देना होगा पैसा?

योजना से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक साल के बीमा के लिए पशुपालक का अंश इस प्रकार बताया गया है-

  • दुधारू गाय: लगभग 133 रुपये.

  • भैंस: लगभग 177 रुपये.

  • सरकारी सहायता: पात्रता और लागू नियमों के अनुसार प्रीमियम पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी.

इसके अलावा, बिना पूर्ण स्थायी दिव्यांगता कवर के वार्षिक प्रीमियम दर 2.95 प्रतिशत और इस कवर के साथ 3.95 प्रतिशत बताई गई है. बीमा कराने से पहले नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय या जिला पशुपालन विभाग से नवीनतम दरों की पुष्टि जरूर करें.

पशु की मृत्यु होने पर कैसे मिलेगा क्लेम?

बीमित पशु की मृत्यु होने पर पशुपालक पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमा क्लेम के लिए आवेदन कर सकता है. इसके लिए संबंधित पशु चिकित्सालय और बीमा कंपनी को जल्द सूचना देना जरूरी है. पशु की मृत्यु से संबंधित पशु चिकित्सक का प्रमाणपत्र, बीमा पॉलिसी, पहचान टैग नंबर और अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे जा सकते हैं. उपलब्ध योजना संबंधी जानकारी में जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 21 दिनों के भीतर दावा राशि बैंक खाते में भेजने का प्रावधान बताया गया है. हालांकि, भुगतान दस्तावेजों की जांच, क्लेम की स्वीकृति और पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करेगा.

यदि पशु पूर्ण स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो जाता है और पॉलिसी में इसका कवर शामिल है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान संभव बताया गया है.

एक परिवार कितने पशुओं का बीमा करा सकता है?

योजना की उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पशुओं की श्रेणी के अनुसार प्रति परिवार बीमा इकाइयों की सीमा तय की गई है.

  • गाय-भैंस जैसे बड़े पशु: अधिकतम 10 पशु इकाइयां.

  • सूकर: अधिकतम 50 पशु इकाइयां.

  • बकरी और भेड़: अधिकतम 100 पशु इकाइयां.

योजना में आवेदन कैसे करें?

पशुधन बीमा कराने के इच्छुक पशुपालक अपने नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय या जिला पशुपालन विभाग से संपर्क कर सकते हैं. वहां योजना की पात्रता, उपलब्ध बीमा कवर, प्रीमियम और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर आप बेहद ही आसानी से योजना में अप्लाई कर इसका लाभ उठा सकते हैं, जिससे पशुपालकों और किसानों को कुछ आर्थिक सहायता मिल सकती है.

लेखक: रवीना सिंह

English Summary: Pashudhan Bima Yojana Up Government Give 85 Percent Subsidy Cow Buffalo Insurance Premium Apply
Published on: 28 October 2026, 02:47 IST

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