Success Story: जायटॉनिक टेक्नॉलोजी ने बदली खेती की तस्वीर, किसान की आय हुई दोगुनी, जानें कैसे? Success Story: जायटॉनिक टेक्नोलॉजी से किसान कैसे बढ़ा रहे हैं उत्पादन और घटा रहे हैं खेती की लागत? बदलते मौसम में बकरी पालन: पोषण एवं चारा प्रबंधन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 21 July, 2026 9:26 AM IST
लखीमपुर खीरी के प्रगतिशील किसान ओमकार सिंह

देशभर में खेती की बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरक क्षमता और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच किसान अब ऐसी तकनीकों की तलाश कर रहे हैं, जो कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखें. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के बसलीपुर गांव के प्रगतिशील किसान ओमकार सिंह ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने वर्षों तक रासायनिक खेती करने के बाद अब जैविक खेती की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है.

करीब 24-25 वर्षों से खेती कर रहे ओमकार सिंह का मानना है कि केवल अधिक खाद और दवाइयों से खेती लाभकारी नहीं बनती, बल्कि मिट्टी को जीवंत बनाना भी उतना ही जरूरी है. यही सोच उन्हें जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों तक लेकर गई. आज उनका अनुभव बताता है कि सही तकनीक अपनाकर खेती की लागत घटाई जा सकती है, उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और मिट्टी को लंबे समय तक उपजाऊ बनाए रखा जा सकता है. ऐसे में आइए प्रगतिशील ओमकार सिंह की सफलता की कहानी के बारे में विस्तार से जानते हैं-

जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पाद

खेती विरासत में मिली, लेकिन सोच बदली

लखीमपुर खीरी जिले के बसलीपुर गांव के निवासी ओमकार सिंह केवल एक प्रगतिशील किसान ही नहीं, बल्कि अपने गांव के ग्राम प्रधान, बिजुआ प्रधान संघ के अध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष भी हैं.

उनका परिवार पीढ़ियों से खेती करता आ रहा है. उनके पिता और दादा भी किसान थे. लगभग 33 एकड़ कृषि भूमि पर वे गन्ना, धान, गेहूं, मटर और आलू जैसी प्रमुख फसलों की खेती करते हैं.

करीब 25 वर्षों के कृषि अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि खेती में केवल मेहनत ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि समय के अनुसार तकनीक बदलना भी आवश्यक होता है.

जब बढ़ने लगी खेती की लागत

ओमकार सिंह बताते हैं कि पहले उनकी पूरी खेती रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर आधारित थी. हर वर्ष उर्वरकों, कीटनाशकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर खर्च बढ़ता जा रहा था. इसके बावजूद फसलों में रोगों का दबाव कम नहीं हो रहा था.

मिट्टी की उर्वरता भी धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही थी. वे कहते हैं, "हम जितना अधिक रासायनिक खाद डालते थे, उतनी ही ज्यादा अगली बार जरूरत पड़ती थी. लागत बढ़ रही थी, लेकिन संतोषजनक परिणाम नहीं मिल रहे थे."

यहीं से उन्होंने खेती का तरीका बदलने का निर्णय लिया.

कई जैविक उत्पाद आजमाए, लेकिन संतोष नहीं मिला

जैविक खेती की ओर बढ़ने के लिए उन्होंने बाजार में उपलब्ध कई जैविक उत्पादों का प्रयोग किया. करीब तीन-चार वर्षों तक अलग-अलग उत्पादों का उपयोग करने के बावजूद उन्हें वह परिणाम नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी. इसी दौरान उन्हें जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों के बारे में जानकारी मिली.

उन्होंने सबसे पहले जायटॉनिक किट, जायटॉनिक-एम तथा जायटॉनिक सुरक्षा स्प्रे का प्रयोग किया. यहीं से उनकी खेती में वास्तविक बदलाव दिखाई देना शुरू हुआ.

आखिर क्यों किसानों का भरोसा जीत रही है जायटॉनिक टेक्नॉलोजी?

ओमकार सिंह बताते हैं कि उन्होंने इन उत्पादों का उपयोग सबसे पहले मटर की फसल में किया. परिणाम उनकी उम्मीद से कहीं बेहतर रहे. फसल की बढ़वार अधिक समय तक बनी रही. पौधों की हरियाली लंबे समय तक दिखाई दी. फसल का विकास संतुलित रहा. सबसे बड़ी बात यह रही कि बार-बार दवाइयों का प्रयोग करने की आवश्यकता पहले की तुलना में कम महसूस हुई.

मिट्टी में आया सकारात्मक बदलाव

ओमकार सिंह के अनुसार खेती की असली ताकत केवल फसल नहीं बल्कि मिट्टी होती है. वे बताते हैं कि जब मटर की तुड़ाई चल रही थी, तब खेत में काम करने वाले मजदूरों ने स्वयं कहा कि जिस खेत में जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों का प्रयोग किया गया था, वहां की मिट्टी पहले की तुलना में अधिक मुलायम और भुरभुरी महसूस हो रही थी.

उनका मानना है कि स्वस्थ मिट्टी ही भविष्य की टिकाऊ खेती की सबसे बड़ी पूंजी है.

उत्पादन में भी मिला बेहतर परिणाम

ओमकार सिंह के अनुभव के अनुसार जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों के उपयोग से केवल मिट्टी ही नहीं सुधरी बल्कि उत्पादन में भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली. वे बताते हैं कि फसलों में पौधों की बढ़वार अच्छी रही, हरियाली लंबे समय तक बनी रही तथा फसल अधिक स्वस्थ दिखाई दी. इसी कारण अब वे लगभग हर प्रमुख फसल में इन उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं.

रासायनिक खेती से धीरे-धीरे दूरी

ओमकार सिंह पूरी तरह रासायनिक खेती छोड़ने की बात नहीं करते. वे संतुलित खेती के पक्षधर हैं. उनका कहना है कि जहां जैविक विकल्प उपलब्ध हैं, वहां रासायनिक उत्पादों का उपयोग कम से कम करना चाहिए.

अब वे केवल आवश्यकता पड़ने पर ही रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं. बाकी अधिकतम प्रयास जैविक उत्पादों को अपनाने का रहता है.

गोबर की खाद को भी बनाया अधिक प्रभावी

ओमकार सिंह केवल तैयार उत्पादों तक सीमित नहीं रहे. उन्होंने अपने घर पर डी-कंपोजर और केंचुआ खाद तैयार करने की शुरुआत भी की. बाद में उन्हें जायटॉनिक गोधन के बारे में जानकारी मिली.

उन्होंने इसका उपयोग गोबर की खाद तैयार करने में किया. उनके अनुसार जायटॉनिक गोधन को पानी में घोलकर गोबर में अच्छी तरह मिलाया जाता है. करीब तीन महीने बाद वही गोबर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदल जाता है. इस खाद का उपयोग खेतों में करने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और फसलों को संतुलित पोषण मिलता है.

गांव के दूसरे किसान भी अपनाने लगे तकनीक

किसी भी तकनीक की सबसे बड़ी सफलता तब मानी जाती है, जब दूसरे किसान भी उसे अपनाने लगें. ओमकार सिंह बताते हैं कि पहले उन्होंने स्वयं इन उत्पादों का प्रयोग किया. जब उन्हें सकारात्मक परिणाम मिले तो उन्होंने अपने गांव के अन्य किसानों को भी इसके बारे में जानकारी दी. आज बसलीपुर गांव के कई किसान भी जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं.

आखिर क्यों जायटॉनिक टेक्नॉलोजी अपनाने वाले किसान आगे बढ़ रहे हैं?

ओमकार सिंह के अनुभव के आधार पर इसके प्रमुख कारण हैं-

  • मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार.

  • फसल की हरियाली लंबे समय तक बनी रहना.

  • पौधों की बेहतर बढ़वार.

  • उत्पादन में सकारात्मक वृद्धि.

  • गोबर की खाद की गुणवत्ता में सुधार.

  • जैविक खेती की ओर आसान संक्रमण.

  • रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता में कमी.

  • खेती की दीर्घकालिक स्थिरता.

उनका मानना है कि यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो किसान की आय भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी.

किसानों के नाम उनका संदेश

ओमकार सिंह कहते हैं, "आज नहीं तो कल हमें जैविक खेती की ओर बढ़ना ही होगा. लगातार रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरता कम होती जा रही है. यदि हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि छोड़नी है, तो जैविक उत्पादों का अधिक से अधिक उपयोग करना होगा."

वे किसानों से आग्रह करते हैं कि वे आधुनिक जैविक तकनीकों को समझें, छोटे स्तर पर प्रयोग करें और परिणाम देखकर धीरे-धीरे उन्हें अपनाएं.

नोट: यह सफलता की कहानी किसान ओमकार सिंह द्वारा साझा किए गए व्यक्तिगत अनुभवों और दावों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, मिट्टी, मौसम, फसल प्रबंधन तथा कृषि परिस्थितियों के अनुसार परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं.

English Summary: Zytonic Technology benefits for farmers soil health crop yield reduced farming costs
Published on: 21 July 2026, 09:32 AM IST

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