Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! STIHL मल्टी-पर्पस स्टेशनेरी इंजन: आधुनिक कृषि और उद्योग के लिए क्रांतिकारी समाधान STIHL मल्टी-पर्पस स्टेशनेरी इंजन: आधुनिक कृषि और उद्योग के लिए क्रांतिकारी समाधान Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 26 December, 2020 3:57 PM IST
Turmeric Cultivation
Turmeric Cultivation

देश में कई ऐसे किसान हैं, जो कृषि क्षेत्र में नई तकनीक का उपयोग करके सफल किसान की श्रेणी में अपना नाम दर्ज कर रहे हैं. इस श्रेणी में बिहार के औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड के कई प्रगतिशील किसानों का नाम भी शामिल है. ये किसान परंपरागत खेती की लीक से अलग हटकर हल्दी समेत अन्य मसालों की खेती कर रहे हैं.

किसानों का दावा यह है कि इससे उन्हें कम लागत में ज्यादा मुनाफा मिल रहा है, साथ ही सरकार द्वारा सब्सिडी भी मिल रही है. आइए आपको इन प्रगतिशील किसानों के बारे में बताते हैं.

गेहूं और धान से हटकर कर रहे हल्दी की खेती

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो औरंगाबाद जिले के हसपुरा प्रखंड के हैबसपुर, धमनी, खुटहन, इटवां आदि गांव के मंझोले किसान गेहूं और धान की खेती से अलग हटकर हल्दी की खेती कर रहे हैं. इन किसानों के पास कम जमीन है फिर भी वह हल्दी खेती से काफी अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. किसानों का कहना है कि हल्दी की खेती में सबसे बड़ी बात यह है कि इसका नकद बाजार है और किसानों के घर से ही व्यवसायीअच्छी कीमत पर उपज खरीद लेते हैं. किसान बाजार में जाकर भी अपनी उपज को आसानी से बेच सकते हैं.

दूसरी फसल को लगाकर भी कमाया मुनाफा

किसानों की माने तो हल्दी की खेती (Turmeric Cultivation) के अलावा दूसरी फसल को लगाकर भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. बता दें कि हल्दी और अन्य मसालों की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपए की लागत लगती है. इस पर 50 प्रतिशत सब्सिडी मिल जाती है. यानी सरकार द्वारा किसानों को 15 हजार रुपए की राशि दी जाती है. इस तरह हल्दी की खेती ज्यादा लाभकारी होती है. इसकी खेती करने के लिए अन्य किसानों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है.

अगर किसान केंद्र और राज्य सरकार की कृषि कल्याणकारी योजनाओं की मदद लेकर परंपरागत खेती से हल्दी की खेती करते हैं, तो इससे उन्हें अच्छी आमदनी मिलेगी, साथ ही मसालों के उत्पादन में राज्य की आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी.

English Summary: The farmers of Aurangabad are making good profits by cultivating spices instead of traditional farming
Published on: 26 December 2020, 04:01 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now