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Updated on: 3 January, 2022 4:52 PM IST
Waste management of poultry farming

पोल्ट्री फार्मिंग (Poultry Farming) के वेस्ट मैनेजमेंट (Waste Management of Poultry Farming) को लेकर केरल का कन्नूर (Kannur of Kerala) देश के लिए एक उदहारण पेश कर रहा है. बता दें कि कन्नूर जनवरी 2022 के अंत तक देश का पहला स्लॉटर हाउस का वेस्ट मैनेजमेंट (Slaughter House Waste Management) करने वाला जिला बनकर एक मिसाल पेश करने जा रहा है. यह सुचित्वा मिशन (Suchitva Mission) और हरिथा केरलम मिशन (Haritha Keralam Mission) के संयुक्त प्रयासों से इसका नेतृत्व किया जा रहा है.

क्या है लक्ष्य (Goal)

इसका उद्देश्य बूचड़ख़ाना/कसाईखाना (Slaughterhouse) के कचरे के अवैध डंपिंग से लोगों के सामने आने वाली समस्या को समाप्त करना है. विक्रेताओं ने इस कदम की प्रसंशा की है और पोल्ट्री कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण (Scientific processing) के पक्ष में हैं.

पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया गया कदम (Steps taken for environmental protection)

विशेष रूप से, यह पहल तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद अब शुरू होने जा रही है. इस बीच पुलिस ने ऐसे कई लोगों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने अनुचित तरीके से कचरा फेंका था. जिससे आसपास की स्वच्छता और सफाई को खतरा था. बता दें कि कचरा डंप करने से पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है. इसी के चलते यह कदम उठाया जा गया है.

क्या होगा प्रोसेस (What will be the process)

इस पहल को एक प्रवासी समुदाय, कन्नूर वेंचर और विराड (Overseas Community, Kannur Venture and Virad) नाम की एक कंपनी का समर्थन प्राप्त है. चिकन स्टालों से कचरे को एकत्र किया जाएगा और किराए के संयंत्रों के माध्यम से वैज्ञानिक रूप से संसाधित किया जाएगा. वहीं, आउटपुट का उपयोग मछली और कुत्तों के लिए चारा बनाने के लिए किया जा सकता है.

लाइसेंस (License)

विशेष रूप से चिकन स्टालों के संचालन के लिए लाइसेंस को अनिवार्य कर दिया गया था. लाइसेंस के लिए बायोगैस प्लांट या प्रोसेसिंग प्लांट के साथ अनुबंध या रेंटर प्लांट के साथ अनुबंध अनिवार्य किया गया है.

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अपशिष्ट प्रबंधन विधि (Waste management method)

कसाईखाने के कचरे को 1600 सी के नीचे पांच से छह घंटे के लिए पकाया जाता है और फिर यह पूरा ड्राई हो जाता है. इसके रेंडरिंग प्लांट के रूप में भी जाना जाता है इसमें निम्नलिखित उपकरण होते हैं जैसे:

  • पाचक (Digestive)

  • अपशिष्ट प्रबंधन उपकरण (Waste management equipment)

  • वैक्यूम उत्पादन इकाई (Vacuum Production Unit)

  • भाप पैदा करने वाली इकाई (Steam generating unit)

  • संघनक प्रणाली (Condensing system)

  • चिलर (Chiller)

इन सभी के उपयोग से कसाईखाने के वेस्ट का मैनेजमेंट किया जा सकता है ताकि पर्यावरण को किसी भी तरह का कोई भी नुकसान ना हो.

English Summary: Simple way to do waste management of poultry farming
Published on: 03 January 2022, 04:56 PM IST

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