कृषि कानूनों के आने के बाद से किसानों के जेहन में इस बात को लेकर चिंता चरम पर है कि कहीं इससे एमएसपी को हमेशा के लिए खत्म न कर दिया जाए, लिहाजा इस बात से संशकित किसान विगत कई माह से सड़कों पर आंदोलनरत हैं. वे सरकार से इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, सरकार किसानों के इस संदेह को मद्देनजर रखते हुए इस बात को कई मौकों पर स्पष्ट कर चुकी है कि इन कानूनों से एमएसपी पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. एमएसपी जस की तस जारी रहेगी. वहीं, विपक्षी दल भी लगातार किसानों के आंदोलन को यह कहकर हवा दे रही है कि इन कानूनों से उनका एमएसपी खत्म हो जाएगा, लेकिन सरकार का बार-बार यही कहना है कि इससे एमएसपी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
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वहीं, अब एमएसपी पर छिड़ी इन सभी बहसों के बीच केंद्र सरकार एमएसपी पर गेहूं की फसल की ताबड़तोड़ खरीद करने जा रही है. बताया जा रहा है कि रबी मार्केटिंग सीजन में सरकार किसानों से 39 फीसद गेहूं एमएसपी पर खरीदने जा रही है.
भरमाने वालों मिला मुंहतोड़ जवाब
सरकार के मुताबिक, वे इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं की फसल इसलिए खऱीदने जा रही, ताकि उन सभी लोगों को माकूल जवाब दिया जा सके, जो किसानों को यह कर भरमा रहे हैं कि इन कृषि कानूनों से एमएसपी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाएगा. बता दें कि सरकार ने ऐसे सभी भरमाने वाले लोगों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए आगामी अप्रैल माह में 427.36 लाख टन गेहूं की खऱीद का लक्ष्य निर्धारित किया है. खरीद 1975 रूपए प्रति क्विंटल की दर पर होगी. इस साल 10.92 टन गेहूं के फसल की उत्पादन लागत निर्धारित की गई है. इससे पूर्व 2020-21 में सरकार ने 389.92 लाख मिट्रिक टन गेहूं की फसल निर्धारित की थी.
यहां जानें कहां से कितना खरीदा जाएगा
इसके साथ ही हम आपको बताते चले कि केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों से गेहूं की खरीद करने जा रही है. सरकार ने इस साल मध्यप्रदेश से 135 लाख टन गेहूं खरीदा है. पंजाब से 130 लाख टन गेहूं खऱीदा है. हरियाणा से 80 लाख टन, उत्तर प्रदेश से 55 लाख टन, राजस्थान से 22 लाख टन फसल की खऱीद करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
English Summary: Govt is planing to purchase the Wheat on MSP from farmerPublished on: 03 March 2021, 06:27 PM ISTMore on this section
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