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Updated on: 28 January, 2021 12:00 AM IST

क्या आपने कभी किसी ऐसे फूल के बारे में सुना है, जो 12 साल में एक बार खिलता है? अगर नहीं तो आज हम आपको उस फूल के बारे में बताने जा रहे हैं. इस फूल का नाम है नील कुरुंजी, जो भारत में मुख्य रूप से उत्तराखंड के पहाड़ियों और केरल के जंगलों में पाई जाती है. 12 साल में एक बार उगने वाले ये फूल नीले रंग के होते हैं, जो पहाड़ों की खूबसूरती को कई गुणा बढ़ा देते हैं.

पीएम मोदी भी हो चुके हैं प्रभावित

इस फूल की विशेषता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, कि साल 2018 में खुद पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इसका जिक्र किया था. केरल की एक पर्वत पर ये फूल इतनी अधिक मात्रा में होते हैं कि उस पर्वत श्रृखंला का नाम ही नीलगिरी हो गया है. इस फूल का विस्तार इतनी तेजी से होता है कि ऊंची पहाड़ियों का रंग दूर से नीला दिखाई पड़ता है.

अगस्त से अक्टूबर तक उगते हैं फूल

यह फूल अगस्त से लेकर अक्टूबर माह के मध्य पहाड़ों पर खिलते हैं. इसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों की तादाद में सैलानी केरल और उत्तराखंड आते हैं.

भारत में 150 से अधिक प्रजातियां

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस फूल का संबंध वनस्पतियों से है और पूरी दुनिया में इसकी अब तक 200 प्रजातियों का पता लगाया जा चुका है, जिसमें 150 से अधिक प्रजातियां तो भारत में ही है. हालांकि नील कुरूंजी की सभी प्रजातियां 12 साल में एक बार नहीं खिलती, कुछ तो हर साल खिलती है.

केरल के नेशनल पार्क में है नील कुरिंजी

केरल की सबसे ऊंची चोटी पर एक क्षेत्र है में इराविकुलम नाम का राष्ट्रीय पार्क है, जहां नील कुरिंजी को विशेष संरक्षण में रखा गया है. इस फूल की लंबाई आम तौर पर 30 से 60 सेंटीमीटर होती है. चांदनी रात में इन फूलों के कारण पहाड़ किसी फिल्मी दुनिया की तरह चमकीले नीले बैंगनी रंग के दिखाई देते हैं.

फूलों के अस्तित्व पर खतरा

भारत में नील कुरिंजी आज बहुत तेजी से विलुप्ति की कगार पर है. इनकी अधिकतर प्रजातियां लगभग समाप्त हो गई है और बाकियों पर खतरा मंडरा रहा है. विशेषज्ञों की माने तो जलवायु परिवर्तन और लगातार जंगल क्षेत्रों के कम होन के कारण इन फूलों का अस्तित्व आज मुसिबत में है. 

English Summary: Neelakurinji bloom once in twelve year know more about Blooming month and specialties
Published on: 28 January 2021, 12:16 IST

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