Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! PM Kusum Yojana से मिलेगी सस्ती बिजली, राज्य सरकार करेंगे प्रति मेगावाट 45 लाख रुपए तक की मदद! जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 9 July, 2022 3:23 PM IST
फल पकाने के तरीके

हमारे देश में फलों को कई तरीकों से पकाया जाता है. आपको बता दें कि फलों को पकाने की लिए कई तरह की आधुनिक तकनीकें भी कारगर साबित हुई हैं, लेकिन फलों को पकाने के लिए हमेशा से पुरानी घरेलू तकनीक ही चर्चा में रहती हैं. तो आज हम अपने इस लेख में आपको पारंपरिक और राइपनिंग तरीके से फल पकाने के बारे में बतायेंगे. तो आइये जानते हैं इसके बारे में...

  • प्राचीन काल में फलों को पकाने के लिए घरेलू और पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था. जोकि अभी भी ज्यादातर लोग करते ही हैं. कुछ व्यापारी पैरावट में फलों को दबाकर रखते हैं. ये तरीका बहुत सुरक्षित और कम खर्चीला होता है, लेकिन इसमें समय ज्यादा लगता है.

  •  इसके अलावा पकाने के लिए फल को बोरे, पैरा और भूसे में दबाकर रखने से भी फल समय से पहले पक जाता है या फिर फल को कागज में लपेटकर रखने से भी फल अच्छे से पक जाता है.

राइपनिंग तकनीक  (Ripening Technique)    

यह एक आधुनिक तकनीक है जिससे फल समय से पहले पक जाते हैं. इसका ज्यादातर उपयोग कई बड़े फल विक्रेता करते हैं. इस तकनीक से फल पकाने के लिए छोटे-छोटे चैंबर वाला कोल्ड स्टोरेज बनाया जाता है. इस चैंबर में एथिलीन गैस को छोड़ दिया जाता है. इससे फल जल्दी पकने लगते हैं. इससे किसी प्रकार का फलों को खतरा नहीं होता. सरकार द्वारा इसपर किसानों को लगभग 35 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जाती है. इस तकनीक को आम, पपीता और केला पकाने में ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.

ये भी पढ़ें: Raw Banana Recipe: केला पकाने का आसान नुस्खा !

कितने समय में पकने लगते हैं फल (How long do fruits take to ripen)

आपको बता दें कि इन तरीकों से फल 4 से 5 दिनों में पककर तैयार हो जाते हैं और इनकी क्वालिटी भी अच्छी रहती है.

English Summary: Fruit Ripening: Safe and easy way to artificially ripen fruits, must try
Published on: 09 July 2022, 04:05 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now