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बदलते मौसम ने आलू के फसल को किया बर्बाद तो वैज्ञानिकों ने फसल प्रबंधन की दी सलाह, जानने के लिए पढ़ें पूरी ख़बर

मौसम में हुए बदलाव ने जहाँ कई फसलों की जान बचाई, तो वहीँ कई फसलों को इसका नुकसान भी भुगतना पड़ा है. मौसम का यह बदलाव अलग–अलग फसलों पर अलग प्रभाव दिखता नजर आ रहा है. किसी फसल के उत्पादन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है तो कहीं यह फसलों में अन्य प्रकार के रोग पैदा करता है.

स्वाति राव
Agriculture
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मौसम में हुए बदलाव ने जहाँ कई फसलों की जान बचाई, तो वहीँ कई फसलों को इसका नुकसान भी भुगतना पड़ा है. मौसम का यह बदलाव अलग–अलग फसलों पर अलग प्रभाव दिखता नजर आ रहा है. किसी फसल के उत्पादन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है तो कहीं यह फसलों में अन्य प्रकार के रोग पैदा करता है.

ऐसी ही एक ख़बर उत्तर प्रदेश के कई जिलों से आई है. जहाँ मौसम का तापमान गिरने से आलू की फसल (Potato Crop) लगभग बर्बाद होती दिखाई दे रही है. आलू के उत्पादन के लिए मौसम का यह बदलाव अभिशाप बन गया है. तो वहीँ सरसों के फसल की अगर बात करें तो गिरता तापमान वरदान साबित हो रहा है. ऐसे में वैज्ञनिकों ने फसल प्रवंधन के लिए जरुरी सलाह किसानों के लिए जारी की है.

फसल प्रबंधन के लिए वैज्ञानिकों ने दी सलाह (Scientific Advice Given For Crop Management)

इस बदलते मौसम की वजह से पिछले वर्ष की तुलना में इस बार आलू का उत्पदान कम हुआ है. ऐसे में कम उत्पादन की वजह से आलू का दाम बढ़ सकता है. जिससे आम लोगों की जेब पर भी भार पड़ेगा. ऐसे में उतर प्रदेश में स्थित कृषि कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष ने किसानों को फसल प्रवंधन (Crop Management ) के लिए सलाह जारी की है.

  • कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि सर्दी के मौसम में आलू की फसल में झुलसा रोग (Scorch Disease ) का प्रकोप बढ़ता जाता है, जो आलू फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है. इस रोग की  वजह से फसल में कई तरह लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे पत्तियों पर छोटे हल्के पीले हरे अनियमित आकार के धब्बे दिखाई देने लगते हैं, धब्बे बहुत ही शीघ्र बढ़ने लगते हैं,  इन धब्बे की वजह से इसके चारों ओर अंगूठी नुमा सफेद फफूंदी जमा हो जाती है. ऐसे में किसान भाइयों इस रोग से बचाव करने के लिए आलू की फसलों पर कापर आक्सिक्लोराइड को दो किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव कर दें.

  • इसके अलावा यदि फसल पर अधिक प्रकोप नज़र आ रहा है तो फफूंदी नाशक डाइथेन एम 45 की दो ग्राम दवा को प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए. इसके अलावा कार्बेंडाजिम नामक फफूंदी नाशक की तीन ग्राम मात्रा को एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर के छिड़काव करें. यह छिड़काव 10-15 दिन के अंतराल पर दो बार करना चाहिए.

  • फफूंदी नाशक का छिड़काव करते समय यह अवश्य ध्यान रखें कि खेत बहुत गिला नहीं होना चाहिए और अच्छी धूप निकली हुई हो उस समय छिड़काव लाभदायक होता है.

  • ध्यान रखें फफूंदी नाशक का घोल अधिक समय तक बनाकर नहीं रखना चाहिए ताजा घोल बनाकर छिड़काव करें .

  • वैज्ञानिक का कहना है कि यह सर्दी का मौसम सरसों की फसल के लिय काफी अच्छा है लेकिन यादी ऐसे ही बढ़ता रहा तो  इसमें भी मांहू नाम का रोग लगने  की सम्भावना हो सकती है.

  • तो किसानों को जैसे ही खेत में मांहू दिखाई दे इमिडाक्लोप्रिड नामक कीटनाशक की 0.5 मात्रा को एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव लाभकारी होगा. उक्त रसायन न उपलब्ध होने की दशा में क्लोरोपारीफास 20 ईसी एक मिली को एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए.

English Summary: change in weather has become a boon for mustard and fatal for potatoes, scientist advised Published on: 20 January 2022, 12:40 PM IST

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