टिकाऊ कृषि के माध्यम से जायडेक्स कर रहा एक हरित भविष्य का निर्माण बाढ़ से फसल नुकसान पर किसानों को मिलेगा ₹22,500 प्रति हेक्टेयर तक मुआवजा, 5 सितंबर 2025 तक करें आवेदन बिना गारंटी के शुरू करें बिजनेस, सरकार दे रही है ₹20 लाख तक का लोन किसानों को बड़ी राहत! अब ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर सिस्टम पर मिलेगी 80% सब्सिडी, ऐसे उठाएं योजना का लाभ जायटॉनिक नीम: फसलों में कीट नियंत्रण का एक प्राकृतिक और टिकाऊ समाधान Student Credit Card Yojana 2025: इन छात्रों को मिलेगा 4 लाख रुपये तक का एजुकेशन लोन, ऐसे करें आवेदन Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 13 January, 2021 6:25 PM IST
गाय के गोबर से करशी

मेरठ के फफूंडा गाँव की महिलाएं आज सभी के लिए प्रेरणा की श्रोत बनी हुई हैं. उनकी कामयाबी की कहानी से लोग जान सकते हैं कि कैसे घर बैठे भी मुनाफा कमाया जा सकता है. दरअसल यहां की ग्रामीण महिलाओं ने गाय के गोबर से ऐसा उत्पाद बनाया है, जो पूरे देश में प्रसिद्ध हो गया है. चलिए आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.

इन राज्यों में बिक रहा है माल

यहां की महिलाओं ने गाय के गोबर से करशी बनाने का शुरू किया है. वो न सिर्फ करशी बनाती है, बल्कि उसे पैकेट में पैक कर बेहतर मार्केटिंग भी करती है. इन पैकेट्स की सप्लाई अब दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश, जैसे राज्यों में हो रही है. उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महीने में यहां तकरीबन दो लाख से अधिक पैकेट तैयार हो जाते हैं.

मंगल कार्यों पर उपयोग होता है करशी

करशी बनाने वाली महिलाओं का एक समूह भी है, जिसकी अध्यक्ष रेखा देवी है. रेखा बताती है आज गोबर से महिलाओं को रोजगार मिल रहा है और वो पूरे गांव को आत्मनिर्भर बना रही है. गाय के गोबर से बनाए गए करशी का उपयोग सबसे अधिक मंगल आयोजनों या धार्मिक अनुष्ठानों पर होता है. लोग इन्हें पावन मौकों पर पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन आदी के लिए करते हैं. 

इस तरह आया करशी बनाने का ख्याल

रेखा बताती है कि आज से पहले गाय के गोबर का उपयोग जलावन या उपलों के रूप में ही होता था. अब आज के समय में जब घर-घर गैस-चूल्हा आ गया है, ऐसे में उपलों की मांग तो रही नहीं. ऐसे में गाय के गोबर से कुछ नया काम करने की इच्छा हुई.

बीस रूपए का एक पैकेट

रेखा के मुताबिक एक पैकेट का दाम बीस रुपए का है. इसमें लागत अधिक नहीं आती, मशीनों का काम भी नाम मात्र ही है. गांव की महिलाएं इन करशियों को बनाती है और फिर पैक करती है. उनके इस काम से प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत का सपना सच हो रहा है.  

English Summary: women of merrut district earn good profit by making karshi by cow dung know more about market demand and price
Published on: 13 January 2021, 06:28 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now