किसानों के लिए खुशखबरी! 8 कृषि यंत्रों पर मिलेगा भारी अनुदान, आवेदन की अंतिम तिथि 8 अप्रैल तक बढ़ी Mukhyamantri Pashudhan Yojana: गाय, भैंस और बकरी पालन पर 90% अनुदान दे रही है राज्य सरकार, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया सौर ऊर्जा से होगी खेतों की सिंचाई! PM Kusum Yojana में किसानों को मिलेगी 2.66 लाख तक की सब्सिडी, जानें आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 30 September, 2023 5:43 PM IST
Umashankar Pandey

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में दुनिया का पहला 'जल विश्वविद्यालय' खुलने जा रहा है, जो कि करीब 25 एकड़ जमीन पर बनकर तैयार होगा. इस विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों के साथ-साथ विदेशी छात्रों को भी जल संरक्षण की शिक्षा व नई तकनीकों के बारे में सिखाया जाएगा. बता दें कि इस 'जल विश्वविद्यालय' को पर्यावरण वैज्ञानिक प्रो. रविकांत पाठक और पद्मश्री से सम्मानित जल योद्धा उमाशंकर पांडेय के पहल पर शुरू किया जा रहा है. वहीं, इस काम के लिए पूर्व जिलाधिकारी डॉ. चंद्रभूषण ने उच्च शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है.

मालूम हो कि 'जल विश्वविद्यालय' में जल संकट से निपटने के साथ बच्चों के भविष्य को भी बनाया जाएगा. तो ऐसे में आइए आज दुनिया के पहले जल विश्वविद्यालय की पहल करने वाले उमाशंकर पांडेय के बारे में जानते हैं, इसके अलावा इन्होंने कैसे इस विश्वविद्यालय को बनाने के बारे में सोचा-

कौन हैं उमाशंकर पांडेय?

साल 2023 के पद्मश्री से सम्मानित उमाशंकर पांडेय का नाम जल विश्वविद्यालय से जुड़ा है. बता दें कि यह एक सोशल वर्कर हैं, जो उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के बांदा जिले के जखनी में रहते हैं. यह अपने क्षेत्र में जल संकट की परेशानी को लेकर अपना अहम योगदान देते रहते हैं.

बता दें कि यह युवावस्था में ही विकलांग हो गए और इनका जीवन बहुत ही ज्यादा संघर्षों से भरा हुआ रहा है. हालांकि, विकलांग होने के बाद भी इन्होंने कभी भी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के चलते यह आज देशभर में ‘जल योद्धा’ के नाम से जाने जाते हैं. भविष्य में पानी की दिक्कतों को देखते हुए और लोगों को जागरूक करने के लिए इन्हीं की पहल से भारत में दुनिया का पहला 'जल विश्वविद्यालय' खुलने जा रहा है.

उमाशंकर ने बनाया जल ग्राम

बुंदेलखंड के ज्यादातर गांव सूखे की समस्या से जूझ रहे थे. उमाशंकर का गांव जखनी भी पानी की परेशानी से काफी लंबे समय से झूझ रहा था. ऐसे में उमाशंकर पांडेय ने अपने गांव में जल ग्राम बनाने का फैसला लिया और जल संकट को दूर करने का काम शुरू कर दिया. अपने इस काम में इन्होंने कड़ी मेहनत की और वह सफल भी हुए. जैसे ही उनके गांव में जल ग्राम बनकर तैयार हुआ उमाशंकर के द्वारा पूरे किए गए इस कार्यों को पूरे देश में सरहाया गया.

उमाशंकर के अनुसार, अपने गांव में जल ग्राम बनाने के लिए उन्होंने लगभग 2,000 बीघे में मेड़बंदी की थी. इनकी मेहनत के चलते आज इनका पूरा गांव पानी की परेशानी से मुक्त है.

ये भी पढ़ें: यूपी में खुलेगा दुनिया का पहला 'जल विश्वविद्यालय', जानें कौन ले सकेगा दाखिला और क्या-क्या पढ़ाया जाएगा

उमाशंकर को मिले कई पुरस्कार

‘जल योद्धा’ उमाशंकर को उनके द्वारा किए गए काम को लेकर कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. इन्हें कृषक सम्मान राज्य स्तरीय सम्मान, रजत की बूंदें राष्ट्रीय पुरस्कार, राष्ट्रीय संवैधानिक जल योद्धा सम्मान आदि अवार्ड से सम्मानित किए जा चुके हैं.

English Summary: Umashankar Pandey World's first 'Water University' Padmashree water shortage
Published on: 30 September 2023, 05:50 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now