Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! PM Kusum Yojana से मिलेगी सस्ती बिजली, राज्य सरकार करेंगे प्रति मेगावाट 45 लाख रुपए तक की मदद! जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 26 September, 2019 11:07 AM IST

हिमाचल के हमीरपुर जिले में बमसन ब्लॉक के छोटे से गांव हरनेड़ के किसान ललित कलिया ने अपने मेहनत और जज्बे के बल पर पहले प्राकृतिक खेती को उगाने का हुनर सीखा है. जिले के किसानों को खेतों में जैविक खादों से विभिन्न प्रकार के मौसमी उत्पाद को उगाने को लेकर ट्रेंड करने लगे हुए है. ललित अब दूसरे किसानों और उन लोगों से जो खेतों से दूर होकर नौकरी की तालाश में भटक रहे है उनके लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन रहे है. केवल सात महीने के अंदर ही उन्होने अपने जज्बे के बल पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण हमीरपुर ने उनको मास्टर ट्रेनर भी बनाया है. आज ललित खेती को अपनाने को लेकर अपने गांव और विभाग के द्वारा लगाए जाने वाले किसान जागरूकता शिविरों में लोगों को देसी गायों के गोबर और मूत्र से तैयार घोल की जानकारी को प्रदान कर रहे है.

सूंडियों के प्रकोप से बचने के लिए तैयार किया घोल

यहां पर ब्रह्म अस्त्र के नाम से भी देसी गाय के गोबर से एक घोल तैयार किया गया है, इसका प्रयोग फसल में सूंडियो का प्रकोप होने पर ही किया जाता है. इस घोल को भी उन्होंने गाय के गोबर मूत्र और दस अलग-अलग पेड़ों के पत्ते जैसे शीशम, पपीता, आमला व अमरूद इत्यादि को मिश्रित कर तैयार किए गए मिश्रण भी किसानों के लिए खास लाभदायक सिद्ध हो रहा है. इससे इनसे फसलों और पौधों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं हो रहा है.

खाद के मुकाबले तैयार हुआ धन जीवामृत

उन्होंने धन जीवामृत को तैयार किया है, खेतों में तैयार किए गए हर तरह की फसलों तथा उत्पादों में पौष्टिकता बरकरार रहेगी. उन्होंने द्रेक अस्त्र स्प्रे को तैयार किया है, जो कि द्रेक नाम के पौधे के पत्ते और अन्य पांच तरह की औषधीय पौधों जिसके ना जानवर खाते हो उन सभी को एकत्रित करके उसमें देसी नस्ल के गाय के गोबर और मल मूत्र को मिला कर तैयार किया गया है. इस नये स्प्रे का इस्तेमाल 15 प्रकार के कीटों से फसल को बचाने के लिए किया जाता है.

English Summary: This farmer is teaching the skills of natural farming in Himachal Pradesh
Published on: 26 September 2019, 11:12 AM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now