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Updated on: 3 August, 2026 11:12 AM IST
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के बिजाती गांव के प्रगतिशील किसान जसविंदर सिंह

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के बिजाती गांव के प्रगतिशील किसान जसविंदर सिंह पिछले 25 वर्षों से खेती कर रहे हैं. लंबे समय तक उन्होंने पूरी तरह रासायनिक खेती की, लेकिन बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति और फसलों में बढ़ते कीट एवं रोगों ने उन्हें खेती के तरीके में बदलाव करने के लिए प्रेरित किया. वर्ष 2021 में उन्होंने जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों को अपनी खेती में शामिल किया. आज वे रासायनिक और जैविक खेती का संतुलित मॉडल अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं.

उनका कहना है कि जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों के उपयोग से खेती की लागत में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी आई है, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और लगभग सभी फसलों में अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं. ऐसे में आइए उनकी सफलता की कहानी के बारे में विस्तार से जानते हैं-

25 वर्षों से खेती से जुड़े हैं जसविंदर सिंह

प्रगतिशील किसान जसविंदर सिंह उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के बिजाती गांव के निवासी हैं. वे पिछले लगभग 25 वर्षों से खेती-बाड़ी कर रहे हैं. खेती उनके परिवार की मुख्य आजीविका है और वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने खेती में कई नए प्रयोग भी किए हैं.

वर्तमान में वे कुल 15 एकड़ भूमि पर खेती करते हैं. खेती के साथ-साथ उन्होंने पशुपालन को भी अपनी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनाया है. उनके पास करीब 15 पशु हैं, जिनसे मिलने वाला गोबर जैविक खेती में भी उपयोगी साबित हो रहा है. उनका मानना है कि खेती और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं. यदि दोनों को साथ लेकर चला जाए तो खेती अधिक लाभदायक और टिकाऊ बन सकती है.

अलग-अलग मौसम में लेते हैं कई फसलें

जसविंदर सिंह अपनी जमीन पर सालभर विभिन्न फसलों की खेती करते हैं. रबी सीजन में वे मुख्य रूप से गेहूं, मटर, मक्का सहित अन्य फसलें उगाते हैं. वहीं खरीफ सीजन में उनका मुख्य जोर धान की खेती पर रहता है.

फसल विविधीकरण के कारण उन्हें पूरे वर्ष आय का स्रोत मिलता रहता है और किसी एक फसल पर निर्भरता भी कम रहती है.

पहले पूरी तरह रासायनिक खेती करते थे

जसविंदर सिंह बताते हैं कि वर्ष 2021 से पहले वे पूरी तरह रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भर थे. शुरुआत में उत्पादन ठीक मिलता था, लेकिन समय के साथ खेती की लागत लगातार बढ़ती गई. हर सीजन में अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों और दवाओं की जरूरत पड़ने लगी.

इसके साथ ही फसलों में कीट और रोगों का प्रकोप भी बढ़ने लगा. मिट्टी पहले जैसी उपजाऊ नहीं रही और उसकी संरचना भी प्रभावित होने लगी. वे बताते हैं कि खेती से लाभ कम होने लगा था, इसलिए उन्होंने ऐसा विकल्प खोजने का निर्णय लिया जिससे लागत भी कम हो और मिट्टी की सेहत भी सुधरे.

वर्ष 2021 से शुरू किया नया प्रयोग

साल 2021 में जसविंदर सिंह ने अपनी खेती में बदलाव की शुरुआत की. उन्होंने पूरी तरह रासायनिक खेती छोड़ने के बजाय 50 प्रतिशत रासायनिक और 50 प्रतिशत जैविक खेती का मॉडल अपनाया.

इस दौरान उन्होंने जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों का उपयोग शुरू किया.

शुरुआत में उन्होंने सीमित क्षेत्र में इन उत्पादों का प्रयोग किया. जब उन्हें अच्छे परिणाम मिलने लगे, तो धीरे-धीरे उन्होंने इन्हें अपनी लगभग सभी फसलों में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.

जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पाद- जायटॉनिक एनपीके, जायटॉनिक किट, जायटॉनिक गोधन, जायटॉनिक-एम और जायटॉनिक सुरक्षा

इन जैविक उत्पादों का करते हैं उपयोग

जसविंदर सिंह वर्तमान में जायटॉनिक एनपीके, जायटॉनिक मिनी किट, जायटॉनिक गोधन, जायटॉनिक-एम और जायटॉनिक सुरक्षा जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं. वे बताते हैं कि ये सभी उत्पाद खेती की अलग-अलग आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करते हैं.

गोबर की खाद तैयार करने में जायटॉनिक गोधन का उपयोग किया जाता है, जबकि फसल की जरूरत के अनुसार अन्य उत्पादों का भी प्रयोग किया जाता है. उनका कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से इन उत्पादों का उपयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है.

लागत में आई लगभग 30 प्रतिशत की कमी

जसविंदर सिंह के अनुसार सबसे बड़ा लाभ खेती की लागत में कमी के रूप में मिला है. वे बताते हैं कि पहले रासायनिक खेती में उर्वरकों और कीटनाशकों पर काफी अधिक खर्च होता था. लेकिन जब उन्होंने जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों को खेती में शामिल किया, तो रासायनिक इनपुट की आवश्यकता कम होने लगी.

आज उनकी खेती की कुल लागत में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी आ चुकी है. उनका मानना है कि यह बचत सीधे किसान की आय बढ़ाने में मदद करती है.

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के बिजाती गांव के प्रगतिशील किसान जसविंदर सिंह

फसलों में मिला बेहतर परिणाम

जसविंदर सिंह बताते हैं कि जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों का लाभ उन्हें केवल एक फसल में नहीं, बल्कि लगभग सभी फसलों में मिला है.

धान, गेहूं, मटर और मक्का जैसी फसलों में पौधों की बढ़वार बेहतर हुई है. फसलें अधिक स्वस्थ दिखाई देती हैं और उनका विकास भी पहले की तुलना में अच्छा होता है. वे कहते हैं कि पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होने से फसल मजबूत बनती है और उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

जायटॉनिक मिनी किट

मिट्टी की उर्वरा शक्ति में हुआ सुधार

जसविंदर सिंह के अनुसार रासायनिक खेती के लगातार उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही थी. लेकिन जैविक उत्पादों के नियमित उपयोग के बाद मिट्टी की संरचना में सुधार दिखाई देने लगा.

अब मिट्टी पहले की तुलना में अधिक मुलायम है और उसमें जैविक गतिविधियां भी बेहतर हुई हैं. उनका कहना है कि यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी, तभी लंबे समय तक अच्छी खेती संभव होगी.

कीट और रोगों की समस्या में मिली राहत

जसविंदर सिंह बताते हैं कि पहले उनकी फसलों में विभिन्न प्रकार के कीट और रोगों का प्रकोप अधिक रहता था. इसके कारण उत्पादन प्रभावित होता था और दवाओं पर अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता था.

जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों को खेती में शामिल करने के बाद उन्हें इस समस्या में काफी हद तक राहत मिली है. वे बताते हैं कि अब फसलें अधिक स्वस्थ रहती हैं और अनावश्यक रासायनिक दवाओं पर निर्भरता भी कम हुई है.

पशुपालन से मिल रहा जैविक खेती को सहारा

जसविंदर सिंह के पास लगभग 15 पशु हैं. इन पशुओं से प्राप्त गोबर का उपयोग वे जैविक खाद तैयार करने में करते हैं. इससे एक ओर जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है, वहीं दूसरी ओर खेतों में अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद भी उपलब्ध हो जाती है.

उनका मानना है कि यदि किसान खेती के साथ पशुपालन भी करें, तो जैविक खेती को सफल बनाना और आसान हो सकता है.

संतुलित खेती है भविष्य की जरूरत

जसविंदर सिंह का कहना है कि उन्होंने पूरी तरह रासायनिक खेती छोड़ने के बजाय संतुलित खेती का रास्ता चुना है. उनके अनुसार वर्तमान समय में धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर बढ़ना अधिक व्यावहारिक है.

वे कहते हैं कि एकदम से बदलाव करने के बजाय किसान चरणबद्ध तरीके से जैविक उत्पादों को अपनाएं. इससे उन्हें परिणाम समझने और खेती को नई दिशा देने में आसानी होगी.

किसानों के लिए दिया महत्वपूर्ण संदेश

जसविंदर सिंह सभी किसानों से अपील करते हैं कि वे केवल अधिक उत्पादन पर ही ध्यान न दें, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी प्राथमिकता दें. उनका कहना है कि यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो आने वाले वर्षों में भी अच्छी खेती संभव होगी.

वे किसानों को सलाह देते हैं कि वे अपनी खेती में जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करें और धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें. उनके अनुसार इससे खेती की लागत घटेगी, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और फसलों में बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे.

सफलता की नई मिसाल

आज जसविंदर सिंह उत्तराखंड के उन किसानों में शामिल हैं जिन्होंने आधुनिक सोच के साथ पारंपरिक खेती में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया है.

25 वर्षों के अनुभव के आधार पर वे मानते हैं कि केवल अधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग ही अच्छी खेती की गारंटी नहीं है. सही तकनीक, संतुलित पोषण और मिट्टी की देखभाल ही टिकाऊ खेती की असली पहचान है.

उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि किसान जायडेक्स कंपनी की जायटॉनिक टेक्नोलॉजी आधारित जैविक उत्पादों को वैज्ञानिक तरीके से अपनाएं, तो खेती की लागत कम करने, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं.

English Summary: Jaswinder Singh success story Zydex Zytonic organic farming
Published on: 03 August 2026, 11:19 AM IST

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