Success Story: 1250 एकड़ में जैविक खेती, देसी गायों की डेयरी और 40 करोड़ का टर्नओवर - लेखराम यादव की सफलता की कहानी Success Story: 72 एकड़ में गन्ने की खेती, इंटरक्रॉपिंग मॉडल और 2 करोड़ का कारोबार - सरताज खान की सफलता की कहानी खेती से 100 करोड़ का टर्नओवर: हेलीकॉप्टर के बाद अब हवाई जहाज से कृषि क्रांति लाएंगे डॉ. राजाराम त्रिपाठी Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार! Watermelon: तरबूज खरीदते समय अपनाएं ये देसी ट्रिक, तुरंत जान जाएंगे फल अंदर से मीठा और लाल है या नहीं
Updated on: 7 February, 2019 5:35 PM IST

आज हम बात कर रहे है बिहार के कन्हैयाचक गांव के किसान समीर कुमार चौधरी के बारे में, जो एक नर्सरी चलाते है. उनकी नर्सरी बिहार में काफी लोकप्रिय है. लोग दूर-दराज़ से उनकी नर्सरी में आते है. समीर चौधरी की नर्सरी इसलिए इतनी लोकप्रिय है  क्योंकि उनकी नर्सरी में गर्म मसाले और चंदन के कई पौध हैं.

समीर की नर्सरी में हर तरह के मसाले उपलब्ध है. वह पोली - ट्री, शीशम,  चंदन,  लाल मिर्च आदि की खेती के साथ -साथ कटहल और अमरूद की भी खेती करते हैं. उनके पास कुल 7 से 8 एकड़ ज़मीन है जिस पर वह खेती करते हैं.

लोग उनसे बड़ी मात्रा में यह सब मसाले और सब्ज़िया खरीदते है. वह ज्यादा लोकप्रिय अपने मसालों और चन्दन की खेती की वजह से है. इसी की वजह से ही उनकी ज्यादा आमदनी होती है.

उनकी आमदनी का एक मात्र सहारा उनकी नर्सरी है जिसका उन्होंने बड़े प्यार से नाम रखा है "वाण गंगा नर्सरी " अब उनकी यह नर्सरी पुरे बिहार में लोकप्रिय बनती जा रही है. मसालों की बढ़ती मांग की वजह से आज वह सालाना 6 -7  लाख रुपये का लाभ कमा रह हैं. आने वाले समय में उनके मसाले आदि दूसरे राज्यों में भी निर्यात किये जायेंगे.

किसी भी प्रकार के मसाले और चंदन खरीदने के लिए आप यहां से पूर्ण जानकारी ले सकते हैं.

पता : वाण गंगा नर्सरी

जिला खगड़िया सुदूर कन्हैयाचक गांव (बिहार )

ऐसी ही जानकारियां पाने के लिए आप हमारी वेबसाइट से जुड़े रहे -

English Summary: Bihar hot spices nursery
Published on: 07 February 2019, 05:39 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now