खुशखबरी! किसान अब सोलर पावर प्लांट लगाकर बेच सकेंगे बिजली, 25 साल तक होगी तगड़ी कमाई सरकार का बड़ा कदम: फर्जी BPL कार्ड पर 20 अप्रैल से पहले सुधारें डेटा, नहीं तो होगी FIR! Black Pepper: छत्तीसगढ़ का कोंडागांव बना काली मिर्च का नया हब, जानें कैसे यहां के किसान बढ़ा रहे अपनी उपज Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Tarbandi Yojana: अब 2 बीघा जमीन वाले किसानों को भी मिलेगा तारबंदी योजना का लाभ, जानें कैसे उठाएं लाभ? सिंचाई के लिए पाइप खरीदने पर किसानों को ₹15,000 तक की सब्सिडी, जानिए पात्रता और आवेदन प्रक्रिया!
Updated on: 8 September, 2021 2:05 PM IST
Hiljatra Festival

पहाड़ों में लोकपर्व आज भी आस्था, विश्वास, रहस्य और रोमांच का प्रतीक है.  इनमें से कुछ ऐसे पर्व भी हैं जो खास महत्व के है. ऐसी ही खास बात है सोर घाटी पिथौरागढ़ के ऐतिहासिक हिलजात्रा पर्व में. ये पर्व पहाड़ों की लोक- संस्कृति को दर्शाते हैं तो दूसरी तरफ लोगों को एकता के सूत्र में बांधते भी हैं. इस लेख में पढ़ें इस पर्व की खासियत के बारे में.

दरअसल सोरघाटी पिथौरागढ़ का ऐतिहासिक हिलजात्रा पर्व पिछले 500 सालों से मनाया जा रहा है. इस दिन लखिया भूत का आशीर्वाद लेने के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है. पहाड़ी लोग लखिया भूत को भगवान शंकर के रूप में पूजते हैं. पहाड़ के लोग इस पर्व को कृषि पर्व के रूप में मनाते हैं. इस अनोखे पर्व में बैल, हिरण, लखिया भूत जैसे कई पात्र मुखौटों के साथ मैदान में उतरकर लोगो को रोमांचित करते हैं.

हिलजात्रा पर्व का इतिहास (History of Hiljatra Festival)

इस पर्व की शुरुआत पिथौरागढ़ जिले के कुमौड़ गाँव से हुई थी. इस गाँव में चार महर भाई कुंवर सिंह महर, चेह्ज सिंह महर, चंचल सिंह महर और जाख सिंह महर थे . 16 वीं सदी में इस गांव के ये चारों भाई हर साल पड़ोसी मुल्क नेपाल इंद्रजात्रा में शामिल होने जाते थे. जहां नेपाल के राजा इनकी वीरता से इतना प्रभावित हुए कि नेपाल नरेश ने यश के प्रतीक ये मुखौटे महर भाइयों को इनाम में दिए. साथ ही कृषि के प्रतीक रूप में हल भी दिया. तभी से पिथौरागढ़ की सोरघाटी में इन भाईयों ने हिलजात्रा पर्व प्रारंभ करवाया.

इस पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता हैं. हिलजात्रा के प्रमुख पात्र लखिया के तेवरों को देखते हुए इसे लखिया भूत कहा जाता है, परंतु ग्रामीण इसे भगवान शिव का सबसे प्रिय और बलवान गण वीरभद्र मानते हैं.

हिलजात्रा पर्व कैसे मानते हैं  (How to Celebrate Hiljatra Festival)

हिलजात्रा है मुखौटा नृत्य नाटिका मंचन. यह पर्व बरसात की ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है. इस दिन लकड़ी के मुखौटों  से सजे पात्र जिन्हें लखिया भूत नाम से जाना जाता है, पारम्परिक ढोल – नगाड़े के साथ लाल ध्वजा पताका लेकर नृत्य करते हैं. इसमें पात्र घास – फूस के घोड़े में सवारी करके आते है. अपने करतबों से आसपास की जनता को सम्मोहित करते हैं. इस दिन ये लोग अलग – अलग क्रियाएँ करते हैं. आसपास के लोग नाचते -कूदते सभी लोग अक्षत और फूल चढ़ाकर लखिया भूत की पूजा करके अच्छी फसल की कामना करते हैं.   लखिया भूत के वापिस जाने के साथ ही हिलजात्रा पर्व का समापन होता है.

English Summary: Hilljatra festival, in which people get the blessings of ghosts
Published on: 08 September 2021, 02:15 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now