Tarbandi Yojana: अब 2 बीघा जमीन वाले किसानों को भी मिलेगा तारबंदी योजना का लाभ, जानें कैसे उठाएं लाभ? Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Subsidy: भेड़-बकरी पालन शुरू करना हुआ आसान! सरकार दे रही 50% सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन! Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक सिंचाई के लिए पाइप खरीदने पर किसानों को ₹15,000 तक की सब्सिडी, जानिए पात्रता और आवेदन प्रक्रिया!
Updated on: 1 December, 2020 11:36 AM IST
Trout Fish

हिमाचल की हिमाचली ट्राउट फिश की मांग देशभर के महानगरों में बढ़ती जा रही है. यही वजह है कि प्रदेश का मत्स्य पालन विभाग इसकी मांग को पूरी करने के लिए प्रयासरत है. इसके चलते विभाग ने राज्य के कसोल गांव में पहली मत्स्य पालन की पहली यूनिट लगाई है. यहां के कोलडैम में मछली का बीज डाला गया है. इस जलाशय में लगभग 23,000 हजार ट्राउट बीज डाला गया है.

एक महीने में 150 ग्राम

जलाशयों में डाले गए मछली बीज से महज एक महीने में 150 ग्राम की मछली हो जाएगी. विभाग का ऐसा मानना है कि इस एक जलाशय से ही सैकड़ों मैट्रिक टन मछली का उत्पादन होगा. यह पहला प्रयोग है और सफल होने पर राज्य के दूसरे हिस्सों के जलाशयों में यह ट्राउट फिश का बीज डाला जाएगा. विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोलडैम का तापमान ट्राउट के पालन के लिए उपयुक्त है. गौरतलब है कि कुल्लू तथा मंडी में रेनबो प्रजाति की ट्राउट को परिपक्व होने में 15 महीने का समय लगता है. वहीं बिलासपुर में इस प्रजाति को परिपक्व होने में 7-8 महीने का समय लगता है. विभाग के डायरेक्टर सतपाल मेहता ने बताया कि कोलडैम इस प्रजाति के उत्पादन के लिए अनुकूल है इस वजह से इसे तैयार होने में 7 महीने लगेंगे.

600 मीट्रिक टन का उत्पादन

बता दें कि हिमाचली ट्राउट फिश देश के महानगरों में काफी चाव से खाई जाती है. यही वजह है कि लगातार इसका उत्पादन बढ़ाना आवश्यक हो गया है. हिमाचल की मछली राजधानी दिल्ली में भी खूब पसंद की जाती है. हिमाचल के कांगड़ा, कुल्लू, चंबा, सिरमौर, किन्नौर और शिमला में मछली की इस किस्म का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. राज्य में सालभर में तक़रीबन 600 मीट्रिक टन के आसपास इसका उत्पादन होता है. गौरतलब है कि ट्राउट फिश काफी स्वादिष्ट और पौष्टिक मछली होती है जिसकी महानगरों के फाइवस्टार होटल्स में अच्छी खासी मांग रहती है.

ट्राउट फिश के लिए अनुदान -

यदि आप ट्राउट फिश का उत्पादन करना चाहते हैं तो प्रधानमंत्री संपदा मत्स्य योजना के इसका उत्पादन करके अच्छा ख़ासा अनुदान ले सकते हैं. हिमाचली ट्राउट फिश हैचरी की एक यूनिट के लिए 50 लाख का खर्च होता है. डायरेक्टर मेहता का कहना है कि यूनिट के लिए सरकार सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत, महिला एवं अनुसूचित जाति और जनजाति को 60 प्रतिशत का अनुदान देती है. छोटी यूनिट निर्माण में 3 लाख रुपये का खर्च आता है जिसपर भी सरकार अनुदान देती है. 

English Summary: trout fish production in kol dam bilaspur himachal pradesh
Published on: 01 December 2020, 11:53 AM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now