कभी गरीबों की थाली में अपना ठिकाना बनाने वाला 'मोटा अनाज' आज अमीरों का मनपसंद आहार बन रहा है. कभी जिस आहार को निर्धनता, बेबसी व गुरबत का प्रतीक माना जाता था, आज वही अमीरों की जरूरत बन गई है. आखिर कैसे हो रहा है ये कमाल? बताएंगे आपको सब कुछ, लेकिन उससे पहले हम उन सभी लोगों को मोटे अनाज के बारे में बताते चले जो इससे अनजान हैं.
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मछुआरों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान
भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में मछुआरों के मुद्दें पर मंत्रिस्तरीय वार्ता का आयोजन किया गया। भारत के कृषि और कृषक कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने श्रीलंका…
एक नजर मोटे अनाज पर?
आज की तारीख में भले ही हमारी थाली में विभिन्न प्रकार के व्यंजन अपना ठिकाना बना चुके हों, लेकिन मानव उद्भव से लेकर देश की आजादी तक मोटे अनाज से हमारा चोली दामन का साथ रहा है, लेकिन जैसे-जैसे आधुनिकता के युग से हमारा परिचय होता गया, ठीक वैसे-वैसे ही मोटे अनाज हमारी थाली से ओझल होते गए. कल तक हमारी थाली में अपना ठिकाना बनाने वाले मोटे अनाजों की जगह गेहूं, चावल, दाल सहित अन्य पश्चिमी व्यंजनों ने ली. लोग इन व्यंजनों को अपनी संपन्नता का प्रतीक समझते हुए इसे खास तरजीह देने लगे और फिर आहिस्ता-आहिस्ता मोटे अनाज उपेक्षित होते गए.
वहीं, आजादी के बाद से ही खाद्द संकट से जूझ रहे भारत में हरित क्रांति के बाद तो यूं समझिए की मोटे अनाज का नामों निशान ही मिट गया. बाजार में इसकी मांग व उचित कीमत नहीं मिल पाने की वजह से किसानों ने इसे उगाना ही बंद कर दिया. इसकी खेती महज आदिवासी इलाकों तक ही सीमित रह गई. वहीं, हरित क्रांति के बाद अनाज की अत्याधिक भरमार के बाद से तो लोगों का मोटे अनाज से पूरी तरह मोह भंग हो गया.
मोटे अनाज की ओर रुख कर रहे लोग
अब आजादी के सात दशक बाद लोग फिर से मोटे अनाज की ओर विमुख हो रहे हैं. कल तक महज गरीबों की थाली में दिखने वाला यह मोटा अनाज आज अमीरों का मनपसंद आहार बन रहा है. यह कमाल हो रहा है, इन मोटे अनाज के अंदर मौजूद पोषक तत्वों की भरमार को मद्देनजर रखते हुए. इसके अंदर जिस तरह के पोषक तत्व मौजूद हैं, उसे देखते हुए लोग इसकी ओर विमुख हो रहे हैं. चिकित्सक भी लोगों को अपने दैनिक जीवन में मोटे अनाज को खास जगह देने का सुझाव दे रहे हैं. विगत दिनों खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को मोटे अनाज की पैदावार करने के लिए उत्साहित किया था.
किसानों को होगा भारी मुनाफा
आज जिस मोटे अनाज की खेती को अधिकांश किसान अलविदा कह चुके हैं. दरअसल, सबसे ज्यादा मुनाफा इन्हीं मोटे अनाज की खेती करने में होता है, लेकिन बाजार में इसकी मांग में आई गिरावट की वजह से किसानों ने इन फसलों का उत्पादन करना कम कर दिया था, लेकिन अब जब फिर से लोग अपनी पुरानी जीवन शैली की ओर रूख कर रहे हैं, तो किसान भाई फिर से इन फसलों का उत्पादन कर अच्छा खासा मुनाफा अर्जित कर सकते हैं.
आसान होती है इसकी खेती करना
इसके साथ ही मोटे अनाज की खेती करना किसानों के लिए अन्य फसलों की तुलना में कहीं अधिक आसान होती है. मोटे अनाज का उत्पादन कम उपजाऊ वाली भूमि पर भी किया जा सकता है. वो भी कम लागत के साथ.
इस बार होगी जबरदस्त पैदावार
वहीं, मोटे अनाज की ओर लोगों के बढ़ते रूझान के मद्देनजर किसानों ने इसका भारी उत्पादन करना शुरू कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप इस वर्ष इसकी भारी पैदावार होने की संभावना जताई जा रही है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष मोटे अनाज का उत्पादन 49.36 मिलियन टन हो सकता है. इससे पहले 2015-16 से लेकर 2019-20 में इसका औसत उत्पादन 44.01 मिलयन था.English Summary: People are going towards mota anajPublished on: 02 March 2021, 02:36 PM ISTMore on this section
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