Success Story: जैविक उत्पादों के सहारे 20 एकड़ में अनार की सफल खेती, आधी हुई लागत, सालाना टर्नओवर 70 लाख रुपये तक! Rabi Crop Farming: रबी मौसम की फसलों की बुआई हेतु खेत की अग्रिम तैयारी फल और फूलों की खेती में प्रूनिंग के लिए उपयोगी हैं ये STIHL के टूल्स, जानें पूरा विवरण Pusa Corn Varieties: कम समय में तैयार हो जाती हैं मक्का की ये पांच किस्में, मिलती है प्रति हेक्टेयर 126.6 क्विंटल तक पैदावार!
Updated on: 17 December, 2020 7:19 PM IST
Vedic Paint

भारत में पुराने समय से ही गाय के गोबर को उपयोग घरों की लिपाई और पुताई में किया जाता है. वहीं आज भी ग्रामीण अंचलों में कच्चे घरों को गोबर से ही लीपा जाता है. इसके अलावा भी गोबर का कई तरह उपयोग किया जाता है. अब जल्द ही बाजार में गाय के गोबर से बना वैदिक पेन्ट आएगा जिसमें किसी प्रकार रसायन नहीं होगा. यह पूरी तरह इकोफ्रेंडली होगा तथा किसी तरह का नुकसान नहीं करेगा. 

केंद्र सरकार करेगी लॉन्च

गाय के गोबर से बने इस वैदिक पेन्ट को केंद्र सरकार खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन के माध्यम से लॉन्च करेगी. इसकी जानकारी केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दी. गुरूवार को उन्होंने ट्वीट करके बताया कि गाय के गोबर से बना पेन्ट जल्द बाजार में होगा. इस पेन्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से जैविक है और इसमें किसी प्रकार का रसायन नहीं है. इसलिए यह किसी भी प्रकार से हानिकारक नहीं है.

55 हजार का मुनाफा

ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से इस पेन्ट का निर्माण किया गया है. गाय पालन करने वाले किसानों के लिए इससे सालाना अतिरिक्त आय मिलेगी. केन्द्रीय मंत्री ने आमदानी के बारे में बताया कि यह पर्यावरण के लिए किसी तरह से हानिकारक नहीं है बल्कि इससे गाय पालन करने वाले किसानों को 55 हजार रूपये की अतिरिक्त आय होगी.

चार घंटे में सुखेगा

केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक अन्य ट्वीट जानकारी देते हुए बताया कि यह पेन्ट डिस्टेंपर और इमल्शन में मिलेगा. वहीं यह पेन्ट पूरी से इको फ्रेंडली, नॉन टौक्सिक, एंटी फंगल, एंटी बैक्टीरियल और वॉशेबल है. वहीं दीवार पर इसे सुखने में 4 घंटे लगेंगे.

English Summary: organic vedic paint is being prepared from cow dung
Published on: 17 December 2020, 07:24 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now