Krishi Yantra Yojana: रोटावेटर और मल्टी क्रॉप थ्रेशर समेत इन 6 कृषि यंत्रों पर मिल रहा 50% तक अनुदान, जानें कैसे उठाएं लाभ Dudharu Pashu Bima Yojana: दुधारू पशुओं का होगा बीमा, पशुपालकों को मिलेगी 75% सब्सिडी, जानें पात्रता और आवेदन प्रक्रिया! STIHL मल्टी-पर्पस स्टेशनेरी इंजन: आधुनिक कृषि और उद्योग के लिए क्रांतिकारी समाधान Rooftop Farming Scheme: छत पर करें बागवानी, मिलेगा 75% तक अनुदान, जानें आवेदन प्रक्रिया भारत का सबसे कम ईंधन खपत करने वाला ट्रैक्टर, 5 साल की वारंटी के साथ महिलाओं के लिए तंदुरुस्ती और ऊर्जा का खजाना, सर्दियों में करें इन 5 सब्जियों का सेवन ये हैं भारत के 5 सबसे सस्ते और मजबूत प्लाऊ (हल), जो एफिशिएंसी तरीके से मिट्टी बनाते हैं उपजाऊ Mahindra Bolero: कृषि, पोल्ट्री और डेयरी के लिए बेहतरीन पिकअप, जानें फीचर्स और कीमत! Multilayer Farming: मल्टीलेयर फार्मिंग तकनीक से आकाश चौरसिया कमा रहे कई गुना मुनाफा, सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक Wheat Farming: किसानों के लिए वरदान हैं गेहूं की ये दो किस्में, कम लागत में मिलेगी अधिक पैदावार
Updated on: 3 June, 2022 3:24 PM IST
New Improved variety Seed of mustard

देशभर के कृषि वैज्ञानिक आए दिन किसानों के डब्बल फायदे के लिए कुछ ना कुछ शोध करते रहते हैं. इसी कड़ी में हरियाणा के हिसार में स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University) द्वारा गेहूं (wheat), सरसों (Mustard) व जई (Oat) की उन्नत किस्मों को तैयार किया गया है. इससे भी अच्छी बात ये है कि गेहूं, सरसों व जई  की इन उन्नत किस्मों का फायदा ना सिर्फ अब हरियाणा के किसान बल्कि पूरे भारत के किसान ले सकते हैं.

दरअसल, इसके लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत तकनीकी व्यवसायीकरण को बढ़ावा देते हुए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने निजी क्षेत्र की प्रमुख बीज कंपनी से अब समझौता किया है. ऐसे में ये कंपनी अब पूरे देशभर के किसानों तक विश्वविद्यालय के द्वारा विकसित गेहूं की डब्लयूएच 1270, सरसों की आरएच 725 व जई की ओएस 405 किस्मों का बीज तैयार कर किसानों तक पहुंचाएगी.

एक साल में प्राइवेट कंपनियों के साथ दस एमओयू

इसको लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि पिछले एक साल में विभिन्न प्राइवेट कंपनियों के साथ इस प्रकार के दस एमओयू किए जा चुके हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के समझौतों पर हस्ताक्षर कर विश्वविद्यालय का प्रयास है कि यहां विकसित फसलों की उन्नत किस्मों के बीज  व तकनीकों को देश के अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जा सके.

इस समझौते का मकसद क्या है?

इस समझौते का मकसद किसानों तक उन्नत किस्म, विश्वसनीय और उच्च गुणवता वाले बीजों को पहुंचाना है ताकि किसानों की फसलों का उत्पादन और ज्यादा हो सकें, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो (Farmers Income) और वो आर्थिक रूप से और ज्यादा मजबूत हो सके.

ये भी पढ़ें: New Wheat Varieties: DWR ने विकसित की गेहूं की तीन नई किस्में, जानें इनकी खासियत

इन किस्मों की खासियत क्या है?

Wheat WH 1270- देश के उत्तर दक्षिण जोन में बीते साल गेंहू की डब्ल्यूएच 1270 किस्म को खेती के लिए अप्रूव्ड किया गया था. कहा जा रहा है कि गेहूं की इस किस्म से औसत उत्पादन प्रति हेक्टेयर करीब 76 क्विंटल तक होती है. जबकि उत्पादन क्षमता प्रति हैक्टेयर 91.5 क्विंटल है.

Oats OS 405- देश के सेंट्रल जोन के लिए जई की ओएस 405 किस्म एकदम उपयुक्त मानी जाती है. इसके दानों का उत्पादन प्रति हैक्टेयर 16.7 क्विंटल है जबकि इसके हरे चारे का उत्पादन प्रति हैक्टेयर 51.3 क्विंटल है.

Mustard RH 725- सरसों की आरएच 725 किस्म की फलियां अन्य सरसों की किस्मों के मुकाबले कुछ लंबी होती हैं, जिससे तेल की मात्रा ज्यादा निकलती है.

English Summary: New Improved variety Seed of wheat and mustard, farmers income double
Published on: 03 June 2022, 03:33 PM IST

कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं..!!

प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।

Donate now